इंदौर के सरकारी अस्पताल के मुर्दाघर में बड़ी लापरवाही, चूहों ने शव को जगह-जगह काट खाया

मृतक के परिजनों ने जिला अस्पताल के मुर्दाघर में शवों को रखने को लेकर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मृतक के भतीजे राहुल पांचाल ने बताया कि मेरे चाचा का शव पोस्टमॉर्टम के लिए शुक्रवार शाम जिला अस्पताल के मुर्दाघर (District Hospital Morgue) भेजा गया था. लेकिन यहां शव सुरक्षित रखने के लिए फ्रीजर तक नहीं है. शनिवार को हम शव लेने आए तो हमने देखा तो इसके चेहरे, हथेली, अंगूठे और अंगुलियों पर चूहों के कुतरने के ताजा जख्म मिले

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इंदौर. मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर (Indore) के जिला अस्पताल के मुर्दाघर (District Hospital Morgue) में बड़ी लापरवाही सामने आई है. यहां चूहों ने 41 वर्षीय एक व्यक्ति के शव के अलग-अलग अंगों को कुतर दिया है. पोस्टमॉर्टम के बाद शनिवार को शव की सुपुर्दगी के वक्त परिजनों ने इसका खुलासा किया. अधिकारियों ने बताया कि कथित तौर पर जहर खाने के बाद शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराए गए कृष्णकांत पांचाल की शुक्रवार को इलाज के दौरान मौत हो गई थी. मृतक धार (Dhar) जिले का रहने वाला था.

मृतक के भतीजे राहुल पांचाल ने बताया कि मेरे चाचा कृष्णकांत पांचाल का शव पोस्टमॉर्टम के लिए शुक्रवार शाम जिला अस्पताल के मुर्दाघर भेजा गया था. लेकिन हमने देखा कि मुर्दाघर में शव सुरक्षित रखने के लिए फ्रीजर तक नहीं है. उन्होंने बताया कि मुर्दाघर के कर्मचारियों ने हमें भरोसा दिलाया था कि रात में शव को कोई नुकसान नहीं होगा. लेकिन पोस्टमॉर्टम के बाद जब हमने शनिवार को शव देखा तो इसके चेहरे, हथेली, अंगूठे और अंगुलियों पर चूहों के कुतरने के ताजा जख्म मिले.

वहीं, अस्पताल के मुर्दाघर में शव की दुर्गति के बारे में पूछे जाने पर सिविल सर्जन डॉ. संतोष वर्मा ने कहा कि शव का पोस्टमॉर्टम करने वाले एक डॉक्टर से मेरी बात हुई है. उनका कहना है कि केवल शव के गाल पर चूहों के कुतरने के निशान मिले हैं. उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल के मुर्दाघर में चूहों और अन्य जीव-जंतुओं की रोकथाम के लिए एक निजी एजेंसी के जरिये दवाओं का नियमित छिड़काव कराया जाता है. सिविल सर्जन ने कहा, शव को चूहों द्वारा कुतरे जाने के मामले में हम इस एजेंसी को नोटिस जारी कर जवाब तलब करेंगे.

अधिकारियों ने बताया कि जिला अस्पताल को फिर से बनाया जाना है और इसके लिए इसकी पुरानी इमारत ध्वस्त कर जमीन समतल कर दी गई है. हालांकि, अस्पताल का मुर्दाघर अब भी पुराने भवन में ही चलाया जा रहा है.

स्थानीय लोगों के मुताबिक जिला अस्पताल परिसर में आस-पास के कई निर्माण टूटने से मुर्दाघर चारों ओर से खुले मैदान से घिर गया है. इसलिए बारिश के मौसम के दौरान इसमें चूहों और अन्य जीव-जंतुओं की घुसपैठ का खतरा बढ़ गया है.

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