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Crime : ट्रैक में सिक्का फंसाते थे, सिग्नल रेड होते ही ट्रेन रुकती थी और फिर ये बदमाश.....

इस गिरोह ने एक हफ्ते में एमपी, गुजरात, राजस्थान और हरियाणा में वारदात को अंजाम दिया.

इस गिरोह ने एक हफ्ते में एमपी, गुजरात, राजस्थान और हरियाणा में वारदात को अंजाम दिया.

Indore- आरोपी लूटपाट (Loot) के लिए ऐसी जगह चुनते थे जहां रेलवे ट्रैक और सड़क नजदीक हों और वहां कोई रेलवे गार्ड नहीं हो. जैसे ही कोई ट्रेन (Train) आती दिखती थी, वो ट्रैक के लॉक में कुछ सामान फंसा देते थे. सिग्नल रेड होते ही ट्रेन कुछ देर के लिए ठहर जाती थी.

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इंदौर. इंदौर GRP को बड़ी सफलता हाथ लगी. उसने एक ऐसे शातिर गिरोह (Gang) को पकड़ा जो ट्रेनों के सिग्नल से छेड़छाड़ कर उन्हें रोक देता था और फिर यात्रियों से लूटपाट कर भाग जाता था. ये गिरोह एक के बाद एक लगातार अलग-अलग राज्यों में 9 दिन में 6 कई वारदातों को अंजाम दे चुका है. एक जगह लूट करने के बाद गिरोह दूसरे राज्य में भाग जाता था.

26 जून को इंदौर जीआरपी थाना पुलिस को कुछ यात्रियों ने शिकायत की थी कि सुबह के वक़्त चाकू की नोंक पर कुछ बदमाशों ने उनके साथ ट्रेन में चढ़कर लूटपाट की. जिस वक़्त बदमाश ट्रेन में सवार हुए थे उससे थोड़ी देर पहले ट्रेन रुकी थी. वो तभी सवार हुए और लूटपाट कर फरार हो गए. शिकायत पर जीआरपी इंदौर ने केस दर्ज कर जांच शुरू की. यह घटना मक्सी के करीब हुई थी. जीआरपी ने तकनीकी जांच की तो पता चला कि ये गिरोह तो सिग्लन से छेड़छाड़ कर ट्रेन रोकता है और फिर वारदात करके फरार हो जाता है. पुलिस ने संदेहियों की शिनाख्त की ली और उनकी घेराबंदी शुरू कर दी.

अलग अलग राज्यों में लूटपाट
पुलिस को पता चला कि कोई गैंग सक्रिय है जो लगातार लगातार ट्रेनों में लूटपाट की वारदात कर रहा है. सबसे पहले राजस्थान के माउंटआबू में 18 जून को. फिर गुजरात के भरुच में 19 जून को. गुजरात के वापी में 20 जून को, महाराष्ट्र के नंदुरबार में 25, एमपी के मक्सी में 26 जून और राजस्थान के कोटा में 27 जून को वारदात को अंजाम दिया गया था. पुलिस यहां तक पहुंच गयी कि आरोपी एक जगह वारदात को अंजाम देने के बाद तत्काल मार्ग बदलकर दूसरी ट्रेन में सवार हो जाते थे या फिर अपने वाहन से तत्काल शहर छोड़ देते थे.

फास्ट टैग से मिली मदद
इंदौर जीआरपी को फिर आरोपियों के वाहन के बारे में जानकारी हाथ लगी. सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि आरोपी घटना को अंजाम देने के तुरंत बाद सड़क के रास्ते अपनी कार से भाग रहे हैं. पुलिस को टोल टेक्स पर लगे सीसीटीव्ही में एक कार गुजरती नजर आयी. इस कार का नंबर HR 70 -A -2288 था. यह हरियाणा की थी. इस कार के बारे में जब जानकारी जुटाई तो पता चला कि जिन भी जगहों पर ट्रेन में लूट हुई उन शहरों के नजदीकी टोल नाकों से यह कार गुजरी है. पुलिस ने फिर इस वाहन में लगे फ़ास्ट टैग के बारे में जानकारी जुटाई तो यह किसी दीपक के नाम निकली. पुलिस ने आरोपी के मोबाइल नंबर से जानकारी जुटाना शुरू की तो गैंग के अन्य सदस्य सोनी, राहुल और छोटू के बारे में पता चलता गया.

