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इंदौर में बिहार से लाए 100 से ज्यादा बाल श्रमिक मुक्त, 20 से 25 रुपए मिलती थी मजदूरी

इंदौर में बिहार से लाए 100 से ज्यादा बाल श्रमिक मुक्त, 20 से 25 रुपए मिलती थी मजदूरी

एसडीएम शालिनी श्रीवास्तव के नेतृत्व में कार्रवाई

एसडीएम शालिनी श्रीवास्तव के नेतृत्व में कार्रवाई

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 100 से ज्यादा बाल श्रमिकों को मुक्त कराया हैं. सभी बच्चों को बिहार से इंदौर मजदूरी करने के लिए लाया गया था. बच्चों ने बताया कि उन्हें रोजाना 20 से 25 रुपए मजदूरी मिलती थी.

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  • Pradesh18
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    मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 100 से ज्यादा बाल श्रमिकों को मुक्त कराया हैं. सभी बच्चों को बिहार से इंदौर मजदूरी करने के लिए लाया गया था. बच्चों ने बताया कि उन्हें रोजाना 20 से 25 रुपए मजदूरी मिलती थी.

    प्रशासन की इस कार्रवाई के दौरान 10 साल के बच्चों से लेकर 16 साल तक के किशोर अमानवीय हालत में काम करते हुए मिलें.

    जानकारी के अनुसार, कलेक्टर पी. नरहरि को एक गुप्त सूचना मिली थी, जिसमें बताया गया था कि शहर के मोती तबेला और मिल्लत नगर में बैग बनाने वाले कारखानों में छोटे-छोटे बच्चों से काम कराया जा रहा हैं.

    इस सूचना के आधार पर कलेक्टर ने श्रम विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस विभाग की 40 सदस्यीय एक विशेष टीम का गठन किया था. इस टीम ने एसडीएम शालिनी श्रीवास्तव के नेतृत्व में संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए 100 से ज्यादा बच्चों और किशोरों को मुक्त कराया.

    कार्रवाई के दौरान खुलासा हुआ कि बच्चों के बेहद अमानवीय तरीके से काम कराया जा रहा था. उन्हें एक छोटे से कमरे में रहने और काम करने के लिए मजबूर किया जाता था.

    प्रारंभिक पूछताछ में बच्चों ने बताया कि वह बिहार के रहने वाले हैं और उन्हें यहां काम करने के लिए लाया गया था.

    बच्चों ने बताया कि उन्हें रोजाना 20 से 25 रुपए मजदूरी मिलती थी. लेकिन उन्हें किसी के पूछने पर 6 से 8 हजार रुपए सैलेरी देने का बताने के निर्देश मिले हुए थे.

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