आंखफोड़वा कांड पर एम्स के डॉक्टर बोले- मरीजों के आंखों की रोशनी वापस आने की उम्मीद नहीं
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आंखफोड़वा कांड पर एम्स के डॉक्टर बोले- मरीजों के आंखों की रोशनी वापस आने की उम्मीद नहीं
बड़वानी नेत्रकांड की लीपापोती में लगे प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे को एम्स दिल्ली के डॉक्टरों की टीम ने बड़ा झटका दिया है. उन्होंने साफ कर दिया कि मरीजों की आंखों की रोशनी वापस आने की उम्मीद बहुत कम है.

बड़वानी नेत्रकांड की लीपापोती में लगे प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे को एम्स दिल्ली के डॉक्टरों की टीम ने बड़ा झटका दिया है. उन्होंने साफ कर दिया कि मरीजों की आंखों की रोशनी वापस आने की उम्मीद बहुत कम है.

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बड़वानी नेत्रकांड की लीपापोती में लगे प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे को एम्स दिल्ली के डॉक्टरों की टीम ने बड़ा झटका दिया है. उन्होंने साफ कर दिया कि मरीजों की आंखों की रोशनी वापस आने की उम्मीद बहुत कम है.

दरसअल, प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा दावा कर रहा था कि मोतियाबिंद शिविर में संक्रमित हुए मरीजों की आंखें ठीक हो जाएंगी, लेकिन एम्स के डॉक्टरों ने दावे को सिरे से नकार दिया है.

एम्स के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल कुमार ने बताया कि, मरीजों की आंखों में इन्फेक्शन आई वॉश में इस्तेमाल की गई दवा की वजह से हुआ है. जिससे इनमें से ज्यादातर मरीजों की आंखों की रोशनी वापस आने की बहुत कम उम्मीद है. हालांकि, दो से तीन मरीज ही ठीक हो सकते है. हालाकि, लैब रिपोर्ट आना बाकी है.



वहीं, एस्म के डॉक्टरों ने निलंबित किए गए डॉक्टर आर एस पालोड की गलती से ज्यादा ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल किए गए उपकरण और दवाई में इन्फेक्शन होने की बात कही है. हालांकि, एम्स के डॉक्टर इंदौर में मरीजों को दिए जा रहे उपचार से संतुष्ट नज़र आए.
इधर, एम्स के डॉक्टरों की जांच के बाद स्वास्थ्य अधिकारी भी ऑपरेशन के दौरान लापरवाही की बात मानने लगे हैं. संयुक्त स्वास्थ्य संचालक डॉ. शरद पंडित के मुताबिक ऑपरेशन के दौरान नियमों को पालन नहीं किया गया है. इसके लिए अलावा मामले की रिपोर्ट भारत सरकार को भी सौंपी जाएगी. इसके लिए डॉयरेक्टर जनरल बाइंडनेस एन के अग्रवाल भी बड़वानी आएंगे.

बताया जा रहा है कि एम्स के डॉक्टरों ने मरीजों की जांच तो कर ली है, लेकिन साथ में राज्य सरकार को भी नसीहित दी है कि टारगेट पूरा करने के चक्कर में इस से ताबड़तोड़ हर जगह मोतियाबिंद ऑपरेशन के शिविर ना लगाए जाएं. बल्कि मरीजों को चिन्हित कर उन्हें बड़े शहरों और स्वास्थ्य सुविधा वाले अस्पताल में लाकर ऑपरेशन करें.

उल्लेखनीय है कि बड़वानी जिला अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए विशेष शिविर लगाया गया था. इस दौरान करीब 80 मरीजों के ऑपरेशन किए गए थे.
ऑपरेशन के बाद कई मरीजों को आंखों में पस, खुजली और दर्द की शिकायत होने लगी, थोड़ी देर बाद ही उन्हें दिखना भी बंद हो गया. धीरे-धीरे ऐसे मरीजों की संख्या 46 तक पहुंच गई.
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