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Indore News: राशन माफिया पर कड़ी कार्रवाई, मोती तबेला में अवैध निर्माण ध्वस्त

इंदौर में निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया है.
इंदौर में निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया है.

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) में राशन माफ़िया पर सख्त कार्रवाई करते हुए जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस (Police) की टीम ने संयुक्त कार्रवाई कर दवे बंधुओं के साम्राज्य को ध्वस्त कर दिया.

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इंदौर. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) में राशन माफ़िया पर सख्त कार्रवाई करते हुए जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस (Police) की टीम ने संयुक्त कार्रवाई में दवे बंधुओं का साम्राज्य ढहा दिया. उनके मोती तबेला और मूसाखेड़ी के मकानों पर नगर निगम का बुलडोजर चला है. राशन माफिया भरत दवे और श्याम दवे ने मूसाखेड़ी के अलावा कलेक्ट्रेट के पीछे मोती तबेला में चार मकानों को नियमों का उल्लंघन करके निर्माण कराया था, जिसे सुबह करीब साढ़े सात बजे गिराया गया;

मूसाखेड़ी के तीन मंजिला मकान में किरायेदार भी रहते थे, जिन्हें नोटिस देकर पहले ही मकान खाली करवा लिया गया था. भरत दवे और श्याम दवे ने अपने साथियों के साथ मिलकर गरीबों के राशन को बाजार में बेच दिया था. इन पर रासुका की कार्रवाई हो चुकी है और ये जेल में बंद हैं. कुछ दिन पहले नगर निगम ने दवे के मोती तबेला के ऑफिस को नेस्तनाबूद कर दिया था. तभी से उसकी अन्य संपत्तियों की जांच की जा रही थी.

नोटिस भेजकर कार्रवाई


रिमूवल दस्ते की उपायुक्त लता अग्रवाल और जोन क्रमांक 18 के भवन अधिकारी देवकीनंदन वर्मा ने बताया कि कार्रवाई से पहले नगर निगम बिल्डिंग परमिशन विभाग ने संबंधित जगह नोटिस भेजकर स्वेच्छा से अतिक्रमण और अवैध निर्माण हटाने की चेतावनी दे दी थी,लेकिन तय समय सीमा में अतिक्रमण नहीं हटने के कारण प्रशासन को कार्रवाई करना पड़ी.

ये है पूरा मामला


अभी हाल ही में इंदौर जिले में 80 लाख का राशन घोटाला सामने आया था. कलेक्टर मनीष सिंह के मुताबिक मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना के तहत 24 श्रेणियों में पात्र हितग्राहियों को राशन दिया जाता है, जिसमें परिवार के हर सदस्य को 4 किलो गेहूं एक किलो चावल और एक किलो नमक दिया जाता है. गेहूं चावल मोटा अनाज एक रुपए प्रति किलो दर से और नमक 1 रुपए प्रति किलो के हिसाब से दिया जाता है, कलेक्टर के मुताबिक कोरोना महामारी के चलते इंदौर जिले में नियमित हितग्राहियो के अलावा 42 हजार अतिरिक्त परिवारों के लिए भी प्रति सदस्य 5 किलो गेहूं-चावल खाद्यान का आवंटन हुआ और वहीं अप्रैल 2020 से नंबवर तक प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 5 किलो गेहूं और चावल निशुल्क दिया गया. इस तरह पात्र हितग्राही को दोगुना राशन मिलना था, लेकिन राशन माफिया भरत दवे, श्याम दवे ने प्रमोद दहीगुड़े के सहयोग से एक मोडस ऑपरेंडी के तहत राशन उपभोक्ताओं की अज्ञानता का फायदा उठाकर प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का राशन उन्हें दिया ही नही.


इस तरह किया खेल


दरअसल सिर्फ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के तहत रेग्यूलर राशन ही उपभोक्ताओं को बायोमीट्रिक सत्यापन कर बांटा जाता रहा; राशन दुकान के अध्यक्ष और सेल्स मेन मिलकर गरीबों के राशन को बाजार में बेचते रहे. प्रथम चरण में शहर की 12 दुकनों की जांच की गई जो इन राशन माफियाओं के परिचितों की थी इन दुकानों के कारोबारी स्थल पर जाकर रिकॉर्ड देखा गया तो कई अनियमितताए पाईं गईं. अप्रैल 2020 से आज दिनांक तक खाद्यान्न, शक्कर, नमक, दालें, केरोसिन की मात्रा कम या अधिक पाए जाने की अनियमितताएं पाईं गईं. इन 12 दुकानों की जांच में 2 लाख 55 हजार 480 किलो गेहूं चावल गबन किया गया जो 51 हजार 96 हितग्राहियों में बांटा जाना था, जिसकी कीमत 79 लाख 4 हजार 479 रुपए है इसके अलावा केरोसिन, नमक, शक्कर, चना दाल, साबूत चना तुवर दाल की भी बंदरबांट की गई गरीबों को अनाज जैसी प्राथमिक आवश्यक्ता से वंचित किया गया ये न केवल कानूनी रूप से बल्कि नैतिक रूप से भी अक्षम्य अपराध है इस घोटाले में प्रभारी फूड कंट्रोलर आरसी मीणा की संलिप्ता पाई गई जिसे 13 जनवरी को संस्पेंड कर अलीराजपुर अटैच किया गया साथ ही उनके खिलाफ अलग अलग थानों में एफआईआर भी दर्ज की गईं हैं.
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