लाइव टीवी

30 करोड़ के बैंक घोटाले पर बोलीं सुमित्रा महाजन-मुझे भरोसा है,मेरे बेटे पर नहीं आएगी आंच

Arun Kumar Trivedi | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 25, 2019, 2:07 PM IST
30 करोड़ के बैंक घोटाले पर बोलीं सुमित्रा महाजन-मुझे भरोसा है,मेरे बेटे पर नहीं आएगी आंच
30 करोड़ के बैंक घोटाले में सुमित्रा महाजन के बेटे मिलिंद का नाम आ रहा है(फाइल फोटो)

मिलिंद महाजन (milind mahajan) 1997 से 2004 तक डायरेक्टर (director) रहे. इस दौरान इन सात साल में संचालक मंडल (board of directors) की करीब 350 बैठकें हुईं. उनमें से करीब 290 में मिलिंद भी शामिल हुए.इन्हीं बैठकों में लोन (loan), खरीदी-बिक्री के फैसले हुए थे

  • Share this:
इंदौर. इंदौर (indore) के महाराष्ट्र ब्राह्मण सहकारी बैंक घोटाले (Maharashtra Brahmin Co-operative Bank Scam) पर अब पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन (ex-loksabha-speaker-sumitra-mahajan) ने अपनी चुप्पी तोड़ी. उन्होंने कहा-मेरा विश्वास है कि मेरे बेटे पर कोई आंच नहीं आएगी.सरकार को घोटाले (bank scam) की फाइलें खोलने दो.इस मामले की कई बार जांच हो चुकी है.

इंदौर के महाराष्ट्र ब्राह्मण सहकारी बैंक में 30 करोड़ का घोटाला हुआ था. कमलनाथ सरकार अब इसकी फाइल खोल रही है. घोटाले में बीजेपी नेता और पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के बेटे मिलिंद महाजन का नाम आ रहा है. ताई सुमित्रा महाजन ने अब इस पर अपनी चुप्पी तोड़ी. उन्होंने कहा एक बार फिर जांच हो जाने दो,मुझे भरोसा है कि मेरे बेटे पर आंच नहीं आएगी.उन्होंने कहा- हितग्राहियों को सबसे पहले हमने ही 1 -1 लाख रुपए दिलवाए थे.
ये है मामला
इंदौर की महाराष्ट्र ब्राह्मण सहकारी बैंक में 1997 से 2004 के बीच करीब 30 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ था. उसके बाद 2005 में ये बैंक डूब गई थी जिसमें हजारों लोगों की जीवनभर की कमाई चली गई थी. उस समय बैंक के डायरेक्टर सुमित्रा महाजन के बड़े बेटे मिलिंद महाजन थे. आरोप लगा कि उसी दौरान स्टाफ ने व्यक्तिगत और सामूहिक रुप से भ्रष्ट्राचार किया. अपात्र लोगों को लोन बांट दिया गया जिससे बैंक को करीब 30 करोड़ रुपए की चपत लग गई. जब इस मामले की शिकायतें हुईं तो मिलिंद महाजन समेत 16 लोगों के खिलाफ 2005 में सेंट्रल कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज हुई. उस समय सुमित्रा महाजन केन्द्रीय मंत्री थी और राज्य में बीजेपी का सरकार थी. बाद में पुनर्विवेचना में मिलिंद महाजन का नाम हटा दिया गया. अब राज्य में कांग्रेस की सरकार है और  इस मामले की फाइलें फिर खोली जा रही हैं.

पहले नफ़ा फिर नुक़सान
महाराष्ट्र ब्राह्मण सहकारी बैंक 1927 से 1998 तक फायदे में रही. उसके बाद अचानक ये बैंक बीमार हुई.सहकारिता विभाग ने इसे डी क्लास की श्रेणी में रखा. उसके बाद रिजर्व बैंक और सहकारिता विभाग ने नोटिस और चेतावनी दी. कोई असर होता न देख 5 अक्टूबर 2004 को रिजर्व बैंक ने इस बैंक का लाइसेंस निरस्त कर दिया. उस समय बैंक की चार शाखाओं में 11 हजार 500 सौ डिपॉजिटर थे. इनके पूरे जीवन की कमाई चली गई, क्योंकि बैंक के घाटे में चले जाने के बावजूद करोड़ों रुपए के लोन बांट दिए गए.

