Indore : कोरोना में इलाज नहीं मिला तो बच्चे ने डॉक्टर बनने का लिया संकल्प, स्ट्रीट लाइट के नीचे करता है पढ़ाई

नमन डॉक्टर बनना चाहता है.

Indore. इंदौर (Indore) के प्रसिद्ध 56 दुकान बाजार में आप जाएंगे तो एक नजारा आपको सोचने पर मजबूर कर देगा. यहां एक बच्चा दो कुर्सियों पर कॉपी किताब लेकर बैठा पढ़ाई करता दिखाई देगा. वैसे तो 56 दुकान पर लोग खाने पीने और घूमने जाते हैं, लेकिन ये बच्चा लोगों को प्रेरणा दे रहा है.

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इंदौर. पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का फेमस कोटेशन है- सपने वे नहीं होते जो आप सोते हुए देखते हैं सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते. आंखों में ऐसे ही सपने संजोए इंदौर में एक गरीब बच्चा नयन 56 दुकानों के सामने स्ट्रीट लाइट (Streer Light) के नीचे बैठकर अपनी पढ़ाई कर रहा है. बच्चे के परिवार की सामने फूल की दुकान है. वहीं सामने बैठकर वो अपनी पढ़ाई करता रहता है. उसका सपना डॉक्टर बनने का है. एक तरफ हाई प्रोफाइल चकाचौंध भरी जिंदगी, दूसरी तरफ जिंदगी की जद्दोजहद.

इंदौर के प्रसिद्ध 56 दुकान बाजार में आप जाएंगे तो एक नजारा आपको सोचने पर मजबूर कर देगा. यहां एक बच्चा दो कुर्सियों पर कॉपी किताब लेकर बैठा पढ़ाई करता दिखाई देगा. वैसे तो 56 दुकान पर लोग खाने पीने और घूमने जाते हैं, लेकिन ये बच्चा लोगों को प्रेरणा दे रहा है.

कोरोना ने सिखाया सबक
अपनी फूलों की दूकान के सामने बैठकर पढ़ाई करने वाले बच्चे का नाम नमन है वो चौथी कक्षा का छात्र है. नमन का कहना है कोरोना काल में घर के सभी लोग बीमार हो गए थे. डॉक्टर और अस्तपाल में जगह नहीं मिल रही थी. पूरा परिवार परेशान था. इन्ही परेशानियों को देखते हुए  उसने डॉक्टर बनने की ठानी और पढ़ाई में जुट गया. लेकिन पढ़ाई के साथ साथ फूलों की दूकान को भी देखना पड़ता है इसलिए यहीं बैठकर पढ़ाई कर लेता है.

पिता मजदूर, मां आशा कार्यकर्ता
नमन कौशल के परिवार की 56 दुकान के सामने फूलों की दुकान है. कोरोना काल की वजह से वो लंबे समय तक बंद रही और अब भी बहुत कम चलती है. इसलिए घर चलाने के लिए पिताजी को मजदूरी करनी पड़ रही है और मम्मी आशा कार्यकर्ता है. दोनों के काम पर चले जाने से नमन को अपनी फूलों की दुकान पर रहना पड़ता है. इसी दौरान वो पढ़ाई भी करता रहता है. फूल की दुकान मौसी चलाती हैं. नमन खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ता है.बाजार में भारी भीड़ होने के बावजूद उसकी एकाग्रता नहीं टूटती. वो पूरे मन से अपनी पढ़ाई में लगा रहता है. बच्चे की मौसी बताती हैं कि घर के 4 सदस्य कोरोना से संक्रमित हुए थे. तब हमें कोई डॉक्टर नहीं मिल पाया. उस दौरान परिवार की परेशानियों को नयन ने देखा. तभी से उसने ठान लिया कि उसे अच्छी पढ़ाई कर डॉक्टर बनना है.

56 दुकान एसोसिएशन करेगा मदद
बच्चे की लगन को देखकर 56 दुकान एसोशियन ने उसे डॉक्टर बनाने का बीड़ा उठाया है. एसोसिएशन के अध्यक्ष गुंजन शर्मा ने बताया कि बच्चे ने कहा है कि वो डॉक्टर बनना चाहता है. उसकी इच्छा शक्ति और पढ़ाई में रूचि देखकर हम लोगों ने तय किया कि बच्चे की हर संभव मदद की जाएगी. उसके डॉक्टर बनने के सपने को पूरा किया जाएगा.

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