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इंदौर: इंटरनेशनल गोताखोर पलक शर्मा को गणतंत्र दिवस पर मिलेगा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार

पलक के पिता बताते हैं कि पलक की गोताखोरी की प्रैक्टिस प्रभावित न हो इसके लिए वे 4 साल में 4 स्कूल बदलवा चुके हैं.
पलक के पिता बताते हैं कि पलक की गोताखोरी की प्रैक्टिस प्रभावित न हो इसके लिए वे 4 साल में 4 स्कूल बदलवा चुके हैं.

पलक शर्मा (Palak Sharma) ने साल 2019 में एशियन एज ग्रुप चैंपियनशिप में एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया था.

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इंदौर. मध्‍य प्रदेश के महत्‍वपूर्ण शहर इंदौर की शान इंटरनेशनल गोताखोर पलक शर्मा (International diver Palak Sharma) को गणतंत्र दिवस के मौके पर मंगलवार को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (Prime Minister National Children Award) से सम्मानित किया जाएगा. पलक के पिता पंकज शर्मा ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण इस बार यह सम्मान इंदौर के कलेक्टर ऑफिस में मंगलवार दोपहर 12 बजे से वर्चुअल तरीके से दिया जाएगा. दिल्ली से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यक्रम में शामिल होंगे. आमतौर पर देश के राष्ट्रपति के हाथों दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में यह सम्मान दिया जाता है और प्रधानमंत्री भी सम्मानित बच्चों से मुलाकात करते हैं, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते यह सम्मान समारोह वर्चुअल आयोजित हो रहा है.

पलक ने साल 2019 में एशियन एज ग्रुप चैंपियनशिप में एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया था. इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पलक अब तक की सबसे कम उम्र की गोताखोर भी बनी थीं. इसके अलावा छोटी सी उम्र में ही वे पांच राष्ट्रीय स्पर्धाओं में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. इनमें विभिन्न वर्गो में कुल 11 स्वर्ण पदक हासिल किए हैं. पलक के पिता पंकज शर्मा ने बताया कि पलक ने 8 साल की उम्र से गोताखोर की प्रैक्टिस करना शुरू की थी और महज 13 साल की उम्र में एशियन एज ग्रुप चैंपियनशिप -2019 में दो सिल्वर और एक गोल्ड मेडल जीतकर सबसे कम्र उम्र की गोताखोर का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा लिया. पांच बार वो राष्ट्रीय स्पर्धाओं में प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुकीं हैं. पलक अपने गुरु रमेश व्यास को अपना आदर्श मानती हैं. उनका लक्ष्य गोताखोरी में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक लाना है.





अब पानी में उतरने के लिए बेताब
पलक के पिता बताते हैं कि पलक की गोताखोरी की प्रैक्टिस प्रभावित न हो इसके लिए वह 4 साल में 4 स्कूल बदलवा चुके हैं. स्कूलों में पढ़ाई के दबाव के चलते प्रैक्टिस प्रभावित हो रही है. पलक स्कूल जाने के साथ ही सुबह शाम 8 घंटे प्रैक्टिस करती है. पढ़ाई में भी पलक मैरिट में आती है. वहीं, पलक की मां भाग्यश्री शर्मा बताती हैं कि लॉकडाउन में पलक की गोताखोरी की प्रैक्टिस नहीं हो पा रही थी, क्योंकि सभी स्विमिंग पुल बंद थे. ऐसे में छत पर ही गेम्स के कई साधनों की व्यवस्था की गई. छत पर गद्दे डालकर उस पर जंपिग, डायविंग और दूसरी प्रैक्टिस कराते रहे. डेढ घंटे नॉन स्टॉप रनिग होती थी. फिलहाल साढ़े तीन किलोमीटर की रनिंग हो रही है. पलक कहती है कि कोरोना काल में 10 महीने जमीन पर तो खूब प्रैक्टिस हो गई अब पानी में उतरने की चाहत है.
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