जिले के आदिवासी ग्राम खारी में आजादी के 7 दशक बाद भी बिजली नहीं

गांव के अंदर बिजली ना होने से आज भी जलती है दिया बाती
गांव के अंदर बिजली ना होने से आज भी जलती है दिया बाती

गांवों में कितना विकास हो रहा है, हरदा का ग्राम खारी इस सरकारी दावे की पोल खोलने को जीता जागता सबूत है. जिले के आदिवासी ग्राम खारी में आज़ादी के बाद से आज तक बिजली नहीं पहुँच पाई है.

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गांवों में कितना विकास हो रहा है, हरदा का ग्राम खारी इस सरकारी दावे की पोल खोलने को जीता जागता सबूत है. जिले के आदिवासी ग्राम खारी में आज़ादी के बाद से आज तक बिजली नहीं पहुँच पाई है. गांव के आदिवासियों ने भी कई मर्तबा बिजली की मांग की पर गांव का अंधेरा दूर नहीं हो सका.

बिजली नहीं होने से ग्रामीण आज भी पुराने तौर तरीको से जीवन जीने को मजबूर हैं. गांव के बच्चों ने मोबाइल और टीवी का सिर्फ नाम सुना है लेकिन टीवी चलता कैसे है, यह उन्हें नहीं मालूम है. क्योंकि बिजली नहीं होने से गांव के किसी घर में आज तक टीवी या मोबाइल नहीं है. कक्षा 6 में पढ़ने वाले बालक का कहना है की टीवी के जरिये नई जानकारियां मिलती हैं, जिनसे वह महरूम हैं.

हरदा जिला मुख्यालय से लगभग 65 किलोमीटर दूर आदिवासी गांव खारी बसा है. 150 की जनसंख्या वाले इस छोटे से गांव में आजादी के 7 दशक बीतने के बाद भी अंधेरा है.जिले के बिजली विहीन गांव में शामिल खारी में आज भी ग्रामीण अंधेरे में रहने को मजबूर हैं. गांव से 5 किलोमीटर दूर बिजली के खम्बे ज़रूर रखे हैं लेकिन क्यों इसका जवाब किसी के पास नहीं हैं.



गांव में महिलाएं आज भी हाथों की चक्की से गेहूं मक्का पिसती है.वहीं गांव के छोटे बच्चे आज भी लालटेन की रौशनी में पढ़ते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि गांव का पहुंच मार्ग आज तक नहीं बना है. एक बुजुर्ग का कहना है कि उनकी 65 साल की उम्र हो गई लेकिन गांव तक बिजली नहीं पहुंची है, इससे उनको भारी निऱाशा है.
वहीं गांव खारी में बिजली क्यों नहीं पहुंची, इसका जवाब विद्युत वितरण कम्पनी के अधिकारी देने से बच रहे हैं. उनका कहना है की आगामी माह में आदिवासी उप योजना में खारी गांव में बिजली पहुंचाने का काम शुरू हो जाएगा. ग्राम पंचायत सचिव का कहना है की ग्रामीण देशी तरीकों से जीवनयापन करते हैं. वन विभाग के माध्यम से ग्रामीणों का सोलर लेम्प दिए गए हैं.
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