'उनकी तंत्र शक्ति का प्रताप था जब स्वर कोकिला उनके आश्रम पहुंची थीं'

कई भक्तों का मानना है कि महाराष्ट्र में उनकी अज्ञात गुफा थी, जहां वे तंत्र शक्ति के लिए उपासना करते थे.

Jayshree Pingle | News18Hindi
Updated: June 13, 2018, 8:50 PM IST
'उनकी तंत्र शक्ति का प्रताप था जब स्वर कोकिला उनके आश्रम पहुंची थीं'
File Photo- Bhayyuji Maharaj (News18 Creative)
Jayshree Pingle | News18Hindi
Updated: June 13, 2018, 8:50 PM IST
भैय्यू महाराज किस तरह एक अध्यात्मिक गुरू बने या उनके पास कौन सी तंत्र शक्ति थी इसे लेकर कोई भी ठीक से दावा नहीं कर सकता. लेकिन इतना जरूर है कि पहली बार उनसे मिलने आने वाले भक्तों का चेहरा पढ़कर वे उसकी परेशानी बता देते थे. ऐसा दावा उनके कई भक्त करते हैं.

बताया जाता है कि यह उनकी तंत्र शक्ति का ही प्रताप था कि स्वर कोकिला लता मंगेशकर अपनी बहन उषा मंगेशकर के साथ उनके इंदौर आश्रम पर रूक कर पूजा अनुष्ठान करवाने आईं थीं, जिसे लेकर कभी कोई खुलासा तो नहीं किया गया, लेकिन आश्रम के अंदरूनी हलकों में यह चर्चा रही कि बढ़ती उम्र के कारण अपनी खो रही आवाज को वे फिर से पाना चाहती थीं. जिस तरह आशा भोंसले अभी तक गा रही हैं.

दत्त संप्रदाय से जुड़े थे
भैय्यू महाराज घोषित तौर पर दत्त संप्रदाय की संत परंपरा के अनुयायी की तरह दिखाई देते थे. महाराष्ट्र से निकलने वाली इस अध्यात्मिक धारा में कई प्रखर संतों का स्थान है. उत्तर तक प्रवेश करती इस धारा में नाथ संप्रदाय का भी समावेश होता है. वह नाथ संप्रदाय जिसकी तंत्र-मंत्र शक्ति का अध्यात्म में ‌विशेष गहन स्थान है. महाराष्ट्र के ही मुंगले महाराज, भास्करगिरी जी महाराज की प्रेरणा का कई बार भैय्यू महाराज जिक्र करते थे.

भैय्यू महाराज घोषित तौर पर दत्त संप्रदाय की संत परंपरा के अनुयायी की तरह दिखाई देते थे. महाराष्ट्र से निकलने वाली इस अध्यात्मिक धारा में कई प्रखर संतों का स्थान है


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शक्तिपात देते थे
उनके इंदौर स्थित आश्रम में दत्त संप्रदाय के पवित्र ग्रंथ श्री गुरू चरित्र के निरंतर पाठ होते रहते थे. श्री नरसिंह सरस्वती महाराज के जीवन चरित्र से जुड़े इस ग्रंथ को शक्ति पीठ की तरह मान्यता है. कई भक्तों को अनुभव है कि उन्हें भैय्यू महाराज अपनी तंत्र शक्ति से शक्तिपात देते थे. हालांकि उनकी यह तंत्र साधना अधिकतर हाई प्रोफाइल लोगों के लिए थी.

कई भक्तों को अनुभव है कि उन्हें भैय्यू महाराज अपनी तंत्र शक्ति से शक्तिपात देते थे. हालांकि उनकी यह तंत्र साधना अधिकतर हाई प्रोफाइल लोगों के लिए थी


अज्ञात गुफा में साधना
कई भक्तों का मानना है कि महाराष्ट्र में उनकी अज्ञात गुफा थी, जहां वे तंत्र शक्ति के लिए उपासना करते थे. वे स्वयं कई बार कहते थे पानी में लगातार खड़े रह कर साधना करने के कारण उन्हें यह शारीरिक कष्ट हो रहा है. कई बार उनके निजी कक्ष में बैठते हुए वे इस बात पर भी ध्यान आकर्षित करते थे कि कोई अज्ञात नकारात्मक शक्ति उन पर आघात करने आई थी, लेकिन वह कामयाब नहीं हुई. नजदीक रखे टूटे फूलदान से टकराकर वह वापस चलीं गई.

बिना पूछे सब बता देते
पंडित जसराज जी समेत कई बड़े कलाकारों के साथ हारमोनियम बजाने वाले जाने माने कलाकार मुकुंद पेठकर बताते हैं कि वे पूना से पहली बार महाराज के आश्रम में प्रोग्राम देने आए थे. वे कार्यक्रम के बाद उनसे मिलने गए तो उन्होंने बिना कुछ पूछे उनके परिवार, घर और उनके नए घर में किए गए निवेश पर सबकुछ बता दिया. यह सिर्फ उनके लिए ही नहीं बल्कि उनके साथ मौजूद कलाकार अशोक हांडे, गजल गायक अनवर कुरैशी के लिए भी आश्चर्य जनक था. वहां से निकलते हुए उन्होंने नए घर के लिए एक श्री दत्त भगवान की मूर्ति भी उन्हें भेट की.

