इंदौर के एक उद्योगपति ने बनाया सस्ता वेटिंलेटर, गांव-देहात में भी आसानी से हो सकेगा इस्तेमाल

संजय पटवर्द्धन ने जो वेंटिलेटर बनाया है वो महज़ 50 हजार रुपये का है.

संजय पटवर्द्धन ने जो वेंटिलेटर बनाया है वो महज़ 50 हजार रुपये का है.

Indore. इस वेंटिलेटर की खासियत ये है कि ये सिर्फ 50 हजार रुपये का है और वजन दो किलो. ज़रूरत पड़ने पर ये वातावरण से ऑक्सीजन खींच लेता है.

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इंदौर. इंदौर (Indore) के एक उद्योगपति ने एक वेंटिलेटर बनाया है. इसमें उनके वैज्ञानिक दोस्तों ने उनकी मदद की. उद्योगपति का दावा है कि ये वेंटिलेटर यूरोपीय मानकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है और ये बाज़ार (Market) में उपलब्ध वेंटिलेटर से काफी सस्ता है. इसे गांव खेड़ों में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है.

इंदौर के फैक्ट्री के मालिक संजय पटवर्द्धन ने कोरोना से जूझ रहे देश दुनिया को वेंटिलेटर के सहारे देखा. वेंटिलेटर की कमी और महंगाई ने उन्हें अपने इस नये आविष्कार के लिए प्रेरित किया.

बाज़ार से सस्ता

कोरोना संक्रमण के वक़्त तमाम दवाइयों के साथ साथ कई जीवनरक्षक उपकरणों की भी कमी देखने में आ रही है. कुछ तो अत्यधिक महंगे होने के कारण लोग उनका खर्च नहीं वहन कर पाते. इन्हीं हालात ने संजय पटवर्धन को सोचने पर मजबूर कर दिया.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी मंज़ूरी

उन्होंने अपने एक वैज्ञानिक दोस्त से मदद ली. और 10 माह की मेहनत के बाद उन्होंने वेंटिलेटर बनाकर तैयार कर लिया. इसके साथ ही तय मानक और दस्तावेज की प्रक्रिया भी पूरी कर ली. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से इसकी मंजूरी भी मिल गयी है. यूरोपियन मानकों के अनुसार जीवन रक्षक उपकरण सदैव पारदर्शी होना चाहिए, ताकि मरीजो और उनके परिवार को मशीन की सक्रियता नजर आ सके. इस मशीन में इसका खास ख्याल रखा गया है.

ये है खासियत



यह नॉन इंवेंजिव वेंटिलेटर है. इसमें नाक तक पाइपलाइन जाती है. इसकी कीमत लगभग पचास हजार रुपये है. सामान्यतया वेंटिलेटर की कीमत एक लाख से अधिक होती हैं. इस वेंटिलेटर की खासियत ये है कि इसमें ऑक्सीजन का अधिक फ्लो ज़रूरी नहीं होता है. यह कम फ्लो पर भी काम कर सकता है और ऑक्सीजन न होने पर वातावरण से ऑक्सीजन लेकर मरीज को कुछ घण्टे तक दे सकता है. इसका वजन सिर्फ दो किलोग्राम तक ही है,

ये हैं दोस्त

डॉक्टर भंडारी दंपति ने यह तकनीक इजाद की थी. साथ ही केट के रिटायर्ड वैज्ञानिक अनिल थिप्से की मदद से उद्योगपति पटवर्द्धन ने इसे बनाया है. शुरुआत में यह सिर्फ पांच ही बनाए गए थे जो पहले ही दिन बिक भी गए. अब इसके बाद एक साथ करीब 50 वेंटिलेटर बनाये जाएंगे.


गांव और विदेश का मेल

संजय पटवर्द्धन के मुताबिक वह खुद ग्रामीण इलाके से ताल्लुक रखते हैं. इसलिए इस मशीन को ग्रामीण इलाके को खास ख्याल में रखकर बनाया गया है. इस वजह से यह सस्ता है. साथ ही कई बार ग्रामीण इलाकों से गम्भीर मरीजो को हॉस्पिटल शिफ्ट करने के दौरान वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता होती है. उसमें ये मददगार होगा. इसके साथ विदेशी मानकों का खयाल रखा गया है. उपयोग से पूर्व सभी आवश्यक लायसेंस और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से इसकी मंजूरी मिल चुकी है.

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