सेना से नाता 162 साल पुराना, जानिए अंडमान-निकोबार के सीएनसी अजय आखिर हैं कौन, एमपी से क्या है रिश्ता

अंडमान-निकोबार के सीएनसी अजय सिंह का मध्य प्रदेश से गहरा नाता है. (File)

अंडमान-निकोबार के सीएनसी अजय सिंह का मध्य प्रदेश से गहरा नाता है. (File)

अंडमान-निकोबार के सीएनसी अजय सिंह का मप्र से गहरा नाता है. उनके परिवार का सेना से नाता 162 साल पुराना है. अजय सिंह एमपी से भी खास रिश्ता रखते हैं. वे कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा के साढ़ू हैं.

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इंदौर. कारगिल युद्ध से लेकर सियाचिन ऑपरेशन जैसे कई मिशनों पर जांबाजी दिखा चुके लेफ्टिनेंट जनरल अजय सिंह ने अंडमान-निकोबार के कमांडर इन चीफ (सीएनसी) का पद संभाला है. सिंह उस परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जिसका सेना से रिश्ता 162 साल पुराना है. इनमें सेना के प्रति जुनून परदादा के पिता के समय से ही है.

बता दें, अंडमान और निकोबार द्वीप के सीएनसी अजय सिंह का मध्य प्रदेश से खास रिश्ता है. उनके पद संभालते ही प्रदेश के नरसिंहपुर, जबलपुर व होशंगाबाद जिलों से बधाईयां आने लगीं. दरअसल, सिंह मप्र के पूर्व वित्त मंत्री कर्नल अजय नारायण मुश्रान के दामाद और सांसद विवेक तन्खा के साढ़ू हैं.  लेफ्टिनेंट अजय सिंह फिलहाल सेना मुख्यालय में डीजी, मिलिट्री ट्रेनिंग के पद पर तैनात थे. वे अंडमान निकोबार कमान के कमांडर इन चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल मनोज पांडे की जगह ले रहे हैं.

कुछ ऐसा है ये अनोखा फौज परिवार

सिंह के परिवार का सेना से नाता 162 साल पुराना है. अजय सिंह के परदादा के पिता मलूक सिंह अहलावत 1858 में ब्रिटिश सेना की बंगाल कैवलरी (स्किनरहॉर्स) में शामिल थे. इनके परदादा रिसालदार मेजर राज सिंह अहलावत 1901 में ब्रिटिश सेना की स्किनरहॉर्स रेजीमेंट में शामिल हुए. तीसरे अफगान युद्ध में हिस्सा लिया.
पिता ने 1973 में की थी  आर्मर्ड रेजीमेंट की स्थापना

दादा, ब्रिगेडियर (कर्नल) कदम सिंह अहलावत 1936 में सेना की पूना हॉर्स रेजीमेंट में शामिल हुए. 1962 के युद्ध में पूर्वी लद्दाख में तैनाती के समय एकलेमेटाइज किए बगैर वे दौलतबेग ओल्डी (डीओबी) पहुंच गए. उन्हें वहां हार्ट-अटैक आ गया था. इस वजह से उनका डिमोशन भी हुआ. पिता ब्रिगेडियर एनपी सिंह 1973 में 81 आर्मर्ड रेजीमेंट की स्थापना की थी. उस वक्त इस रेजीमेंट को डेक्कन हॉर्स कहा जाता था.

नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम के 100 साल पूरे



सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे केंद्र शासित प्रदेश के वर्तमान सुरक्षा हालात का जायजा लेने दो दिवसीय दौरे पर बुधवार को जम्‍मू कश्मीर पहुंचे थे. भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम जारी रहने के 100 दिन पूरे होने पर सेना अध्यक्ष का दौरा हो रहा है. उन्‍होंने इस दौरान कई अग्रिम चौकियों का दौरा भी किया.

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