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किसान दिवस : विदेशी आलू के आयात से मालवा के किसान संकट में, मंडियों में लुढ़क रहा है माल

मालवा में इस साल आलू की बंपर पैदावार हुई है.
मालवा में इस साल आलू की बंपर पैदावार हुई है.

इंदौर (indore) मंडी में ही हर दिन करीब 20 हजार बोरे नया आलू (potatoes) आ रहा है. लेकिन सरकार के आलू आयात के फैसले ने किसानों की कमर तोड़ दी है. किसानों ने 40 रुपए किलो बीज खरीदा था,लेकिन चिप्स का आलू 10 रुपए किलो में भी नहीं बिक रहा है

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इंदौर.केंद्र सरकार के विदेश से आलू का आयात करने से भारतीय आलू उत्पादक किसानों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं.मध्यप्रदेश के मालवा (Malwa) में नए आलू की उपज बाजार में आना शुरू हो चुकी हैं,लेकिन कारोबारी इसे आधे दाम पर ही खरीद रहे हैं. दूसरी तरफ चिप्स कंपनियां भी आलू नहीं खरीद रही हैं. विदेशी आलू आने से देशी आलू का बाजार लगातार गिर रहा है जिससे किसान के लिए दोहरी मुसीबत हो गई है. वे इस बार महंगा बीज बोकर फंस गए हैं.अब वे सरकार के आयात बंद करने और आलू-प्याज,सब्जियों पर एमएसपी लागू करने की मांग कर रहे हैं.

एक तरफ किसान आलू की खेती कर अपनी आय बढ़ाने का जतन कर रहे हैं तो दूसरी तरफ बाजार की ताकतें उनकी उम्मीद पर पानी फेर रही हैं. इस समय मालवा की मंडियों और बाजार में नया आलू तो आ चुका है लेकिन ये बहुत सस्ता बिक रहा है. क्योंकि भूटान से करीब 30 हजार टन आलू भारत आ चुका है. यही वजह है कि एक पखवाड़े पहले जिस आलू के दाम 40 रुपये किलो थे,वे अब 8 से 10 रुपये किलो तक आ गए हैं. हालात के मारे किसान सरकार तक अपनी बात पहुंचाने जा रहे हैं.वो आयात पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं.

देसी आलू लुढ़का
इंदौर जिले के किसानों कहना है उन्होंने 40 रुपए किलो बीज खरीदा था,लेकिन चिप्स का आलू 10 रुपए किलो में भी नहीं बिक रहा है. खुले बाजार में आलू की कीमत 7 से 8 रुपए किलो तक पहुंच गई है. इंदौर के लसुड़िया मोरी गांव के किसान दिलीप सिंह पवार का कहना है किसानों को एक बीघा आलू की खेती पर करीब 40 हजार रुपये की लागत आई है. लेकिन अब लागत ही नहीं निकल रही है. दिसंबर में क्रिसमस पर चिप्स की डिमांड काफी रहती है,लेकिन बड़ी चिप्स कंपनियां किसानों का माल खरीद ही नहीं रही हैं. इसलिए आलू के आयात पर तत्काल रोक लगाने की मांग सांसद शंकर लालवानी से मिलकर किसानों ने की है. साथ ही अनाज-दलहन-तिलहन के अलावा आलू-प्याज और सब्जियों पर भी एमएसपी लागू करने की मांग किसान कर रहे हैं.
मालवा का बेहतरीन आलू


मालवा इलाके में सबसे ज्यादा और अच्छी क्वालिटी के आलू का उत्पादन होता है.इंदौर मंडी में ही हर दिन करीब 20 हजार बोरे नया आलू आ रहा है. लेकिन सरकार के आलू आयात के फैसले ने किसानों की कमर तोड़ दी है.  किसानों का कहना है एक तरफ सरकार की किसानों को सस्ता बीज उपलब्ध कराने की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है. दूसरी ओर विदेशों से आयात ने किसानों की मुश्किल बढ़ा दी है.

सरकार की सफाई
अब सरकार सफाई दे रही है. बीजेपी सांसद शंकर लालवानी का कहना है पहले आलू के दाम बहुत ज्यादा थे और उपलब्धता बहुत कम थी. जनता की मांग को देखते हुए आयात का फैसला लिया गया था,सरकार के सामने एक तरफ किसान हैं तो दूसरी तरफ आम जनता है. जब जनता को आलू प्याज महंगा मिलता है तो जनता सस्ते की डिमांड करती है. उसी आधार पर सरकार को आयात का फैसला करना पड़ता है. लेकिन केन्द्र सरकार के सामने किसानों की समस्या रख दी गई है जल्द ही किसानों के हित में फैसला लिया जाएगा.

कांग्रेस किसानों के समर्थन में
उधर किसान आंदोलन के बीच कांग्रेस को एक और मुद्दा मिल गया है. कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अनुरोध ललित जैन का कहना है केन्द्र सरकार वन नेशन वन मार्केट की बात करती है. लेकिन जब किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिलने की बात आती है तो विदेशों से आयात कर उनको नुकसान पहुंचाया जा रहा है. ये केन्द्र सरकार का दोहरा चरित्र बताता है. मालवा में इस साल आलू की बंपर पैदावार हुई है. कांग्रेस की स्पष्ट मांग है कि किसानों के हित में फल सब्जियों पर भी एमएसपी लागू होनी चाहिए. जिससे किसानों का नुकसान न हो.

मालवा में 10 लाख किसान
मालवा निमाड़ के आलू उत्पादक करीब दस लाख किसानों को सरकार के फैसले का इंतजार है. हालांकि सरकार की ओर से भी किसानों को थोड़ा धीरज रखने की बात कही जा रही है. लेकिन दिल्ली में हो रहे किसान आंदोलन से उनका धैर्य टूटता जा रहा है. क्योंकि छोटे किसानों के सामने तो भंडारण की भी समस्या है. इसलिए वो जल्द फैसला चाहते हैं.
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