होशंगाबाद: कोरोना से ठीक हुए डॉक्टर को ब्लैक फंगस के संक्रमण ने जकड़ा, चली गई आंख की रोशनी

होशंगाबाद के इटारसी में एक डॉक्टर के एक आंख की रोशनी ब्लैक फंगस की वजह से चली गई. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

होशंगाबाद के इटारसी में एक डॉक्टर के एक आंख की रोशनी ब्लैक फंगस की वजह से चली गई. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

Black Fungus News: कोरोना संक्रमित मरीज ठीक तो हो रहे हैं, लेकिन उसके बाद अब एक नई बीमारी ने लोगों की नींद उड़ा दी है, वो है ब्लैक फंगस. बुधवार को इटारसी इसका एक मामला सामने आया है, जहां एक डॉक्टर की आंख की रोशनी चली गई है.

  • Share this:

होशंगाबाद. मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमित (Corona Infection) मरीज को ठीक होने के बाद एक नई बीमारी ने चिंता में डाल दिया है. इस बीमारी मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल में कई केस सामने आये हैं. इस नई नई बीमारी ने लोगों की नींद उड़ा दी है, वो है ब्लैक फंगस (Black Fungus). बुधवार को इटारसी के एक डॉक्टर की ब्लैक फंगस के संक्रमण से एक आंख की रोशनी चली गई है. ब्लैक फंगस का होशंगाबाद जिले में यह पहला मामला है.

इटारसी के डॉ. प्रताप वर्मा 14 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव हुए थे, उन्हें होशंगाबाद के नर्मदा अपना अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के बाद डॉ. वर्मा कोरोना से तो ठीक हो गए, लेकिन उनकी आंखों में ब्लैक फंगस आ गया, इन्फेक्शन इतनी तेजी से बढ़ा कि डॉ. वर्मा की एक आंखें की रोशनी चली गई. डॉ. वर्मा की हालत बिगड़ती जा रही है, और उनकी आंखों का इंफेक्शन बढ़ता जा रहा है. पिछले दिनों डॉ. वर्मा की मां को भी कोविड हुआ था, काफी इलाज कराने के बाद भी वह ठीक नहीं हो पाईं और अंत में उनकी मौत हो गई.

होशंगाबाद के नर्मदा अपना अस्पताल के संचालक डॉक्टर राजेश शर्मा ने बताया क‍ि ब्लैक फंगस हमेशा कान और नाक में रहता है. कोरोना पीड़ित की इम्युन‍िटी कम होने से यह हावी हो रहा है. खासकर डायब‍िटीज के पेशेंट को अधिक खतरा है. यह नाक से होकर जबड़े और मस्त‍िष्क में पहुंच रहा है. मरीज को स‍िर में दर्द या गले में खराश हो तो वह तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें.

Youtube Video

सरकार की चिंता बढ़ी, सीएम शिवराज ने बुलाई मीटिंग

मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने बताया क‍ि ब्लैक फंगस के संक्रमण की घटनाएं सामने आ रही हैं जो बहुत भयानक है. यह चिंता का विषय है इसमें नाक, मुंह, दांत, आंख मस्तिष्क और बाकी अंग भी संक्रमित हो जाते हैं. अभी तक प्रदेश में 50 रोगियों की की पुष्टि हुई है. इसके इलाज के प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार सुनिश्चित किया जाये. इस बीमारी के कारण, लक्षण पर प्रारंभिक अवस्था में ही ध्यान देने की आवश्यकता है. उपचार महंगा होता है इंजेक्शन महंगे लगते हैं. इसलिए राज्य शासन ऐसे पेशेंट को भरपूर सहयोग करेगा. जो आर्थिक दृष्टि से कमजोर हैं, उनके नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने का पूरा प्रयास करेंगे.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज