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कोरोना को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया कि स्वच्छता में नंबर वन इंदौर आज कोरोना संक्रमित और मृत्यु के मामले में देश के प्रथम पायदान पर खड़ा हो गया है. (फाइल फोटो)

याचिका (Petition) में कहा गया है कि कोरोना सहित शहर के बिगड़े हालातों पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है

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इंदौर. इंदौर में तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण (Corona Infection) के चलते शहर के बिगड़ते हालात को लेकर दायर याचिका को हाईकोर्ट (High Court) ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है. समाजसेवी किशोर कोडवानी (Kishore Kodwani) और दिनेश रावत ने ये याचिका दायर की है जिसमें प्रदेश के मुख्य सचिव, इंदौर के कलेक्टर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पार्टी बनाया गया है. याचिका में स्वास्थ्य सेवा, खाद्य सामग्री सप्लाई और स्कूल फीस जैसे विषय को उठाया गया है. अब लॉकडाउन खत्म होने के बाद ही इस याचिका पर सुनवाई होगी.


हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया कि स्वच्छता में नंबर वन इंदौर आज कोरोना संक्रमित और मृत्यु के मामले में देश के प्रथम पायदान पर खड़ा हो गया है.ये संख्या लगातार  बढ़ती जा रही है. लॉकडाउन और कर्फ्यू के दौरान इंदौर में निजी अस्पताल और डॉक्टरों ने अपनी सेवाएं बंद कर दी हैं. सब्जी-फल जैसी सेवाएं स्थानीय प्रशासन ने बंद कर रखी हैं. प्रशासन की किराना सप्लाई फेल हो गई है. क्षेत्रीय किराना दुकान पर स्टॉक समाप्त हो गया है. आम आदमी के पास नकद पैसा नहीं है. बैंकों से नकदी निकाले जाने वाले लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है. 38 प्रतिशत दिहाड़ी से आजीविका करने वालों की और बुरी हालत है.


21 सदस्यीय समिति के गठन की मांग
याचिका में कहा गया है कि कोरोना सहित शहर के बिगड़े हालातों पर जल्द काबू नहीं पाया गया तो अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. 3 हजार से अधिक डॉक्टर और 500 से ज्यादा अस्पताल होने बावजूद भी सेवा बंद है. 11 हजार निगमकर्मी, 3 हजार से अधिक चिकित्सक, 3 हजार बीएलओ और 4 हजार पुलिसकर्मियों द्वारा व्यवस्था संभालने के बावजूद शहर कोरोना के मामले में असफलता लिए हुए हैं. इसलिए लोगों की सुविधा के लिए 21 सदस्यीय समिति गठित कर सामूहिक बूथ लेवल व्यवस्था की जाए. जिससे लोगों के घरों तक आवश्यक सामग्री की सही से होम डिलिवरी की मॉनिटरिंग हो सके. हाईकोर्ट में 13 अप्रैल को याचिका लगाने वाले कोडवानी ने तत्काल सुनवाई का आवेदन किया था. इसको लेकर दोबारा 15 अप्रैल को मेंशन लगाया गया. हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई का आवेदन और मेंशन को खारिज कर दिया है. कोरोना को लेकर लगी मूल याचिका पर अब लॉकडाउन समाप्त होने के बाद सुनवाई होगी.


मेडिकल हब होने के बावजूद बिगड़े हालात 
तत्काल सुनवाई का आवेदन खारिज होने के बाद सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी ने कहा कि कोरोना संक्रमित संख्या और संक्रमित से मरने वालों के प्रतिशत मामले में इंदौर, दुनिया के औसत से दोगुना और दिल्ली से चार गुना प्रभावित पाया गया है. दुनिया का औसत 10 लाख जनसंख्या पर 307 संक्रमित हैं तो इंदौर में 581 है. ये संख्या दिल्ली में 149 है. उन्होंने कहा कि संक्रमितों में मरने वाले लोगों का आंकड़ा दुनिया में 6.71 प्रतिशत तो दिल्ली में 2.26 प्रतिशत और इंदौर में 4.12 प्रतिशत पार कर गया है. प्रदेश में यह आंकड़ा 5.42 प्रतिशत है जबकि देश का औसत 3.30 प्रतिशत है. चिकित्सा के मामले में इंदौर प्रदेश का मेडिकल हब होने के बावजूद यह हालत ठीक नहीं हैं.

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