BJP ने डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिवस मनाया, कांग्रेस ने कहा-संदिग्ध हालात में हुई थी मौत

इंदौर में बीजेपी नेताओं ने डॉ मुखर्जी की प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी.

Indore-श्यामा प्रसाद मुखर्जी (Dr. Shyamaprasad Mukherjee) की मृत्यु जम्मू कश्मीर में रहस्यमय परिस्थितियों (death anniversary) में हुई थी. लेकिन देश की नई पीढ़ी को भ्रमित करने के मकसद से बीजेपी (BJP) ने पुण्यतिथि को कुछ सालों से बलिदान दिवस के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया है

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इंदौर. भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आज पुण्यतिथि है. बीजेपी (BJP) ने इसे बलिदान दिवस बताया तो कांग्रेस ने ऐतराज जता दिया. कांग्रेस (Congress) का कहना है श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मृत्यु रहस्यमय परिस्थिति में हुई थी, इसलिए उन्हें शहीद नहीं कहा जा सकता. बीजेपी इसे बलिदान दिवस बताकर राजनैतिक फायदा ले रही है.

बीजेपी आज जनसंघ के संस्थापक श्यामाप्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि को बलिदान दिवस के रूप में मना रही है. यही वजह कि कांग्रेस को इस पर आपत्ति है. कांग्रेस के प्रदेश सचिव राकेश सिंह यादव का कहना है श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मृत्यु जम्मू कश्मीर में रहस्यमय परिस्थितियों में हुई थी. लेकिन देश की नई पीढ़ी को भ्रमित करने के मकसद से बीजेपी ने पुण्यतिथि को कुछ सालों से बलिदान दिवस के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया है. जबकि मध्यप्रदेश सरकार के सोशल मीडिया साइट्स पर पुण्यतिथि ही लिखा गया है. पंडित जवाहर लाल नेहरू की अंतरिम सरकार में मंत्री रहे श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि को बलिदान दिवस बताकर वो उन्हें महात्मा गांधी के समतुल्य खड़ा करने की कोशिश कर रही है जो गलत है.

बीजेपी का तर्क
वहीं श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि को बलिदान दिवस बताने के पीछे बीजेपी के अपने तर्क दे रही है. बीजेपी के नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे का कहना है स्वतंत्र भारत में एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान के गलत फैसले के खिलाफ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने आवाज उठाई थी. इसके खिलाफ पहला बलिदान श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने दिया था. ऐसे राष्ट्र गौरव को हम सब भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता नमन करते हैं.

जेल में हुई थी मौत
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 23 जून 1953 को श्रीनगर की जेल में रहस्यमय हालात में मौत हो गई थी. वो जम्मू कश्मीर में लागू परमिट सिस्टम तोड़ने के लिए आंदोलन में शामिल होने जा रहे थे. लेकिन जम्मू कश्मीर पुलिस ने उन्हें लखनऊ में ही गिरफ्तार कर लिया था. उन्हें 44 दिन जेल में रखा गया और उसी दौरान 23 जून, 1953 को ड़ा मुखर्जी की मौत हो गई.

ये है इतिहास
महाराजा हरि सिंह के जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के बावजूद नेहरू और शेख अब्दुल्ला के समझौते के तहत, अनुच्छेद-370 पूर्ण विलय में बाधा बन गया था. राज्य में प्रवेश के लिए भी परमिट लेना आवश्यक था. प्रजा परिषद ने देश में जम्मू-कश्मीर के संपूर्ण विलय की मांग को लेकर पंडित प्रेमनाथ डोगरा के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में आंदोलन चलाया था. उसमें शामिल होने के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी वहां गए थे.

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