विलासराव देशमुख और उद्धव ठाकरे खास
राजनीतिक तौर पर देखें तो महाराष्ट्र के प्रभावशाली राजनेता रहे विलासराव देशमुख, गोपीनाथ मुंडे उनके नजदीकी रहें. बाद में शिवसेना में भी उनकी गहरी पैठ हो गई. उद्धव ठाकरे और उनके परिवार ने जब भैय्यू महाराज के आतिथ्य को स्वीकार किया तब मामला सुर्खियों में रहा कि राज ठाकरे के साथ चले रहे विवादों के संदर्भ में यह यात्रा है. उन्हें लेकर धारणा यह भी बनती रही कि राजनीतिक नेता, दल का प्रभाव बढ़ाने के लिए भी भैय्यू महाराज अपनी राजनीतिक शक्ति का उपयोग करते हैं. प्रतिभा देवीसिंह पाटिल को लेकर उनका किस्सा मशहूर है कि उन्होंने बहुत पहले ही उनके राष्ट्रपति होने की भविष्यवाणी कर दी थी.

प्रतिभा देवीसिंह पाटिल को लेकर उनका किस्सा मशहूर है कि उन्होंने बहुत पहले ही उनके राष्ट्रपति होने की भविष्यवाणी कर दी थी


चुनाव का फैक्टर बन गए
मुख्यमंत्री, मंत्री, नेता, ब्यूरोक्रेट्स ऐसी लंबी चौड़ी श्रृखंला उनके आसपास बनती चली गई. साथ में उनका एनजीओ, पारमार्थिक ट्रस्ट और समाज उत्थान का दायरा बनता चला गया और वे राष्ट्रसंत की उपाधि तक पहुंच गए. महाराष्ट्र के मराठवाड़ा, विदर्भ में उनके एनजीओ ने कई काम शुरू किए. जिस कारण उनके अनुयायियों की भी एक बड़ी फौज यहां खड़ी हो गई. नेताओं को चुनाव जीतने के लिए अपने प्रभाव लिए भैय्यू महाराज एक अनिवार्यता बन गए.

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टिकट से लेकर जमीन तक दखल
वे मूलत: राष्ट्रवादी विचारधारा के थे, जिस कारण संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत से उनकी नजदीकियां बन गई. वहां पर वे अध्यात्मिक कम राष्ट्रवादी संत की तरह अपनी इमेज गढ़ने में कामयाब रहे. उनके राजनीतिक रसूखों का परिणाम यह रहा कि चुनाव में टिकट चाहने वाले, सरकार में मंत्री पद चाहने वाले, बेहतर ट्रांसफर, पोस्टिंग चाहने वाले महाराष्ट्र के खास कॉलेजों में एडमिशन चाहने वालों की भीड़ उनके आसपास जुटती रही. वहीं कई जमीनों, प्रापर्टी के विवाद उनकी मध्यस्थता से सुलझाए जाने लगे. कई नामचीन दंबग लोग उनके शरणागत देखे जाने लगे. इस तरह उनका काम नाम गुरू के साथ-साथ एक निगोशिएटर की तरह भी बनता चला गया.

उनके राजनीतिक रसूखों का परिणाम यह रहा कि चुनाव में टिकट चाहने वाले, सरकार में मंत्री पद चाहने वाले, बेहतर ट्रांसफर, पोस्टिंग चाहने वाले महाराष्ट्र के खास कॉलेजों में एडमिशन चाहने वालों की भीड़ उनके आसपास जुटती रही


पीछे छूटता अध्यात्म अवसाद का कारण
इन सबके बावजूद अध्यात्म उनका मूल स्वभाव था. जो शायद कुछ पीछे छूट रहा था इसकी पीड़ा वे कई बार व्यक्त करते और कहते कि बहुत भीड़ आने के कारण वे अपनी साधना यहां नहीं कर पाते, वगैरा वगैरा… एक दोहरी जिंदगी जीने का परिणाम भी उन्हें अवसाद की ओर खींच कर ले गया. अपने फैले हुए साम्राज्य को संभालना उनको कई बार मुश्किल हो रहा था. कुछ समय पहले ही उन्होंने मीडिया को खुलकर बताया था कि वे अपने सार्वजनिक जीवन से सन्यास ले रहे हैं और पूरी तरह से अध्यात्म की ओर लौटना चाहते हैं.

कर्ज से परेशान
इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि वे बहुत कर्जें में हैं. और आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं. इस दौरान उन्होंने कुछ राजनेताओं की ओर इशारा भी किया. लेकिन कुछ ही समय बाद फिर वे सुर्खियों में छा गए जब उन्हें शिवराज सरकार ने राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया. मीडिया में उठे विवाद के बाद उन्होंने इस प्रस्ताव को हालांकि ठुकरा दिया. लेकिन घोषणा करने के बाद भी अपने राजनीतिक सार्वजनिक जीवन को नहीं छोड़ पाए.

कहां चूक गए
और उससे भी बढ़कर वह दत्त संप्रदाय जिसके वे अनुयायी रहे उसके पवित्र ग्रंथ श्री गुरू चरित्र जिसमें आत्महत्या को महादोष बताया है उसे भी आत्मसात करने में चूक गए.

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