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करियर बनाने के बाद बच्चा चाहती हैं, तो करें ये उपाय

करियर बनाने के बाद बच्चा चाहती हैं, तो करें ये उपाय

धार जिले में एक प्रसूता की सड़क किनारे ही डिलिवरी करवानी पड़ी. मोहाली गांव निवासी राकेश की पत्नी रामकुंवर बाई को अचानक प्रसव पीड़ा 
हुई, जिस पर पति उसे बाइक पर पास के खंडलाई स्वास्थ्य केंद्र ले गया, लेकिन वहां उन्हें ताला लगा मिला. जिसके बाद दूसरे स्वास्थ्य केंद्र ले 
जाते हुए रामकुंवर बाई का दर्द बढ़ गया तो राकेश ने 108 एंबुलेंस को बुलाया. मौके पर पहुंचने पर महिला की हालत देख एंबुलेंस स्टाफ को 
सड़क किनारे ही महिला का प्रसव करवाना पड़ा. बाद में मां और बच्चे दोनों को मनवार स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. मां और बच्चा दोनों ही 
स्वस्थ बताए गए हैं.

धार जिले में एक प्रसूता की सड़क किनारे ही डिलिवरी करवानी पड़ी. मोहाली गांव निवासी राकेश की पत्नी रामकुंवर बाई को अचानक प्रसव पीड़ा हुई, जिस पर पति उसे बाइक पर पास के खंडलाई स्वास्थ्य केंद्र ले गया, लेकिन वहां उन्हें ताला लगा मिला. जिसके बाद दूसरे स्वास्थ्य केंद्र ले जाते हुए रामकुंवर बाई का दर्द बढ़ गया तो राकेश ने 108 एंबुलेंस को बुलाया. मौके पर पहुंचने पर महिला की हालत देख एंबुलेंस स्टाफ को सड़क किनारे ही महिला का प्रसव करवाना पड़ा. बाद में मां और बच्चे दोनों को मनवार स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. मां और बच्चा दोनों ही स्वस्थ बताए गए हैं.

नए दौर में पढ़ी-लिखी महिलाएं अगर कॅरियर के बाद बच्चा चाहती हैं, तो उनके लिए एग फ्रीजिंग (अंडाणु संरक्षण) सबसे बेहतर तरीका है.

  • Pradesh18
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    नए दौर में पढ़ी-लिखी महिलाएं अगर कॅरियर के बाद बच्चा चाहती हैं, तो उनके लिए एग फ्रीजिंग (अंडाणु संरक्षण) सबसे बेहतर तरीका है.

    इंदौर में इंडियन सोसायटी फॉर असिस्टेड रिप्रोडक्शन के तहत ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में आईवीएफ विशेषज्ञ डॉक्टर आशा बक्शी ने यह बातें बताईं.

    डॉ. बक्शी ने बताया कि, इस दौर की महिलाएं पहले अपना कॅरियर बनाने का सोचती हैं. उधर, 30 साल के बाद उनके अंडाणुओं की गुणवत्ता में खराबी आना शुरू हो जाती है.

    इसके चलते गर्भधारण करने में परेशानी आती है. इसके लिए सबसे अच्छा उपाय यह है कि युवा अवस्था मेडिकल प्रक्रिया के तहत अंडाणु निकालकर फ्रीज करवा दिए जाएं. बाद में उन्हीं अंडाणुओं के जरिए गर्भधारण किया जा सकता है.

    नि:संतानता के लिए 40 फीसदी पुरुष दोषी
    विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि शादी के तीन-चार बाद भी पत्नी को गर्भधारण नहीं होने पर पुरुष उसे दोष देना शुरू कर देते हैं. जबकि अधिकतर पत्नियां गर्भधारण करने के लिए फिट रहती हैं.

    उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि देश-विदेश में इंफर्टिलिटी (नि:संतानता) के लिए पुरुष भी जिम्मेदार रहते हैं. देश में जहां 40 फीसदी महिलाएं जिम्मेदार हैं, तो इतने ही पुरुष भी जिम्मेदार हैं और 10-10 फीसदी दंपति अनुवांशिक कारणों की वजह से जिम्मेदार होते हैं.

    इन वजहों से नि:संतानता

    तंबाकू और शराब का सेवन, अनियमित दिनचर्या, मोबाइल और कंप्यूटर, डायबटीज जैसे कई कारण पुरुष नि:संतानता के लिए इसलिए जिम्मेदार होते हैं. वहीं, महिलाएं जन्मजात यूट्स नहीं होने, बार-बार अबॉर्शन होना, गर्भशय में गठान और अधिक उम्र में शादी की वजह से इसके लिए जिम्मेदार होती हैं.

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