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ANALYSIS: डॉ. भागवत की मौजूदगी बता रही है 2019 के चुनाव में भाजपा को फ्री हैंड नहीं होगा

ANALYSIS: डॉ. भागवत की मौजूदगी बता रही है 2019 के चुनाव में भाजपा को फ्री हैंड नहीं होगा

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

2019 के चुनाव में संघ भाजपा को फ्री हैंड देने की स्थिति में नहीं है. अब चुनावी रणनीति से लेकर टिकटों के बंटवारे तक सूत्र संघ के हाथों में रहेंगे.

    राजनीतिक संकेत बता रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने लोकसभा चुनाव के लिए मैदान पूरी तरह पकड़ लिया है. तीन दिन तक इंदौर में संघ प्रमुख डा. मोहन भागवत का मैराथान बैठकें करना इस बात की तस्दीक कर रहा है कि अपने डेढ़ सौ से ज्यादा छोटे-बड़े सभी अनुशांगिक संगठनों के साथ संघ अपनी रणनीतिक जमावट की तैयारी में है. तीन हिंदी राज्यों की चुनावी हार के बाद संघ का इस तरह अपने सबसे निचले मैदानी स्वयंसेवकों तक पहुंचना बता रहा है कि  2019 के चुनाव में संघ भाजपा को फ्री हैंड देने की स्थिति में नहीं है. अब चुनावी रणनीति से लेकर टिकटों के बंटवारे तक सूत्र संघ के हाथों में रहेंगे. संभावना जताई जा रही है संघ इन तीनों राज्यों में संगठन महामंत्री के ऊपर भी एक और शक्ति केंद्र क्षेत्रीय संगठन महामंत्री के तौर पर पदस्थ कर सकता है.

    क्षेत्रीय संगठन महामंत्री हो सकते हैं पदस्थ

    संघ के वरिष्ठतम स्तर के प्रचारक जिनको भाजपा में पहले प्रतिनियुक्ति पर भेजा जा चुका हो उनकी पदस्थापना क्षेत्रीय संगठन महामंत्री के पद पर हो सकती है. मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान राज्यों की चुनावी हार के बाद हुई समीक्षा बैठकों में माना गया है कि तीनों ही राज्यों में संगठन महामंत्रियों का भाजपा के स्थानीय नेतृत्व के दबाव-प्रभाव में आना हार का बड़ा कारण है. चूंकि समय अब बहुत कम है इसलिए संघ अपने प्रचारकों में बदलाव करने की स्थिति में नहीं है. इसलिए  शीर्ष नेतृत्व को खड़ा करने की रणनीति पर काम हो रहा है. कुछ नए विस्तारकों को जोड़ा जा रहा है. संघ के अनुशांगिक संगठनों के प्रतिनिधियों की भी  जिम्मेदारी तय की जा रही है.

    राम मंदिर मुद्दा नए स्वरूप में होगा

    डा. मोहन भागवत की मौजूदगी में संघ के कई राष्ट्रीय पदाधिकारी, क्षेत्रीय पदाधिकारियों की बैठकें हो रही हैं. जिनका मकसद वर्तमान हालात की समीक्षा करना तथा आगे की रणनीति पर चर्चा करना है. राम मंदिर का मुद्दा संघ ने अपने एजेंडे से चुनाव तक स्थगित किया है. इसके कारण क्या है और 2019 के चुनाव में राम मंदिर के मुद्दे को अब किस स्वरूप में रखना है इसकी रणनीति इस बैठक में तय हो रही है.

    समन्वय की दिशा तय होगी

    दूसरा मामला संघ और भाजपा के बीच के समन्वय का है. जिसका अभाव विधानसभा चुनाव के दौरान देखा गया.  संघ तीनों ही राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन से लेकर उम्मीदवारों के बदलाव पर जोर दे रहा था लेकिन भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने  स्थानीय राज्यों की दबाव के चलते संघ के आंतरिक सर्वे को दरकिनार किया. ‌जिसका खामियाजा तीनों ही राज्यों में भाजपा को भुगतना पड़ा और संघ की बुनियाद को भी झटका लगा.

     मैदानी कार्यकर्ताओं से मिलेंगे

    डा. भागवत इंदौर की प्रतिनिधि सभा में  संघ की ढ़ाई हजार से ज्यादा शाखाओं के प्रमुख और गटप्रमुखों की बैठकें लेंगे.  विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, सेवा भारती, विद्या परिषद, गो सेवा रक्षक जैसे अनेक संगठनों के प्रतिनिधि इसमे शामिल होंगे. ये एक तरह से अपने नेटवर्क से फीडबैक लेने और उसकी मैदानी तैनाती की रूपरेखा तैयार करने  का मामला है. ये ऐसा पहला मौका है जब संघ प्रमुख नियमित शाखाओं के गटप्रमुख स्तर के स्वयंसेवकों से मिलेंगे. गटप्रमुख हर दस स्वयंसेवकों के उपर पदस्थ हैं. जिनपर संघ के किसी भी सामाजिक कार्य या आंदोलन को जनता तक ले जाने का जिम्मा है. वह एक तरह से संघ का मैदानी कार्यकर्ता है. संघ 2019 को लेकर कितना गंभीर है इसका नजारा विधानसभा चुनाव के दौरान ही स्पष्ट हो चुका है. करीब एक साल पहले ही संघ हर लोकसभा क्षेत्र में अपने प्रतिनिधियों की तैनाती कर चुका है.

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    Tags: BJP, Mohan bhagwat, RSS

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