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BJP के नये फॉर्मूले से उम्रदराज नेताओं में मची खलबली! कांग्रेस ने ली चुटकी

Arun Kumar Trivedi | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 23, 2019, 6:18 PM IST
BJP के नये फॉर्मूले से उम्रदराज नेताओं में मची खलबली! कांग्रेस ने ली चुटकी
भाजपा ने जिला अध्‍यक्ष और मंडल अध्‍यक्ष के लिए तय की उम्र.

भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) में जिला अध्यक्ष (District President) और मंडल अध्यक्षों के लिए भी अब उम्र का बंधन लागू होगा. अब 50 साल से ज्यादा की उम्र वालों को जिला और नगर अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा. जबकि 35 साल से ज्यादा उम्र वालों को मंडल अध्यक्ष (Mandal President) पद से दूर रखा जाएगा.

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इंदौर. भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने 75 पार के नेताओं को टिकट न देने के फॉर्मूले के बाद पार्टी ने एक और नया नियम बना दिया है जिसके तहत जिला अध्यक्ष (District President) और मंडल अध्यक्षों के लिए भी अब उम्र का बंधन लागू होगा. पार्टी ने तय किया है कि 50 साल से ज्यादा की उम्र वालों को जिला और नगर अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा. जबकि 35 साल से ज्यादा उम्र वालों को मंडल अध्यक्ष (Mandal President) पद नहीं दिया जाएगा. इस फैसले से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के 20 से ज्यादा नेताओं के सपने चूर-चूर हो गए हैं, जो दो दशक से सपने देख रहे थे. वहीं कुछ खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं. आखिर 15 साल की सत्ता में उन्हें सरकारी पद भी नहीं मिला और पार्टी के पद से महरूम कर दिया.

ये है उम्र का फॉर्मूला
मध्य प्रदेश में संगठन की कमान युवाओं के हाथों में देने के लिए प्रदेश बीजेपी ने उम्र का बंधन लगा दिया है. 35 साल से कम उम्र के कार्यकर्ता को मंडल अध्यक्ष बनाया जाएगा. जबकि विशेष परिस्थिति होने पर ही इसे 40 साल किया जा सकता है. इसके अलावा जिला अध्यक्ष के लिए 50 साल की उम्र तय कर दी है. इससे ज्यादा वाले सभी नेता दौड़ से बाहर हो गए हैं. सबसे बड़ा असर इंदौर में ग्रामीण बीजेपी को पड़ा, क्योंकि काफी संख्‍या में खाटी के नेता जो वर्षों से मेहनत कर रहे थे उनका दो दशक से सपना था कि वे जिला अध्यक्ष बनें. वे सभी रातोंरात दौड़ से बाहर हो गए. उनका सपना चूर-चूर हो गया.

मौजूदा जिला अध्यक्ष को लगा झटका

इस दौड़ में सबसे ज्यादा झटका, मौजूदा जिला अध्यक्ष अशोक सोमानी को लगा. अब तक जिले का रिकॉर्ड रहा है कि जो भी अध्यक्ष रहा उसने दो टर्म पूरे किए हैं ऐसे में सोमानी अपवाद हो जाएंगे. उनका ये पहला टर्म था. हालांकि उनके परफॉर्मेंस से संगठन खुश नहीं हैं, लेकिन उन्हें अपने आकांओं पर पूरा भरोसा था. जबकि बाहर होने वालों की सूची में देवराज सिंह परिहार, प्रेमनारायण पटेल, कंचन सिंह चौहान, प्रेम सिंह ढाबली, गुमान सिंह पंवार और राजाराम गोयल के नाम प्रमुख हैं.

सशक्त दावेदार बाहर
शहरी क्षेत्र के नेताओं में गोपीकृष्ण नेमा, उमेश शर्मा,कमल बाघेला, मुकेश राजावत, नानूराम कुमावत जैसे सशक्त दावेदार बाहर हो गए हैं. इंदौर जिला अध्यक्ष पद के लिए जिला बीजेपी में नाम का टोटा नजर आ रहा है. इसलिए नामों पर मंथन करने के लिए प्रदेश संगठन मंत्री सुहास भगत खुद गुरुवार को इंदौर पहुंच रहे हैं.
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ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र से तीन-चार नाम सामने आए हैं. जिसमें सबसे मजबूत नाम चिंटू वर्मा का है. उनके अलावा मौजूदा युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष श्रवण चावड़ा और घनश्याम पाटीदार का नाम भी है. पाटीदार पूर्व जिला अध्यक्ष कैलाश पाटीदार के बेटे हैं तो चावड़ा की मदद पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार चौहान और संगठन मंत्री जयपाल सिंह चावड़ा कर सकते हैं. शहरी क्षेत्र से नगर अध्यक्ष के लिए उमेश शर्मा, जीतू जिराती और गौरव रणदिवे के नाम सामने आ रहे हैं.

BJP, INDORE, MADHYA PRADESH
20 साल से इंतजार कर रहे बीजेपी के सीनियर नेताओं के सपने चकनाचूर हुए.


रमेश मेंदोला ने कही ये बात
इंदौर की विधानसभा सीट दो से लगातार तीन बार से बीजेपी विधायक रमेश मेंदोला, नेताओं की उम्र तय करने के फॉर्मूले से इत्तेफाक नहीं रखते. उनका कहना है कि नेताओं को जनता रिटायर करती है. यानी जनता जिसे नकार देती है वही रिटायर हो जाता है. ऐसे में उम्र का फार्मूला तय करना ठीक नहीं है. प्रधानमंत्री जैसे बड़े बड़े पदों पर रहने वाले नेता भी जनता के फैसले के सामने बौने लगने लगते हैं. जनता फैसला करती है किसको कितने दिन पद पर रखना है.

कांग्रेस ने बीजेपी को बताया लिमिटेड कंपनी
बीजेपी के इस फैसले पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला का कहना है कि बीजेपी अब पार्टी नहीं एक कंपनी बन गई है, जिसमें बुजुर्ग नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है. अभी विधानसभा और लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इन्हीं नेताओं के अनुभवों का लाभ लिया, लेकिन अब कोई चुनाव हैं नहीं इसलिए इन्हें अलग किया जा रहा है. हैरानी इस बात की है कि जिस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष 55 साल से ऊपर का हो उसी पार्टी में में 40 साल का जिलाध्यक्ष मान्य नहीं हैं. बीजेपी के इस फैसले से पार्टी के दिग्गज नेताओं में मायूसी तो है ही कांग्रेस भी इसे अलोकतांत्रिक फैसला बताकर बीजेपी के बुजुर्ग नेताओं का भड़काने का काम कर रही है.

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First published: October 23, 2019, 3:39 PM IST
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