अपना शहर चुनें

States

इंदौर : नगरीय निकाय चुनाव से पहले फिर निकला मेट्रो का जिन्न, 10 महिने से बंद पड़ा काम फिर शुरू हुआ

इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट में सबसे बड़ी बाधा बापट चौराहा से विजय नगर के बीच एमआर-10 के बीचों बीच बिजली की हाईटेंशन लाइन है(सांकेतिक फोटो)
इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट में सबसे बड़ी बाधा बापट चौराहा से विजय नगर के बीच एमआर-10 के बीचों बीच बिजली की हाईटेंशन लाइन है(सांकेतिक फोटो)

नागपुर (Nagpur) मेट्रो रेल का भूमि पूजन 31 मई 2015 को हुआ था और 21 अप्रैल 2018 से 6 किलोमीटर की राइड शुरू कर दी गई. पहली कमर्शियल लाइन 9 मार्च 2019 को शुरू हुई और 20 किलोमीटर के एरिया में मेट्रो ट्रेन चलने लगी. आगामी फरवरी तक नागपुर मेट्रो का काम पूरा हो जाएगा,लेकिन इंदौर (Indore) मेट्रो कब तक कागजों से पटरी पर दौड़ेगी ये कह पाना मुश्किल है

  • Share this:
इंदौर.मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव की हलचल के बीच मेट्रो (Metro) का जिन्न फिर निकल आया है. 10 महिने से मेट्रो प्रोजेक्ट बंद पड़ा था, जिस पर अब फिर से काम शुरू हो गया है.मेट्रो ट्रेन को लेकर बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) आमने-सामने हैं. दोनों ही दल नगरीय निकाय चुनाव में इस मुद्दे को भुनाने की तैयारी में हैं.

मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार ने 2013 के विधानसभा चुनाव में ये दावा किया था कि 2018 तक भोपाल और इंदौर के एक हिस्से में मैट्रो पटरी पर दौड़ने लगेगी.घोषणा के 7 साल बाद मेट्रो तो पटरी पर नहीं आ पाई लेकिन हर चुनाव में मेट्रो का मुद्दा जरूर दौड़ता दिखाई दिया. अब जबकि नगरीय निकाय चुनाव सिर पर हैं उससे पहले एक बार फिर मेट्रो का जिन निकल आया है. करीब 10 महिने से बंद पड़े काम को आनन फानन में शुरू करा दिया गया है.

दो बार भूमि पूजन
मध्य प्रदेश में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव से पहले 2 बड़े शहरों भोपाल और इंदौर के सबसे बड़े प्रोजेक्ट मेट्रो रेल को गति देने की बात सत्ताधारी दल बीजेपी फिर कहने लगी है. हालांकि मेट्रो का श्रेय लेने की होड़ कांग्रेस ने भी की थी और 14 सितंबर 2019 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 7500.8 करोड़ की लागत से बनने वाली इंदौर मेट्रो का दोबारा भूमिपूजन कर दिया था. लेकिन कमलनाथ सरकार की विदाई के साथ ही इंदौर मेट्रो का काम भी बंद हो गया. अब जैसे ही नगरीय निकाय चुनाव की सुगबुगाहट तेज हुई तो एक बार फिर मेट्रो का काम शुरू करा दिया गया है जिससे लोगों को लगे कि मेट्रो चलने वाली है.और तो और इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह को मेट्रो प्रोजेक्ट का चैयरमेन बना दिया गया है. उनका कहना है इंदौर मेट्रो का काम धीरे धीरे पिकअप कर रहा है. भूअर्जन और हाइटेंशन लाइन हटाने के मुद्दे सॉर्ट आउट किए जा रहे हैं. इसके बाद इंदौर मेट्रो का काम गति पकड़ लेगा.




बाधाएं बहुत हैं
इंदौर मेट्रो के कर्ताधर्ता बैठकों में काम तेज करने की वकालत तो कर रहे हैं,लेकिन बाधाएं हटाने के लिए जमीनी स्तर पर कोई सार्थक पहल नजर नहीं आ रहा है.पहले चरण में एमआर-10 रेल ओवरब्रिज से पूर्वी रिंग रोड के मुमताज बाग तक जिस पहले हिस्से में काम होना है,वहीं की बाधाएं हटाने की कोई गतिविधि फिलहाल नजर नहीं आ रही हैं.इस हिस्से में सुखलिया,सयाजी तिराहा,विजय नगर और खजराना चौराहे की रोटरी हटना है. ये काम नगर निगम को करना है.इंदौर से मेयर की दौड़ में शामिल सिंधिया के खास नेता मोहन सेंगर इसी क्षेत्र से पिछला चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़े थे लेकिन वो रमेश मेंदोला से हार गए थे. अब वे बीजेपी में हैं और मेट्रो का मुद्दा भुनाने की तैयारी में लग गए हैं. उनका कहना है बीजेपी ही मेट्रो का संकल्प पूरा करेगी और तय समय सीमा मे ही मेट्रो का काम पूरा होगा.

इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट में सबसे बड़ी बाधा बापट चौराहा से विजय नगर के बीच एमआर-10 के बीचों बीच बिजली की हाईटेंशन लाइन है. इसका हटना भी अभी दूर की कौड़ी लग रहा है,क्योंकि उससे पहले बिजली ट्रांसमिशन कंपनी को वैकल्पिक लाइन का काम करना होगा. कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला का कहना है कि भाजपा की नीयत ही नहीं है कि इस प्रोजेक्ट को शुरू किया जाय.यही वजह रही कि पिछले 7 साल में ये प्रोजेक्ट नौ दिन चले अढ़ाई कोस की कहावत पर चल रहा है. भाजपा चाहती तो कब की मेट्रो ट्रेन पटरियों पर दौड़ने लगती. लेकिन चुनाव से पहले एक बार फिर जनता को बरगलाने के लिए मेट्रो का सपना दिखाना शुरू कर दिया गया है. चुनाव समाप्त होते ही ये प्रोजेक्ट फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा.

भगवान भरोसे काम
यदि दूसरे शहरों में मेट्रों की बात की जाय तो नागपुर मेट्रो रेल का भूमि पूजन 31 मई 2015 को हुआ था और 21 अप्रैल 2018 से 6 किलोमीटर की राइड शुरू कर दी गई. पहली कमर्शियल लाइन 9 मार्च 2019 को शुरू हुई और 20 किलोमीटर के एरिया में मेट्रो ट्रेन चलने लगी. आगामी फरवरी तक नागपुर मेट्रो का काम पूरा हो जाएगा,लेकिन इंदौर मेट्रो कब तक कागजों से पटरी पर दौड़ेगी ये कह पाना मुश्किल है.चुनाव में जरूर ये मुद्दा अहम बन जाता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज