आदिवासी परिवार पर भारी पड़ा अंधविश्वास, डॉक्‍टर्स ने यूं बचाई युवक की जान

Praveen Singh Tanwar | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 10, 2019, 6:56 PM IST
आदिवासी परिवार पर भारी पड़ा अंधविश्वास, डॉक्‍टर्स ने यूं बचाई युवक की जान
झाड़-फूंक से मंडराया मौत का खतरा.

हरदा (Harda) और होशंगाबाद (Hoshangabad) जिले के बीच गंजाल नदी के किनारे बसे आदिवासी गांव टीटी नगर (Tribal Village TT Nagar) के रहने वाले मजदूर बबलू ऊईके को सांप ने डस लिया था. झाड़-फूंक से उसकी तबियत खराब हो गई और फिर उसे हरदा जिला अस्‍पताल में भर्ती कराया गया. वह अब ठीक है.

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हरदा. एक तरफ हमारा देश तकनीक और विज्ञान में नित नए आविष्कार कर रहा है, वहीं आज भी गांवों में इलाज के नाम पर अंधविश्वास जारी है. सच कहा जाए तो आज भी गांव वाले इलाज के लिए झाड़-फूंक करने वाले ओझाओं पर निर्भर रहते हैं. ऐसा ही एक मामला हरदा (Harda) और होशंगाबाद (Hoshangabad ) जिले की सीमा पर बसे आदिवासी गांव टीटी नगर (Tribal Village TT Nagar) में सामने आया है. यहां के रहने वाले मजदूर को जहरीले सांप ने डस लिया था. इसके बाद परिजन उसका इलाज कराने के बजाय झाड़ फूंक कराते रहे और जब स्थिति बिगड़ने लगी तब जाकर अस्पताल लेकर गए और फिर सर्प दंश के पीड़ित की जान बच सकी. जबकि परिजनों ने कहा कि उन्होंने अब तक सांप को नहीं मारा,क्योंकि इससे उनका भाई मर जाता.

झाड़-फूंक से मौत के करीब पहुंचा पीड़ित
हरदा और होशंगाबाद जिले के बीच गंजाल नदी के किनारे बसे आदिवासी गांव के रहने वाले मजदूर बबलू ऊईके आज सुबह घर में गेंहू की बोरी हटा रहा था. उसी दौरान उसे जहरीले काले नाग ने हाथ पर डस लिया. बबलू के चिल्लाने पर घर वाले पहुंचे और सांप को वहीं कमरे में बंद कर दिया. फिर शुरू हुआ झाड़-फूंक का दौर. पहले गांव में झाड़-फूंक की गई, लेकिन फायदा न होने पर परिजन उसे बाइक पर बैठाकर हरदा जिले के चारखेड़ा गांव रवाना हुए. रास्‍ते में नाला उफान पर था, जब पार होने लगे तो बाइक बह गयी. हालांकि दूसरी ओर खड़े लोगों की मदद से नाला पार करने के बाद परिजन टिमरनी पहुंचे. झाड़-फूंक कराने के बाद पीड़ित की स्थिति बिगड़ने पर परिजन तीन बजे हरदा जिला अस्पताल पहुंचे. डॉक्टर ने गम्भीर हालत में जा चुके बबलू का इलाज किया और 2 घंटे बाद उसे होश आया.

आदिवासी समाज की ये है मान्‍यता

बबलू के भाई शिवराम ने कहा कि उन्होंने सांप को बंद कर रखा है, जब उनका भाई ठीक हो जाएगा तब उसे मार देंगे. पूछने पर उसने बताया कि हमारे यहां मान्यता है कि सांप को पहले मार दो तो सर्प दंश से पीड़ित व्यक्ति मर जाता है. जबकि हरदा जिला अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि जब परिजन पीड़ित को लाए थे उसकी हालत गम्भीर थी, लेकिन बेहतर इलाज के कारण उसकी जान बच सकी है. साथ ही उन्‍होंने कहा कि सर्प दंश से पीड़ित का इलाज झाड़-फूंक से सम्भव नहीं है.

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First published: September 10, 2019, 6:54 PM IST
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