राहत इंदौरी साहब की कभी ना भुलाई जा सकने वाली लाजवाब गजलें और शेर
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राहत इंदौरी साहब की कभी ना भुलाई जा सकने वाली लाजवाब गजलें और शेर
इंदौर में मशहूर शायर राहत इंदौरी का निधन.

Rahat Indori Death: राहत इंदौरी की कविताएं और शेर ऐसे थे कि वे युवाओं में भी जान भर दिया करते थे. हर किसी की जुबान पर उनकी लिखी गजलें और शेराे शायरी होना एक आम बात थी.

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  • Last Updated: August 11, 2020, 9:01 PM IST
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इंदौर. अपने शेरों और गजलों से देश-दुनिया में मशहूर शायर राहत इंदौरी (Rahat Indori) का आज मध्य प्रदेश के इंदौर में निधन हो गया. उनकी कोरोना वायरस जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. राहत इंदौरी को पहले से ही दिल की बीमारी और डायबिटीज की शिकायत थी, लेकिन देश-दुनिया में होने वाले मुशायरों या कार्यक्रमों में उनकी बुलंद आवाज से श्रोताओं या उनके चाहने वालों को इसका रत्ती भर पता नहीं चल पाता था.

पिछले कुछ वर्षों के सियासी हालात को लेकर बेबाकी से शेर पढ़ने वाले राहत इंदौरी की कविताओं की लाइनें इतनी मशहूर हैं कि ये युवाओं की जुबान पर रहती हैं. आज उनके निधन के बाद आइए राहत इंदौरी के कुछ चुनिंदा शेर पर एक नजर डालते हैं.

अगर खिलाफ हैं तो होने जान थोड़ी है
ये सब धुआं है कोई आसमान थोड़ी हैलगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में
यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है



मैं जानता हूं कि दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरह हथेली पर जान थोड़ी है

जो आज साहिब-ए-मसनद हैं कल नहीं होंगे
किरायेदार हैं जाती मकान थोड़ी है

हमारे मुंह से जो निकले वही सदाकत है
हमारे मुंह में तुम्हारी जबान थोड़ी है

सभी का खून शामिल है यहां की मिट्टी में
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है.
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रोज तारों को नुमाइश में खलल पड़ता है
चांद पागल है अंधेरे में निकल पड़ता है

एक दीवाना मुसाफिर है मेरी आंखों में
वक्त-बे-वक्त ठहर जाता है, चल पड़ता है

अपनी ताबीर के चक्कर में मेरा जागता ख्वाब
रोज सूरज की तरह घर से निकल पड़ता है

रोज पत्थर की हिमायत में गजल कहते हैं
रोज शीशों से कोई काम निकल पड़ता है

उसकी याद आई है, सांसों जरा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में खलल पड़ता है.
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किसने दस्तक दी ये दिल पर कौन है
आप तो अंदर हैं, बाहर कौन है

रोशनी ही रोशनी है हर तरफ
मेरी आंखों में मुनव्वर कौन है

आसमां झुक-झुक के करता है सवाल
आप के कद के बराबर कौन है

हम रखेंगे अपने अश्कों का हिसाब
पूछने वाला समुंदर कौन है

सारी दुनिया हैरती है किस लिये
दूर तक मंजर ब मंजर कौन है

मुझसे मिलने ही नहीं देता मुझे
क्या पता ये मेरे अंदर कौन है

साभार- राहत इंदौर की 'दो कदम और सही' से.
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