भ्रष्टाचार की हद- बैंक में भ्रष्टाचार का ये आलम रहा कि लिफ्ट लगाने के नाम पर 25 लाख रुपए निकाल लिए गए लेकिन लिफ्ट लगायी नहीं गयी. रिकॉर्ड के मुताबिक सुमित्रा महाजन की निज सचिव वंदना महस्कर के पति बसंत महस्कर ने 35 लाख,विकास पुंडलिक ने 50 लाख रुपए बतौर लोन लिया.जमाकर्ताओं की शिकायत पर सेंट्रल कोतवाली में मिलिंद महाजन सहित 16 लोगों के खिलाफ सेन्ट्रल कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई लेकिन बाद में मिलिंद महाजन और उनके करीबियों के नाम एफआईआर से हटा दिए गए.
Loading...

मिलिंद महाजन रहे डायरेक्टर- मिलिंद महाजन 1997 से 2004 तक डायरेक्टर रहे. इस दौरान इन सात साल में संचालक मंडल की करीब 350 बैठकें हुईं. उनमें से करीब 290 में मिलिंद भी शामिल हुए.इन्हीं बैठकों में लोन, खरीदी-बिक्री के फैसले हुए थे. लेकिन मामले में तीन लोग बसंत महस्कर,यशवंत डबीर और विकास पुंडलिक को मनमर्जी से लोन बांटने में दोषी साबित हुए. उन्हें 5-5 साल की सज़ा हुई. बाद में उन्हें हाईकोर्ट से ज़मानत मिल गयी.
1 करोड़ की पेनाल्टी
इस बीच सहकारिता विभाग ने मिलिंद महाजन सहित तत्कालीन संचालकों पर करीब 1 करोड़ रुपए की पेनल्टी लगाई जिसकी वसूली आज तक नहीं हो पाई.इस मामले में बैंक के पूर्व अध्यक्ष रहे अनिल कुमार धडवईवाले ने सीएम कमलनाथ को पूरे दस्तावेजों के साथ शिकायत की जिसके बाद अब ये मामला खुल रहा है.
मनमानी से डूबी बैंक
महाराष्ट्र ब्राह्मण सहकारी बैंक पर साल 1997 से 2002 तक मिलिंद महाजन के पैनल का कब्ज़ा रहा. उसके बाद 2002 में हुए चुनाव में फिर मिलिंद महाजन पैनल जीत गया. उस दौरान करोड़ों के घोटाले,गंभीर अनियमितताएं और जमकर भ्रष्टाचार के आरोप लगे. बैंक में अधिकतर रिटायर्ड लोगों का पैसा जमा था. उसमें से 6 सौ लोगों की पैसे की आस में मौत हो गई.कई लोग गंभीर बीमारियों का शिकार होकर इलाज के अभाव में काल के गाल में समा गए.बैंक के मैनेजर का कहना है कि अभी भी इक्कीस सौ खाते असुरक्षित श्रेणी में हैं. उनके 9 करोड़ रुपए भी डूबने के कगार पर हैं.
जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने ये कहा था
जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने कहा था कि अभी वृक्षारोपण में चार सौ करोड़ का घोटाला हुआ है उसकी भी जांच शुरू हो गई है.सिंहस्थ और व्यापम घोटाले की जांच चल रही है.इसी तरह महाराष्ट्र ब्राह्मण बैंक घोटाले की जांच होगी. कोई भी घोटाला आने वाले दिनों में बचेगा नहीं.इन घोटालों के दोषियों को जेल भेजा जाएगा चाहे वो कितना ही बड़ा रसूखदार हो साथ ही उनसे पैसे की वसूली भी की जाएगी.
सज्जन सिंह वर्मा ने कही थी जांच की बात
पहले पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने भी महाराष्ट्र ब्राह्मण बैंक घोटाले की फाइलें खोलने की बात कही थी. उन्होंने कहा था इस घोटाले के आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी. सरकार किसी को नहीं बख्शेगी नहीं.

ये-पूर्व सीएम स्व. श्यामाचरण शुक्ल के भाई की पुत्रवधु की सांप के काटने से मौत

Jhabua : किसान कर्ज़माफ़ी और विकास के पिटारे ने दिलायी कांतिलाल भूरिया को जीत

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए इंदौर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 25, 2019, 12:57 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...