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पुलिस ने निर्दोष को जेल भेज दिया, हाईकोर्ट ने सरकार को दिया मुआवज़ा देने का आदेश
Indore News in Hindi

Arun Kumar Trivedi | News18 Madhya Pradesh
Updated: February 12, 2020, 12:47 PM IST
पुलिस ने निर्दोष को जेल भेज दिया, हाईकोर्ट ने सरकार को दिया मुआवज़ा देने का आदेश
पुलिस ने निर्दोष वृद्ध को जेल पहुंचाया.

हाईकोर्ट (high court) ने सरकार को सख्त आदेश दिया कि अब हर केस में पुलिस पहले पूरी तस्दीक करे और भविष्य में किसी की भी गिरफ्तारी के पहले उसकी पहचान के लिए बायोमेट्रिक दस्तावेजों का पूर्ण परीक्षण करे जिससे कि भविष्य में किसी निर्दोष को इस तरह फिर से जेल न जाना पड़े.

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हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने धार पुलिस की घोर लापरवाही पर मध्यप्रदेश सरकार को 5 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है.इस मामले में धार पुलिस ने एक निर्दोष वृद्ध को हत्या (hatya) के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और चार महिने तक उसे जेल में बंद रखा. हाई कोर्ट (high court) ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए निर्दोष को तत्काल जेल से रिहा करने का आदेश दिया. साथ ही  मध्यप्रदेश सरकार (mp government) से कहा कि वो तीस दिन में 5 लाख मुआवजा दे. साथ ही संबंधित एसडीओपी मनोहर सिंह बारिया सहित दूसरे पुलिसकर्मियों पर अवमानना का केस दर्ज करने के आदेश भी दिए हैं.

इंदौर हाईकोर्ट के जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस शैलेन्द्र शुक्ला की डिवीजन बैंच ने पीड़ित के बेटे कमलेश की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के बाद ये आदेश दिया. दरअसल हत्या के मामले में हुस्ना नाम के व्यक्ति को सजा हुई थी. वो पैरोल पर छूटा था. पैरोल पर रिहा होने के दौरान ही 10 सितंबर 2016 को हुस्ना की मौत हो गई. लेकिन परिवार ने जेल और पुलिस विभाग को इसकी खबर नहीं दी. इस बीच हुस्ना के वापस जेल ना पहुंचने पर उसका वारंट निकल गया. धार जिले की बाग पुलिस तीन साल बाद 18 अक्टूबर 2019 को हुस्ना के घर पहुंची और उसके बड़े भाई हुसान को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस का कारनामा
इसके बाद बेकसूर हुसान के बेटे कमलेश ने पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के सामने गुहार लगाई लेकिन कि उसका पिता निर्दोष हैं. उनका हत्या से कोई लेना देना नहीं है.लेकिन कहीं पर भी उसकी सुनवाई नहीं हुई. इसके बाद उसने हाईकोर्ट में याचिका लगाई. सरकार की ओर से पेश जवाब में एसडीओपी मनोहर सिंह बारिया ने भी कोर्ट में शपथ पत्र देकर जवाब पेश किया जिसमें आरोपी हुस्ना के होने की पुष्टि की.

कोर्ट का आदेश
उसके बाद कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह को निर्देश दिए कि वो इस मामले की पूरी जांच करें और बायोमेडिकल और डीएनए जांच के आधार पर रिपोर्ट पेश करें. प्रमुख सचिव की पेश की गई रिपोर्ट में ये स्पष्ट हो गया कि जेल में बंद शख्स हत्या का वो आरोपी हुस्ना नहीं है. हुस्ना की मौत हो चुकी है.

हाईकोर्ट ने सरकार को दिया ये आदेशइस मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने सरकार को सख्त आदेश दिया कि अब हर केस में पुलिस पहले पूरी तस्दीक करे और भविष्य में किसी की भी गिरफ्तारी के पहले उसकी पहचान के लिए बायोमेट्रिक दस्तावेजों का पूर्ण परीक्षण करे जिससे कि भविष्य में किसी निर्दोष को इस तरह फिर से जेल न जाना पड़े.

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First published: February 12, 2020, 12:46 PM IST
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