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आईएएस ने उठाए बीआरटीएस की प्लानिंग पर सवाल, कहा- विदेशों की नकल भारी पड़ी

48 साल बाद भोपाल में आयोजित हुई नेशनल कांफ्रेंस, देश भर के अर्बन प्लानर्स ने शहरों के विकास पर किया मंथन

48 साल बाद भोपाल में आयोजित हुई नेशनल कांफ्रेंस, देश भर के अर्बन प्लानर्स ने शहरों के विकास पर किया मंथन

इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स इंडिया (ITPI) की 70 वीं नेशनल कांफ्रेंस में हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर भरत यादव ने कहा कि अर्बन प्लानर्स (Urban Planners) नकल न करें, बल्कि हर शहर की स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए योजनाएं बनाई जाए.

भोपाल. दुनिया के दूसरे देशों की देखा-देखी भारत में भी बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस, BRTS) कॉपी कर लिया गया. एक-आध शहर छोड़ दिया जाए तो यह भोपाल, इंदौर, पुणे व दिल्ली जैसे शहरों में फेल हो गया है. लिहाजा, अर्बन प्लानर्स को प्लानिंग में नकल की बजाय स्थानीय पहलु को ध्यान में रखना चाहिए.
हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर भरत यादव ने 48 साल बाद भोपाल में हो रहे इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स इंडिया यानी आईटीपीआई (Institute of Town Planners, India) के 70वें राष्ट्रीय सम्मेलन (70th National Town and Country Planners Conference) में यह बात कही. यादव ने कहा कि भोपाल में बीआरटीएस को कॉपी कर लिया गया. अब लोग परेशान हैं और इसे हटाने की बात हो रही है. प्लानर्स को इस पर विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्लान के लिए जनता को जागरूक करने की जरूरत है. नहीं तो होड़ में ही लोग मेट्रो ट्रेन की मांग करने लगते हैं. जनप्रतिनिधि भी दबाव में आकर फैसला ले लेते हैं लेकिन इससे फायदा नहीं मिलता है. होना यह चाहिए कि पहले प्लानर्स बताएं कि शहर के लिए क्या जरूरी है.
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भोपाल का ईकोसेंसेटिव डेवलपमेंट प्लान बने
अहमदाबाद सेप्ट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शास्वत बंधोपाध्याय का कहना है कि भोपाल का ईकोसेंसेटिव डेवलपमेंट प्लान बने. वंधोपाध्याय के अनुसार वास्तव में भोपाल गार्डन सिटी है, ये नेचर सिटी है. इसे मेंटेन रखना चाहिए. ये दूसरा मुंबई या इसी तरह का कोई मेट्रोपोलिटन शहर नहीं बनना चाहिए. यहां वर्टिकल या होरिजोंटल डेवलपमेंट जैसी बातें करना ही बेमानी है. उन्होंने कहा कि भोपाल का मुख्य मुद्दा वन और तालाब क्षेत्र होने से इकोलॉजी भोपाल की डीएनए है. इसके साथ छेड़छाड़ करना भोपाल को खत्म करने जैसा है. शास्वत के मुताबिक हमने भोपाल का पूरा अध्ययन किया है और निष्कर्ष ये निकला है कि भोपाल का विकास मेनहट्टम, हांगकांग जैसा ऊंचे ईमारतें या बड़े निर्माण करने से नहीं हो सकता. यहां का जो वनक्षेत्र है, पानी के स्रोत हैं, बड़ा तालाब है, इसको साथ लेकर ही चलने पर भोपाल की ग्रोथ होगी.
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देश भर के प्लानर्स कर रहे हैं भविष्य की अर्बन प्लानिंग मंथन
कांफ्रेंस में बीडीए के सीईओ बुद्धेश वैध ने कहा कि शहरों में विकास की सतत प्रक्रिया है. हर शहर में कोई न कोई विकास कार्य चलता रहता है. साथ ही शहर का विस्तार प्लानिंग करने से पहले ही हो जाता है. शहरी नियोजन के जानकारों को इस समस्या पर ध्यान देना चाहिए. इससे पहले, सम्मेलन का शुभारंभ मंत्री प्रभुराम चौधरी, नगरीय आवास एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव मनीष सिंह की उपस्थिति में हुआ. यहां आईटीपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. डीएस मेश्राम, सचिव प्रदीप कपूर, उपाध्यक्ष डॉ. जगदीश सिंह भी उपस्थित रहे. शुक्रवार को सम्मेलन के पहले दिन दिल्ली एसपीए के डीन डॉ. अशोक कुमार, सेंट्रल यूनिवर्सिटी जयपुर के वाइस चांसलर प्रोफेसर नीरज गुप्ता, वीएनआईटी नागपुर के प्रोफेसर डॉ. विजय कापसे ने अर्बन इंडिया 75 स्पेशल प्लानिंग इनिशिएटिव विषय पर अपने प्रजेंटेशन दिए.

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