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'कचरे की छंटाई' और 'कचरे से कमाई,' जानें सफाई का सिरमौर कैसे बना इंदौर

Clean City: सफाई के गजब के मॉडल ने इंदौर को 6वीं बार सबसे स्वच्छ शहर का खिताब दिलाया.

Clean City: सफाई के गजब के मॉडल ने इंदौर को 6वीं बार सबसे स्वच्छ शहर का खिताब दिलाया.

Indore News: मध्य प्रदेश के इंदौर जिले को 6वीं बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया है. दरअसल, इंदौर में सफाई का स ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

इंदौर फिर बना देश का सबसे स्वच्छ शहर
सबसे हटकर है यहां का सफाई मॉडल
850 गाड़ियां लगातार इकट्ठा करती हैं कचरा

इंदौर. केंद्र सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर लगातार 6वीं बार पहले नंबर पर आया है. इसके पीछे ‘कचरे की छंटाई’ और ‘कचरे से कमाई’ बड़ा कारण है. शह में रोज औसतन 1,900 टन कचरे को हर दरवाजे से इकट्ठा किया जाता है. यह काम 6 अलग-अलग श्रेणियों में किया जाता है. यही इंदौर की सफाई का मॉडल है. वर्ष 2022 के सर्वेक्षण में अलग-अलग श्रेणियों में 4,355 शहरों के बीच टक्कर थी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में दिल्ली में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में इंदौर को एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में फिर सिरमौर घोषित किया गया.

इंदौर नगर निगम (आईएमसी) के अधिकारियों ने बताया कि कचरे की प्राथमिक स्रोत पर ही सुव्यवस्थित छंटाई से मध्य प्रदेश का यह सबसे बड़ा शहर न केवल स्वच्छ बना रहता है और आबो-हवा सुरक्षित रहती है, बल्कि यह ‘कीमती’ कचरा शहरी निकाय को करोड़ों रुपये की कमाई भी करा रहा है. उन्होंने बताया कि ‘‘कचरा पेटी मुक्त शहर’ की 35 लाख की आबादी औसतन रोज तकरीबन 1,200 टन सूखा कचरा और 700 टन गीला कचरा उत्पन्न करती है.

लगातार चलती हैं 850 गाड़ियां
आईएमसी की स्वच्छता इकाई के अधीक्षण इंजीनियर महेश शर्मा ने बताया,‘‘शहर भर में लगातार चलने वाली 850 गाड़ियों की मदद से हम लगभग हर घर एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान के दरवाजे से गीला और सूखा कचरा छह श्रेणियों में अलग-अलग जमा करते हैं. इन गाड़ियों में बनाए गए विशेष कम्पार्टमेंट में डायपर और सैनिटरी नैपकिन जैसे जैव अपशिष्ट भी अलग से एकत्र किए जाते हैं.’’उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्रोत पर ही कचरे को अलग-अलग जमा करने से प्रसंस्करण के लिए इसकी गुणवत्ता उत्तम रहती है. शर्मा ने बताया कि ‘शहरी क्षेत्र से निकलने वाले गीले कचरे से बायो-सीएनजी बनाने का एशिया का सबसे बड़ा संयंत्र’ लगाने के बाद इंदौर ने देश के अन्य शहरों को सफाई के मुकाबले में काफी पीछे छोड़ दिया है.

550 टन गीले कचरे से बनती है खाद
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 फरवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये 150 करोड़ रुपये की लागत से बने इस ‘‘गोबर-धन’’ संयंत्र को लोकार्पित किया था. विश्व बैंक भी इस इकाई का अध्ययन कर रहा है. अधिकारियों ने बताया कि शहर के देवगुराड़िया ट्रेंचिंग ग्राउंड पर 15 एकड़ पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के आधार पर एक कम्पनी द्वारा चलाया जा रहा संयंत्र हर दिन 550 टन गीले कचरे (फल-सब्जियों और कच्चे मांस का अपशिष्ट, बचा या बासी भोजन, पेड़-पौधों की हरी पत्तियों, ताजा फूलों का कचरा आदि) से 17,000 से 18,000 किलोग्राम बायो-सीएनजी और 100 टन जैविक खाद बना सकता है.

Tags: Indore news, Mp news

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