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Kishore Kumar Birthday: इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ने के दौरान पड़ी थी महानायक बनने की नींव, जानें खास बातें

किशोर कुमार का जन्‍म मध्‍य प्रदेश के खंडवा में 4 अगस्त 1929 को हुआ.

किशोर कुमार का जन्‍म मध्‍य प्रदेश के खंडवा में 4 अगस्त 1929 को हुआ.

सदी के महान गायक किशोर कुमार (Kishore Kumar Birthday) को आज यानी 4 अगस्त को बर्थ डे है. जबकि मध्य प्रदेश के खंडवा में 4 अगस्त 1929 को जन्मे कुमार की इंदौर (Indore) से तमाम यादें जुड़ी हुई हैं. यही नहीं, किशोर दा के फैंस अब उनका एक भव्य मंदिर भी बनवाना रहे हैं, ताकि वह हमेशा लोगों के जेहन में रहें.

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इंदौर. अलहदा, मस्तमौला और दूसरों से बेहद अलग भारतीय संगीत इतिहास के अमर गायक, अभिनेता,निर्माता और गीतकार रहे किशोर कुमार (Kishore Kumar Birthday) का आज यानी 4 अगस्त को जन्मदिन है. उनका असली नाम आभास कुमार गांगुली (Abhas Kumar Ganguly) था. हालांकि वे अपना परिचय रशोकि रमाकु नाम से देते थे. जिंदगी को अलमस्त तरीके से जीने वाला ये फनकार ताउम्र अपने नाम के उलटे उच्चारण की तरह उल्टा ही रहा. समझ के हर दायरे से बाहर बिलकुल निराला. जबकि 1946 में इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ने के दौरान उन्‍होंने अपने मस्तमौला से हर किसी का दिल जीत लिया था.

बहरहाल, मध्य प्रदेश के खंडवा में 4 अगस्त 1929 को जन्मे किशोर कुमार इंदौर आए तो थे पढ़ाई करने, लेकिन उनके दिल में कुछ और ही जज्बा था. वे क्रिश्चियन कॉलेज में हॉस्टल में रहते थे, लेकिन कॉलेज परिसर में लगे इमली के पेड़ के नीचे बैठकर वो घंटों रियाज करते थे,जब रियाज से उठते थे तो उनके आस-पास दोस्तों का जमघट लग जाता था .उनके साथी बताते हैं कि इसी इमली के पेड़ के नीचे उनके अंदर के गीतकार ने मुकम्मल रूप लिया था, इसीलिए अब वे इसी जगह किशोर दा का एक भव्य मंदिर बनवाना चाहते हैं, जिसमें भगवान के रूप में सदी के महान गायक किशोर कुमार होंगे. इसमें भजनों की जगह किशोर दा के अमर गीत बजेंगे. जबकि ये स्मारक दुनियाभर के संगीतकारों और गायकों के लिए आस्था का केन्द्र होगा. यही नहीं, यहां संगीत की महफिलें सजेंगी और किशोर दा के गीत गाकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जाएगी. इंदौर में उनके फैन श्रीचंद सचदेव ने तो किशोर दा की भव्य मूर्ति तक बनवा ली है,वे अब मंदिर बनाने के प्रयास में लगे हुए हैं. उनका कहना है कि वे अंतिम सांस तक किशोर दा के गाने गाकर उन्हें लोगों के जेहन में हमेशा जिंदा रखने का काम करेंगे.

अपने भाई के साथ इंदौर आए थे किशोर कुमार
खंडवा में स्कूली पढ़ाई के बाद किशोर कुमार और उनके छोटे भाई अनूप कुमार दोनों ही 1946 में इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ने आ गए थे, लेकिन उन्होंने कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही तय कर लिया था कि उन्हें जीवन में क्या करना है. क्रिश्चियन कॉलेज की दरों-दीवार में उनके चुलबुलेपन की यादें आज भी ताजा हैं. किशोर दा के जानने वाले इसी कॉलेज के छात्र लक्ष्मीकांत पंडित बताते हैं कि मुफलसी के दौर में किशोर कॉलेज की कैंटीन में उधार की चाय पिया करते थे. ये उधार उस जमाने में 5 रुपये बारह आने हो गया. कैंटीन वाला जब भी उधार मांगता किशोर मस्तमौला अंदाज में गाते…पांच रुपैया बारह आना, मारेगा भैया ना ना ना…बस ऐसे ही ये छेड़खानी कब गाना बन गई पता ही नहीं चला. वे बताते हैं अमीर गायक होने के बाद भी किशोर ने कभी उस कैंटीन वाले को पांच रुपये बारह आने नहीं चुकाए. इसी तरह हॉस्टल रहने के दौरान वे खिड़की से किसी लड़की को देखते थे. इसी दौरान उन्होंने ‘मेरी सामने वाली खिड़की में एक चांद सा मुखड़ा रहता है’ गाना गुनगुनाया जो बाद में पड़ोसन फिल्म का हिट सॉन्‍ग बना. ऐसे कई गाने थे जिनका ईजाद इस कॉलेज में हुआ..

प्रोफेसरों के बीच इस वजह से थे कुख्यात
फिल्म जगत के हरफनमौला कलाकार किशोर कुमार का मन लड़कपन से ही पढ़ाई-लिखाई से ज्यादा गीत-संगीत में रमता था. यही कारण था कि हॉस्टल के उनके कमरे में किताबें कम और तबला, हारमोनियम व ढोलक जैसे वाद्य यंत्र ज्यादा रहते थे. वे साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी महाविद्यालयीन संस्था बज्म-ए-अदब की कार्यकारिणी में भी शामिल थे. क्रिश्चियन कॉलेज परिसर के खेल के मैदान में आज भी मौजूद इमली का पेड़ नौजवान किशोर की अल्हड़ सुर लहरियों का गवाह है. यही नहीं, किशोर लैक्चर से भागकर इस पेड़ के नीचे यार-दोस्तों की मंडली जमाने के लिए प्रोफेसरों के बीच कुख्यात थे. क्रिश्चियन कॉलेज के शुरू हुआ उनका संगीत का ये सफर गायक, संगीतकार, अभिनेता, निर्माता, लेखक जैसे अलग-अलग बॉलीवुड किरदारों में ढलता गया जो आज उन्हें अमर कर गया.

बहरहाल किशोर दा हिंदी सिनेमा जगत की ऐसी हस्ती रहे हैं, जिनका हर कोई मुरीद रहा है. कोई उनकी गायकी का कायल है, तो कोई अदाकारी का. किशोर कुमार के बारे में ये बात जगजाहिर है कि उन्होंने संगीत की कभी विधिवत शिक्षा नहीं ली, लेकिन उनकी गायकी का लोहा देश विदेश के संगीतकार आज भी मानते हैं.

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