लूट का माल बरामद
इतना तो काफी था. गैंग के चार सदस्यों को पुलिस ने हरियाणा के फतेहाबाद से गिरफ्तार कर लिया. आरोपियों ने देश के विभिन्न राज्यों में वारदात की बात कबूली है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटा हुआ सामान, नगदी, आभूषण और अन्य चीजे जब्त की हैं.

तकनीक को झांसा
आरोपी बेहद शातिर हैं. वो तकनीकी तौर पर ट्रेन को रेलवे स्टेशन से पहले आउटर में रोकते थे. इसके लिए वह एक खास ट्रिक का उपयोग करते थे. रेलवे ट्रैक पर पटरी को मजबूत बनाये रखने के लिए लोहे के लॉक होते हैं. लेकिन इन लॉक के बीच में गैप होता है. यदि कोई इस गैप में सिक्का या कोई अन्य सामान फंसा देता है तो खुद ब खुद सिग्नल रेड हो जाता है. आरोपी इसी ट्रिक का उपयोग करते थे. साथ ही ऐसी जगह चुनते थे जहां रेलवे ट्रैक और सड़क नजदीक हों. और वहां कोई रेलवे गार्ड नहीं हो. जैसे ही कोई ट्रेन इन्हें आती दिखाई देती थी, वो ट्रैक के लॉक में कुछ सामान फंसा देते थे. सिग्नल रेड होते ही ट्रेन कुछ देर के लिए ठहर जाती थी. बस दो कोच को बीच में से जोड़ने वाली कपलिंग से एक आरोपी बोगी में घुसता था. फिर गेट खोलता था और बाकी के साथियो को ट्रेन में अंदर बुला लेता था. कुछ ही देर में हथियार की नोक पर वातानुकूलित बोगी में लूटपाट कर ये भाग जाते थे. खासकर महिलाओं के बैग पर इनकी नजर रहती थी.

गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश पुलिस को थी तलाश
लुटेरों ने 26 जून को भिंड इंदौर एक्सप्रेस ट्रेन में मक्सी के नजदीक लूट की थी. पुलिस को ट्रेन में पहले से लगे सीसीटीव्ही में कुछ संदेहियों के फुटेज मिले थे. उसके बाद पास के ही टोल नाके पर संदेही वाहन नजर आया और बस इसके आधार पर पुलिस अधिकारी इन शातिर लुटेरों तक पहुंच गयी. के आरोपियों की तलाश गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश पुलिस को थी. मध्य प्रदेश पुलिस को जैसे ही संदेहियों के ठिकाने की जानकारी मिली तो उन्होंने हरियाणा पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. जब सख्ती से पूछताछ हुई तो सारी वारदात भी कबूल कर लीं. पुलिस ने लूटा हुआ सामन भी जब्त कर लिया है.

आरोपी के पिता रेलवे में थे
मक्सी स्टेशन मास्टर ने पुष्टि की है कि वारदात वाले वक़्त स्टेशन या रेलवे की तरफ से सिग्नल रेड किया ही नहीं गया था. जब काफी देर तक ट्रेन खड़ी रही तो ट्रैक चैक करने के बाद ग्रीन सिग्नल दे दिया गया था. पता चला है कि गैंग के सदस्यों में से एक युवक के पिता रेलवे में कर्मचारी थे. शायद यही वजह होगी कि आरोपी को यह तकनीकी जानकारी होगी.

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