MP गजब है: इंदौर की तनिष्का में असाधारण प्रतिभा, 13 साल में 12वीं पास करने वाली देश की पहली लड़की बनीं

इंदौर में भी है जिसने 11 साल की उम्र में 10वीं कक्षा पास कर ली और 12 साल की उम्र में 12वीं कक्षा. 13 साल की तनिष्का का एडमिशन अब यूनिवर्सिटी में हो चुका है.

इंदौर में भी है जिसने 11 साल की उम्र में 10वीं कक्षा पास कर ली और 12 साल की उम्र में 12वीं कक्षा. 13 साल की तनिष्का का एडमिशन अब यूनिवर्सिटी में हो चुका है.

तनिष्का कहती हैं कि मैं आंख पर पट्टी बांधकर लिख और पढ़ सकती हूं, यूरोप में कत्थक भी कर चुकी हूं, लेकिन मुझे पांचवीं से सीधे 10वीं कक्षा का एग्ज़ाम दिलवाने के लिए मेरी मम्मी भोपाल जाकर शासन से परमिशन के लिए चक्कर लगाती थीं और मैं यहां पढ़ाई करती थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 4, 2021, 5:24 PM IST
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इंदौर. देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, प्रतिभा के साथ हौंसला हो तो बड़ी से बड़ी मुश्किलें भी आसान हो जाती हैं. ऐसी ही एक नन्ही प्रतिभा इंदौर में भी है जिसने 11 साल की उम्र में 10वीं कक्षा पास कर ली और 12 साल की उम्र में 12वीं कक्षा. 13 साल की तनिष्का का एडमिशन अब यूनिवर्सिटी में हो चुका है और उसकी पढ़ाई फिलहाल ऑनलाइन जारी है. तनिष्का का नाम 10वीं करने के बाद इंडिया बुक ऑफ अवॉर्ड में और 12वीं पास करने के बाद एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज हो चुका है.

मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कारण 5वीं के बाद सीधे 10वीं कक्षा और इसके बाद बिना एक साल का अंतराल लिए 12वीं में प्रवेश का नियम नहीं है, जिसके लिए तनिष्का के माता पिता को काफी संघर्ष करना पड़ा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आख़िर शिक्षा विभाग ने इसके लिए उन्हें विशेष रूप से इसके लिए अनुमति दी.

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तनिष्का सुजीत ने न्यूज एजेंसी एनआई को बताया, "मैं अभी 13 साल की हूं, जब मैं पांचवी कक्षा में थी तब मेरे पेरेंट्स को लगा कि मुझमे कुछ क़ाबलियत है जिसके बाद उन्होंने 10वीं क्लास के सवाल देते हुए मेरे टेस्ट लिए जिसे मैंने पूरा किया. फिर 12 साल की उम्र में 12वीं की एग्जाम दिया था. अब मैं 13 साल की उम्र में कॉलेज की पढ़ाई कर रही हूं. मैं आँख पर पट्टी बांधकर लिख और पढ़ सकती हूं, यूरोप में कत्थक भी कर चुकी हूं. मुझे पांचवीं से सीधे दसवीं कक्षा का एग्ज़ाम दिलवाने के लिए मेरी मम्मी कई बार भोपाल जाकर शासन से परमिशन के लिए चक्कर लगाती थी और मैं यहां पढ़ाई करती थी."
तनिष्का आगे कहती हैं कि "छठवीं के बाद सीधे 10वीं की एग्जाम देने वाली मैं मध्यप्रदेश में पहली लड़की हूं. वहीं 10वीं के बाद बिना एक साल की गैप के सीधे 12वीं करने वाली मैं भारत की पहली लड़की हूं। मेरा एडमिशन देवी अहिल्या विश्विद्यालय में हुआ है जिसकी पढ़ाई शुरू हो चुकी है, मुझे बड़े होकर जस्टिस बनना है।"

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संघर्ष के बाद बेटी की प्रतिभा को मिली पहचान



तनिष्का के पिता सुजीत ने उनकी बेटी की ये प्रतिभा बहुत पहले पहचान ली थी, इसलिए वे उसे पांचवी के बाद सीधे दसवीं क्लास की परीक्षा देने के लिए प्रयास शुरू किए थे. इस काम में उन्हें उनकी पत्नी अनुभा ने काफी सपोर्ट किया. जब 2016-2017 में तनिष्का पांचवी कक्षा में अच्छा परिणाम लाई तो उन्होंने उसे 10वीं का एग्ज़ाम देने के लिए पत्नी अनुभा से बात की. अनुभा और सुजीत का अपना एक छोटा सा स्कूल है और वे जानते हैं कि मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग में ऐसा कोई नियम नहीं है कि पांचवी के बाद सीधे 10वीं की परीक्षा दी जा सके, हालांकि उन्होंने तनिष्का को अपने स्कूल में नहीं पढ़ाया ताकि कोई उसकी प्रतिभा पर सवाल ना खड़े कर पाए.

दौड़ने-भागने के बाद 10वीं की अनुमति शिक्षा विभाग ने दी तो उसके पहले शासकीय स्कूल में नौवीं क्लास का एग्जाम सिर्फ 20 दिन की मोहलत देते हुए लिया गया. इसके बाद सीधे 10वीं कक्षा की परीक्षा उसने पास की। अब तनिष्का के पिता को उसे बिना एक साल गंवाए या 11वीं की पढ़ाई के बजाए 12वीं की एग्ज़ाम दिलवाने की ठानी. ये भी आसान नहीं था क्योंकि ये भी राज्य शासन के नियम में नहीं था, इसके लिए भी तनिष्का की मां अनुभा ने भोपाल जाकर शिक्षा विभाग के कई चक्कर काटे और आखिर उन्हें इसके लिए विशेष अनुमति प्रदान कर दी गई.

कोरोना ने पिता को छीना फिर भी हौसला कम न हुआ

तनिष्का ने 12वीं कक्षा भी अच्छे नम्बरों से पास कर ली और अब बारी थी 13 साल की उम्र में उसके कॉलेज जाने की, लेकिन कोरोना ने उससे उसके पिता सुजीत को छीन लिया. इसके बाद भी तनिष्का की मां अनुभा हौसला नहीं हारीं. उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, "तनिष्का की काबिलियत नर्सरी से ही नजर आने लगी थी, उसकी सीखने की स्पीड काफी तेज थी. इसके लिए हमें भोपाल के कई चक्कर लगाने पड़े और अधिकारियों को समझाने के बाद 10वीं और फिर 12वीं की अनुमति मिल सकी."

तनिष्का की मां कहती हैं कि तनिष्का के लिए नियमों में बदलाव किए जाने से अन्य प्रतिभाशाली बच्चों को भी आगे बढ़ने में प्रोत्साहन मिलेगा। अब कॉलेज में बड़े छात्र छात्राओं के साथ 13 साल की बच्ची पढ़ाई करेगी. पहले मैं जनरेशन गैप की वजह से डर गई थी, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने मुझे भरोसा दिलाया और अब उनका काफी सपोर्ट मिल रहा है.

यूनिवर्सिटी का पहला मामला

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार अनिल शर्मा ने बताया, तनिष्का ने कम उम्र में उसने 12वीं की परीक्षा पास की जिसके लिए शासन ने स्कूल शिक्षा विभाग ने नियम शिथिल करते हुए अनुमति दी थी. हमने उन्हें बीए में उसे एडमिशन दिया और उसका परफॉर्मेंस भी कॉलेज में अच्छा है, ये पहला ही मामला है जिसमें देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने विशेष प्रावधान करते हुए एडमिशन दिया है.
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