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इंदौर में होली पर 294 साल पुरानी परंपरा के रंग, इंग्लैंड से आए होलकर राजवंश के युवराज

Holi of Holkar Dynasty : होलकर राजवंश के युवराज यशवंत राव होल्कर तृतीय और रिचर्ड होलकर शिवाजी 15 साल बाद होली पर इंदौर आए हैं.

Holi of Holkar Dynasty : होलकर राजवंश के युवराज यशवंत राव होल्कर तृतीय और रिचर्ड होलकर शिवाजी 15 साल बाद होली पर इंदौर आए हैं.

Holi Celebration. इंदौर के हृदय स्थल राजवाड़ा पर होलिका दहन की परंपरा 1728 में शुरू हुई थी. 294 वर्षों से चली आ रही है इस परंपरा के दौरान समय के साथ कुछ बदलाव हुए है लेकिन बाकी सब कुछ उसी तरह होता है जैसा तब राजपरिवार के सदस्य करते थे. होलकर राजवंश के युवराज यशवंत राव होल्कर तृतीय और रिचर्ड होलकर शिवाजी ने इस परंपरा का निर्वहन किया. वे भी 15 साल बाद इंदौर में होली दहन में पहुंचे थे. होलिका की साज-सज्जा राजवाड़ा पर शाम 5 बजे शुरू हो गई थी. दहन से पूर्व सरदार उदयसिंह होलकर ने आकर मल्हारी मार्तंड मंदिर में गादी और होलिका किया.

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इंदौर. इंदौर में इस बार होली पर 294 साल पुरानी परंपरा निभाई गयी. होलकर राजवंश के युवराज यशवंत राव होल्कर तृतीय और रिचर्ड होलकर शिवाजी होलिका दहन (Holika Dahan) के लिए इस बार यहां आए. 15 साल बाद होलकर राजवंश का कोई सदस्य होलिका दहन करने यहां आया. होलकर परिवार के वारिसों ने विधि विधान से पूजा करके होली जलाई.

इंदौर के हृदय स्थल राजवाड़ा पर होलिका दहन की परंपरा 1728 में शुरू हुई थी. 294 वर्षों से चली आ रही है इस परंपरा के दौरान समय के साथ कुछ बदलाव हुए हैं. लेकिन बाकी सब कुछ उसी तरह होता है जैसा तब राजपरिवार के सदस्य करते थे. होलकर राजवंश के युवराज यशवंत राव होल्कर तृतीय और रिचर्ड होलकर शिवाजी ने इस परंपरा का निर्वहन किया. वे भी 15 साल बाद इंदौर में होली दहन में पहुंचे थे. होलिका की साज-सज्जा राजवाड़ा पर शाम 5 बजे शुरू हो गई थी. दहन से पूर्व सरदार उदयसिंह होलकर ने आकर मल्हारी मार्तंड मंदिर में गादी और होलिका दहन किया.

2000 जगह होलिका दहन
राजवाड़ा पर होलकर राजवंश की तरफ से जो होली जलायी गयी वो इस साल 7 फीट ऊंची थी. होलिका को 1100 कंडों और घास की पिंडी से सजाया गया. मोर पंख, चवर, थाली और भगवान गणेश की प्रतिमा सहित चांदी के 10 बर्तन लाए गए और उनसे पंडित ने पूजन किया. ट्रस्ट के सदस्यों के बाद महिलाओं ने इसकी पूजा की और ठीक सात बजे होलिका दहन किया गया. मान्यता है कि इस होली में शामिल होने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस बार शहर में छोटी-बड़ी दो हजार होलिकाओं का दहन किया गया. इनमें पर्यावरण संरक्षण और गौ शालाओं को स्वावलंबी बनाने की भावना से गाय के गोबर से बने कंडों का उपयोग किया गया. सरकारी होली के बाद शुरू हुआ होलिका दहन का सिलसिला देर रात तक चलता रहा.

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झूम कर नाचे हुरियारे
होलिका दहन के बाद एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाने का सिलसिला तेज हो गया. आज धुलेंडी यानि रंग वाली होली खेली गयी. इस दौरान हर गली और चौराहे पर रंगों के त्योहार का उल्लास नजर आया. साथ ही जगह-जगह से रंग उड़ाती मतवालों की टोली निकलीं.

Tags: Holi celebration, Indore news. MP news

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