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IIT इंदौर अब छठी से 8वीं तक के बच्चों को पढ़ा रहा साइंस और टेक्नालॉजी का पाठ

IIT यू ट्यूब के ज़रिए इसका प्रसारण कर रहा है.
IIT यू ट्यूब के ज़रिए इसका प्रसारण कर रहा है.

INDORE-कार्यक्रम का रिस्पॉंस काफी अच्छा रहा है. इसे छात्रों के साथ-साथ टीचर्स भी फॉलो कर रहे हैं. इसमें ये सुविधा भी दी गयी है कि किसी भी तरह की दुविधा होने पर छात्र सीधे शिक्षक से संपर्क कर सकते हैं.

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इंदौर. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) इंदौर अब स्कूली बच्चों की मदद कर रहा है.कोरोना (Corona) के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और घर पर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं. संस्थान ऐसे 6 वीं से लेकर 8 वीं तक के छात्रों को यू ट्यूब के ज़रिए पढ़ा रहा है.

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) इंदौर ने राष्ट्रीय आविष्कार अभियान और मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग के सहयोग से ये कार्यक्रम तैयार किया है. संस्थान ने विज्ञान पर चर्चा के माध्यम से,कक्षा 6 से 8 वीं तक के उन छात्रों की मदद के लिए ये अनूठी पहल की है,जो कोरोना की वजह से घर पर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं. आईआईटी के डायरेक्टर प्रो. नीलेश कुमार जैन ने बताया आईआईटी की एक भारत-श्रेष्ठ भारत टीम ने स्कूल न जाने वाले बच्चों के लिए गणित और विज्ञान पर लेक्चर तैयार कर प्रसारण शुरू किया है. संस्थान के एसोसिएट डीन डॉ.अजय कुशवाहा, ईबीएसबी संयोजक डॉ. नीरज शुक्ला, आरएए के कॉर्डिनेटर डॉ. आशीष कुमार और डॉ. मृगेन्द्र दुबे इस कार्यक्रम का संचालन कर रहे हैं.

नयी पहल
डॉ.अजय कुशवाहा ने बताया कि ये प्रसारण राष्ट्रीय आविष्कार अभियान का एक हिस्सा है जिसे कक्षा छह से आठवीं तक के छात्र छात्राओं के लिए शुरू किया गया है. इसे हर बुधवार को शाम 4 से 5 बजे तक यू ट्यूब पर प्रसारित किया जा रहा है. ये संस्थान की एक अनूठी पहल है जो नई शिक्षा नीति 2020 को आगे बढ़ाने में मदद करेगी.



अच्छा रहा रिस्पॉांस
ईबीएसबी के संयोजक डॉ. नीरज शुक्ला ने कहा ये प्रोग्राम इसलिए शुरू किया गया है ताकि बच्चों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बारे में बताया जा सके. कार्यक्रम का रिस्पॉंस काफी अच्छा रहा है. इसे छात्रों के साथ-साथ टीचर्स भी फॉलो कर रहे हैं. इसमें ये सुविधा भी दी गयी है कि किसी भी तरह की दुविधा होने पर छात्र सीधे शिक्षक से संपर्क कर सकते हैं. डॉ शुक्ला ने बताया कि अपने इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध शिक्षाविद और शोधकर्ताओं को शामिल किया गया है. ताकि कार्यक्रम को और अधिक रोचक और उपयोगी बनाया जा सके.
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