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INDORE का वरिष्ठ सहकारिता निरीक्षक रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, लोकायुक्त की टीम ने पकड़ा 

Indore. तोमर एक शिकायत रद्द करने के एवज में  5 हजार की रिश्वत पहले ही ले चुका था

Indore. तोमर एक शिकायत रद्द करने के एवज में 5 हजार की रिश्वत पहले ही ले चुका था

INDORE - भ्र्ष्टाचार में चरम तक डूबे तोमर ने दफ्तर, पद, सीट बिना किसी का ख्याल किये दस हजार रुपये देने के लिए दिलीप बोरासी को बुला लिया और अपनी उसी सीट पर बैठकर रिश्वत ले ली. रिश्वत लेते ही उसे पहले जेब में रखा फिर धीरे से अपनी टेबल में रखने की कोशिश की. उससे पहले ही लोकायुक्त ने उसे दबोच लिया.

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इंदौर. इंदौर लोकायुक्त (Lokayukta) की टीम ने वरिष्ठ सहकारिता निरीक्षक प्रमोद तोमर को आज रिश्वत (Bribe) लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया. तोमर उपायुक्त सहकारिता कार्यालय में पदस्थ है. तिलक नगर साख सहकारी संस्था के अध्यक्ष दिलीप बोरासी के विरुद्ध शिकायत की जांच खत्म करने के एवज में दस हजार रुपये वसूल रहा था. रिश्वत की पहली किश्त के तौर पर वो 5 हजार रुपये वसूल चुका था. दूसरी किश्त लेते हुए लोकायुक्त के दल ने उसे पकड़ लिया. अब विभिन्न गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच की जा रही है.

दिलीप बोरासी ने सहकारिता विभाग में पदस्थ सीनियर इंस्पेक्टर के विरूद्ध रिश्वत इंदौर लोकायुक्त में पदस्थ पुलिस अधीक्षक सव्यसांची सराफ से इसकी शिकायत की थी. शिकायत सत्यापन के लिए लोकायुक्त की टीम ने पहली किश्त देने के वक़्त रिकार्डिंग सहित अन्य साक्ष्य इकट्ठे कर लिए थे. लोकायुक्त के दल ने पहली किश्त के तौर पर फरियादी से पांच हजार रूपये भिजवाए थे, निरीक्षक तोमर ने पांच हजार रूपये ले कर दस हजार रूपये और लेने के लिए दबाब बनाना शुरू कर दिया.

ऐसे किया गिरफ्तार
23 जुलाई को पहली किश्त पांच हजार रुपये लेने के बाद दस हजार रूपये और लेने के लिए तोमर ने फरियादी बोरासी को अपने दफ्तर में ही बुला लिया. जैसे ही उसने दस हजार रूपये लेकर अपनी जेब में रखे लोकायुक्त दल ने उसे दबोच लिया.

ये था मसला 
दिलीप बोरासी को तिलक नगर सहकारी साख संस्था का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. गुटबाजी होने के कारण बार बार विरोधी पक्ष साजिश के तहत बोरासी की शिकायत करवा रहा था. पूर्व में संस्था में पदस्थ रहे पदाधिकारियों पर भी सीनियर इंस्पेक्टर से मिलीभगत के आरोप हैं. पहले हुई शिकायत के बाद निपटारे के नाम पर तोमर पैसे ले चुका था. लेकिन जब यह शिकायत और रिश्वत का सिलसिला आम हो गया तो, दिलीप बोरासी ने तंग आकर लोकायुक्त दफ्तर की शरण ली.

कई धाराओं में केस दर्ज
लोकायुक्त में हुई शिकायत के तत्काल बाद लोकायुक्त टीम हरकत में आ गई. दल ने एक रिकरिंग डिवाइस फरियादी को दिया और नोट की संख्या अंकित की. वह देने के लिए बौरासी को रवाना कर दिया और लगातार मॉनिटरिंग की जाती रही. बोरासी ने लोकायुक्त के माध्यम से योजना बनाकर आज पैसे देने के लिए तोमर से सम्पर्क किया. हालंकि भ्र्ष्टाचार में चरम तक डूबे तोमर ने दफ्तर, पद, सीट बिना किसी का ख्याल किये दस हजार रुपये देने के लिए दिलीप बोरासी को बुला लिया और अपनी उसी सीट पर बैठकर रिश्वत ले ली. रिश्वत लेते ही उसे पहले जेब में रखा फिर धीरे से अपनी टेबल में रखने की कोशिश की. उससे पहले ही लोकायुक्त ने उसे दबोच लिया. लोकायुक्त ने प्रमोद तोमर के विरूद्ध भ्रष्टाचार निवारण संशोधित अधिनियम 2018 की धारा 7 ,13(1)B, 13 (2),  के तहत कार्रवाई कर मामले की जाँच शुरू कर दी है. अब संबंधित सहकारिता विभाग, आयकर, प्रवर्त्तन निदेशालय और विभिन्न संबंधित जांच के लिए लिख रही है.

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