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Corona ने बनाया मानसिक रोगी, इंदौर में बढ़ गए 40 फ़ीसदी दिमागी बीमारियों के मरीज
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Arun Kumar Trivedi | News18 Madhya Pradesh
Updated: May 21, 2020, 1:52 PM IST
Corona ने बनाया मानसिक रोगी, इंदौर में बढ़ गए 40 फ़ीसदी दिमागी बीमारियों के मरीज
लॉकडाउन में लोग दिमागी बीमारी के शिकार हो रहे हैं. सांकेतिक फोटो.

कोरोना वायरस (Corona Virus) ने लोगों की लाइफस्टाइल (Lifestyle) को बदल कर रख दिया, उनके जीने का नजरिया बदल गया है.

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इंदौर. कोरोना वायरस (Corona Virus) ने लोगों की लाइफस्टाइल (Lifestyle) को बदल कर रख दिया, उनके जीने का नजरिया बदल गया है. लोगों को उम्मीद थी 17 मई के बाद हालात सामान्य हो जाएंगे और लॉकडाउन खुल जाएगा, लेकिन लॉक डाउन 4.0 ने आम लोगों की बेचैनी बढ़ा दी है. वे परेशान हैं, उनके अंदर अजीब तरह की घबराहट है. जिसकी वजह से लोगों में दिमागी बीमारियां बढ़ रही हैं. कोरोना महामारी की वजह से लोग घरों में कैद है और वे दिन रात कोराना की खबरें और वीडियो देखकर उसी के बारे में सोचते रहते हैं कि आगे क्या होगा.

जानकारों के मुताबिक यही कारण है कि उनमें दिमागी बीमारियां घर करतीं जा रही है और ऐसे लोगों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिन्हें ज्यादा गुस्सा आना, नींद ना आना, बैचेनी, घबराहट और चिड़चिड़ापन है, वे डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं. मध्य प्रदेश के इंदौर के मानसिक रोग अस्पताल के अधीक्षक डॉ. रामगुलाम राजदान का कहना है कि सरकार को इस समस्या पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. नहीं तो लोगों में ये डर आने वाले समय में आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण बनेगा.

मानसिक रोगियों में सबसे ज्यादा युवा
लॉक डाउन के चलते पिछले 2 महीने से घर में कैद सबसे ज्यादा परेशान युवा है जिनमें अंजाना सा डर बना हुआ है कि आगे क्या होगा. आर्थिक मंदी के दौर में नौकरियां रहेंगी या खत्म हो जाएंगी,उनकी जॉब सुरक्षित रहेगी या नहीं. ऐसे में बिना काम के कब तक बैठे रहेंगे. काम काज कब शुरू हो पाएगा. ये सब सोच सोच कर युवा दिमागी बीमारियों की गिरफ्त में आते जा रहे हैं. इसके अलावा छात्रों को अपने भविष्य की चिंता सता रही है तो वहीं रोज कमा कर खाने वाले लोग खासे परेशान हैं यही कारण है कि इंदौर में मेंटल डिसऑर्डर के करीब 40 फ़ीसदी मरीज बढ़ गए है यहीं नहीं,डिप्रेशन के पुराने मरीजों का मर्ज भी लगातार बढ़ता जा रहा है.



अलग से शुरू करनी पड़ी ओपीडी


हर वक्त कोरोना वायरस से अनहोनी की आशंका के चलते बड़ी संख्या में लोग मनोचिकित्सकों से संपर्क कर रहे हैं. क्योंकि घरों में अधिकांश समय कोरोना वायरस से जुड़ी बातें हो रही हैं. सोशल मीडिया भी कोरोना वायरस से भरा पड़ा है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की वजह से लोगों में डिप्रेशन और चिंता बढ़ रही है. मनोचिकित्सक फोन पर लोगों की काउसिंलिंग नहीं कर पा रहे हैं. यही कारण है कि इन दिनों इंदौर के मानसिक चिकित्सालय को अलग से ओपीडी शुरू करनी पड़ी है, जिसमे डॉक्टर लोगो को कोरोना के बारे सोचना छोड़ने, घर पर रहकर अपनी पसंद की किताब पढ़ने, घरवालों के नजदीक रहने, पूजा पाठ और प्रार्थना करने के साथ ही अपने दोस्तों रिश्तेदारों से फोन पर बातचीत करने की सलाह दे रहे हैं.

कोरोना को सोचना छोड़ें
मानसिक चिकित्सालय के अधीक्षक का कहना है कि इस समय जब कोरोना के इलाज की कोई दवा नहीं है. ऐसे में लोगों से कोरोना के बारे में सोचना छोड़ने की बात कही जा रही है साथ ही उन्हें सोशल मीडिया से दूर रहने, किताबें पढ़ने, योग और मेडिटेशन, प्राणायाम करने के साथ ही संगीत सुनने की सलाह दी जा रही है. क्योंकि कोरोना के समय पॉजिटिव रहना बहुत जरूरी है यदि मन में नेगेटिविटी रहेगी तो शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाएगा और यदि इम्यूनिटी कम हुई तो बीमारियों से लड़ना मुश्किल हो जाएगा. कोरोना के बारे में लोगों को जितना जानना था. वे सब जान चुके हैं. इसलिए अब सकरात्मक सोच ही लोगों को आगे ले जाएगी और उनके जीवन को सुगम बनाएगी.

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First published: May 21, 2020, 1:52 PM IST
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