प्लांट में जैविक खाद बनाकर लाखों कमा रहे हैं यहां के आदिवासी
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प्लांट में जैविक खाद बनाकर लाखों कमा रहे हैं यहां के आदिवासी
आदिवासी ग्रामीणों की समिति जैविक खाद वन विभाग और किसानो को बेचकर साल में 2 लाख रूपये का लाभांश कमा रही है

आदिवासी ग्रामीणों की समिति जैविक खाद वन विभाग और किसानो को बेचकर साल में 2 लाख रूपये का लाभांश कमा रही है

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मध्य प्रदेश में हरदा जिले के आदिवासी ग्रामीण जैविक खाद बना रहे हैं. आदिवासी ग्रामीणों की समिति जैविक खाद वन विभाग और किसानो को बेचकर साल में 2 लाख रूपये का लाभांश कमा रही है.

हरदा जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर बसे वनांचल का गांव बड़झिरी कुल 220 परिवारों का है. इस गांव में आदिवासी ग्रामीण वनविभाग द्वारा बनाए गए कम्पोस्ट प्लांट में जैविक खाद बना रहे है.

यह प्लांट वन विभाग ने 35 लाख रूपये की लागत से 5 साल से पहले बनाया था. खाद निर्माण के कार्य में 15 आदिवासी महिला और पुरुष काम करते हैं.



केचुए और गोबर और भूसे से इस खाद को बनाया जाता है. यह खाद वन विभाग और बागवानी करने वाले किसान खरीदते हैं. आदिवासी ग्रामीणों की वन समिति 5 रूपये किलो में यह खाद बेचती है. लाभांश की राशि में से अधिकतम 35 प्रतिशत राशि ग्रामीणों की मिलती है.
एक ग्रामीण युवक ने बताया की सीजन के हिसाब से काम चलता है कभी-कभी जलस्तर नीचे जाने से पानी की कमी के कारण प्लांट बंद भी हो जाता है. इस काम से उन्हें पैसे भी मिलते हैं.

एक महिला ने बताया कि केंचुआ खाद बनाते हैं और इससे उन्हें आमदनी होती है. बिक्री के हिसाब से उन्हें पैसे मिलते हैं. वे लोग खेती के अलावा यह काम करते हैं.

वहीं गांव में पदस्थ वनकर्मी ने कहा कि लाभांश की राशि से गांव के विकास के पर खर्च की जाती है. खाद बनाने के काम से आदिवासियों को आजीविका भी मिलती है. प्लांट में 35 टांके बनाये गए है जिसमे खाद निर्माण का काम होता है
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