ये क्वारेंटीन सेंटर बना शादी का मंडप और विधायक-अफसरों ने किया बारात का स्वागत
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ये क्वारेंटीन सेंटर बना शादी का मंडप और विधायक-अफसरों ने किया बारात का स्वागत
एमपी-होशंगाबाद के क्वारेंटीन सेंटर में हुई एक शादी

रेखा (reha) की बारात (barat) का स्वागत खुद विधायक (mla) , एसडीएम, तहसीलदार और समाजसेवियों ने किया.

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होशंगाबाद. पिपरिया में एक यादगार शादी (marriage) हुई. ये लॉकडाउन (lockdown) शादी तो थी ही. मास्क (mask) और सोशल डिस्टेंस (social distance) भी इसमें अपनाए गए. लेकिन खास बात ये थी कि ये शादी क्वारेंटीन सेंटर (Quarantine Center) में हुई. क्वारेंटीन रखी गयी युवती की यहां शादी हुई. मंगलगीत गाए गए और फिर सात फेरे लिए गए. संभवत: ये देश का पहला क्वारेंटीन सेंटर है जहां शादी का मंडप लगा.

पिपरिया का क्वॉरेंटीन सेंटर शादी का मंडप बन गया. इसमें दूल्हा-दुल्हन पक्ष के लोगों के साथ प्रशासन भी घराती और बाराती बना. मेहंदी की रस्म हुई, मंगलगीत गाए गए और फिर वर-वधु ने सात फेरे लिए. रेखा और मनोज एक दूसरे के साथ विवाह बंधन में बंध गए.

लॉकडाउन में शादी
लॉकडाउन ने जाने कितनी शादियों के आयोजन रुकवा दिए.जो हुए उसमें गिने चुने लोग शामिल हो पाए. कोरोना वायरस संक्रमण के डर से शादी-विवाह जैसे आयोजनों पर तमाम तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं. लेकिन यदि भगवान दो दिलों को मिलाने का फैसला कर ले, तो कोरोना वायरस भी इसमें बाधा नहीं बन सकता. पिपरिया के बेरशेवा क्वारंटीन सेंटर में हुई शादी इसी का उदाहरण बनी.
रेड जोन इंदौर से लौटी थी दुल्हन


रामनगर कॉलोनी पिपरिया की रेखा साहू इंदौर की यात्रा करके लौटी थीं.कोरोना से सुरक्षा के कारण प्रशासन ने युवती को बेरशेवा स्कूल में बने अस्थाई कवारेंटीन सेंटर में कवारेंटीन कर दिया. रेखा की 23 मई को ओबेदुल्लागंज गंज निवासी मनोज साहू के साथ शादी थी. लेकिन रेखा तो उस दौरान क्वारेंटीन थी. इसलिए शादी हो तो कैसे हो.घरवालों के मुताबिक शादी टाली भी नहीं जा सकती थी क्योंके अगरे दो साल तक रेखा और मनोज की शादी का कोई मुहूर्त ही नहीं निकल रहा था.

अफसरों की सलाह
परिवार ने अपनी ये समस्या समाज के लोगों को बतायी. उन लोगों ने अफसरों से बात करने की सलाह दी. अफसरों ने कहा एक ही स्थिति में तय तिथि के दिन शादी हो सकती कि शादी का मंडप क्वारेंटीन सेंटर में लगाया जाए.यानि सेंटर में शादी हो. प्रशासन के इस प्रस्ताव को रेखा और मनोज दोनों ने मान लिया.

दुल्हन के पिता नहीं हैं.
युवती के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. युवती के पिता का पहले ही स्वर्गवास हो चुका है. 3 बड़े भाई और 3 बहने हैं. रेखा साहू छोटी है. भाई सब्जी के ठेले पर फेरी लगाकर परिवार का गुजारा करते हैं. इसलिए शादी का खर्च प्रशासन, समाजसेवीयो और बेरशेवा परिवार ने उठाया.

विधायक-अफसर और समाजसेवियों ने किया बारात का स्वागत
रेखा की बारात का स्वागत खुद विधायक, एसडीएम, तहसीलदार और समाजसेवियों ने किया. ओबेदुल्लागंज से कवारेंटीन सेंटर आई बारात का सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए आगवानी की गयी. हिन्दू रीति रिवाज से पंडित ने शादी की रस्में अदा करायीं. दूल्हा बने मनोज ने दुल्हन बनी रेखा की मांग में सिंदूर भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए भरा. विवाह में आमंत्रितों को कवारेंटीइन सेंटर के ग्राउंड में भोज कराया गया.

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