चार अगस्त की वो खौफनाक रात, जब पल भर में मौत की नींद सो गए थे 29 लोग
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चार अगस्त की वो खौफनाक रात, जब पल भर में मौत की नींद सो गए थे 29 लोग
Photo- News18

भारतीय रेलवे के इतिहास में ऐसी सैकड़ों रेल हादसे दर्ज हैं. पिछले एक साल में कानपुर में भी भयावह ट्रेन हादसा हुआ था. ऐसा ही एक हादसा मध्य प्रदेश के हरदा जिले में हुआ था, जिसे भुलाया नहीं जा सकता है.

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  • Last Updated: August 4, 2017, 4:59 PM IST
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भारतीय रेलवे के इतिहास में ऐसी सैकड़ों रेल हादसे दर्ज हैं. पिछले एक साल में कानपुर में भी भयावह ट्रेन हादसा हुआ था. ऐसा ही एक हादसा मध्य प्रदेश के हरदा जिले में हुआ था, जिसे भुलाया नहीं जा सकता है.

हादसे की वो खौफनाक रात
हरदा में चार अगस्त 2015 की रात को एक ही जगह पर एक के बाद एक दो ट्रेनों के पटरी से उतरने साथ बड़ा हादसा हुआ था. हरदा से खिड़किया स्टेशन के बीच हुए हादसे में कामायनी और जनता एक्सप्रेस की 17 बोगियां पुलिया धंसने से पटरी से उतर गई थीं. हादसे में 29 लोगों की मौत हो गई थी. जबकि 100 से अधि‍क घायल हुए थें.

कहां हुआ था हादसा
दरअसल, काली माचक नदी से पहले बनी एक छोटी पुलिया की है. जहां कामायनी एक्सप्रेस के (मुम्बई-वाराणसी) 11 डिब्बे पुलिया धंसने कारण पटरी से उतर गए, जबकि इसके ठीक बाद जनता एक्सप्रेस (राजेंद्रनगर-कुर्ला) ठीक उसी जगह हादसे का शि‍कार हुई थीं. हादसे से ठीक 8 मिनट पहले दोनों ट्रैक से दो गाड़ि‍यां सुरक्षि‍त गुजरी थीं.



कैसे हुआ था हादसा
हादसा उस वक्त हुआ जब बारिश की वजह से माचक नदी की पुलिया के पास पटरी धंस गई और ट्रेनें पटरी से उतर गईं. रेलवे का कहना था कि 8 मिनट पहले इसी ट्रैक पर दो गाड़ियां गुजरी थीं लेकिन ट्रैक पर अचानक पानी आने से पटरियां डूब गईं और इस पर से ट्रेन निकालने के वक्त ये हादसा हुआ.

रेलवे ट्रैक की गिट्टी बहने से हुआ था हादसा
रेलवे की रिपोर्ट में हरदा रेल हादसे की वजह बारिश के पानी का तेज बहाव बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक ट्रैक में से गिट्टी बह गई थी, जिससे भीषण हादसा हुआ था.

हादसे का लेकर पश्चिम मध्य रेलवे के जीएम रमेश चंद्रा का कहना था कि, भविष्य में रेलवे से ऐसी गलती न हो, इसके लिए पूरी तरह से सावधानी बरती जाएगी.

रेलवे सूत्रों के मुताबिक, जांच में सामने आया था कि मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया गया था. रेलवे की तरह से पहले ये थ्योरी दी गई थी कि बांध से अचानक पानी छोड़ने की वजह हादसा हुआ.

हालांकि, राज्य सरकार ने एक दिन बाद ही इन आरोपों को खारिज कर दिया था. बाद में रेलवे की अपनी जांच में भी इस बात पर मुहर लग गई थी कि, बांध से पानी छोड़ने की पुष्टि नहीं हो रही है. यह हादसा रेलवे ट्रैक की गिट्टी बह जाने से हुआ था.

हादसे को तीन साल गुजर गए, लेकिन हर चार अगस्त की रात को उन तमाम लोगों के जख्म ताजे हो जाते हैं, जिन्होंने इस हादसे में में अपनों को खोया था.
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