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देश का पहला साइलेंट सिटी बनेगा इंदौर, जिला प्रशासन कर रहा है ये खास काम

Arun Kumar Trivedi | News18 Madhya Pradesh
Updated: February 7, 2020, 7:23 PM IST
देश का पहला साइलेंट सिटी बनेगा इंदौर, जिला प्रशासन कर रहा है ये खास काम
शहर के 17 स्थानों को चयनित किया गया है.

भारत के सबसे स्‍वच्‍छ शहर का दर्जा हासिल करने वाला इंदौर (Indore) अब देश का पहला साइलेंट सिटी ऑफ इंडिया (Silent City of India) बनने जा रहा है. इसके लिए जिला प्रशासन ने अपना प्लान लागू करना शुरू कर दिया है.

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इंदौर. भारत के सबसे स्‍वच्‍छ शहर का दर्जा हासिल कर चुके इंदौर (Indore) ने अब एक कदम आगे बढ़ा दिया है. अब इंदौर देश का पहला साइलेंट सिटी ऑफ इंडिया (Silent City of India) बनने जा रहा है, जिसके लिए प्रशासन ने अपना प्लान लागू करना शुरू कर दिया है. शहर के 17 स्थानों को चयनित किया गया है, जहां ध्वनि प्रदूषण को कम करना है और इन रास्तों को नो हॉर्न जोन बनाया गया है. यही नहीं, डीजे और तेज ध्वनि वाले लाउडस्पीकरों पर भी प्रतिबंध लगाने की तैयारी की जा रही है. साल 2021 तक इंदौर को साइलेंट सिटी ऑफ इंडिया बनाने का लक्ष्य रखा गया है.

 
कलेक्‍टर ने कही ये बात
इंदौर को साइलेंट सिटी ऑफ इंडिया के रूप में पहचान दिलाने की बात पर प्रशासन का मानना है कि पिछले कुछ सालों में शहर में जिस तरह से ध्वनि प्रदूषण बढ़ा वो अलार्मिंग है. ऐसे में नॉइस पॉल्यूशन की चुनौती से निपटने के लिए प्लान तैयार किया गया है. कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर के 17 ऐसे स्थानों को चयनित किया है, जहां सबसे ज्यादा हॉर्न बजाया जाता है. इन स्थानों को नो हॉर्न जोन बनाया गया हैं. इनमें यूनिवर्सिटी, अस्पताल के साथ ही हाईकोर्ट जैसे संवेदनशील स्थान शामिल किए गए हैं. चिह्नित स्थलों में दो सड़कों को भी साइलेंट जोन में रखा गया है. इसमें शहर की पहली आदर्श सड़क गिटार चौराहे से साकेत चौराहे तक और पलासिया चौराहे से रीगल तक का मार्ग भी शामिल किया गया है. इस मार्ग को ट्रैफिक के लिए पहले से ही आदर्श मार्ग घोषित किया हुआ है. हाईकोर्ट होने के चलते भी ये मार्ग ट्रैफिक के लिए संवेदनशील है. इन स्थलों के सौ मीटर के दायरे में हॉर्न बजाना और तेज ध्वनि यंत्रों का उपयोग प्रतिबंधित किया गया है.

डीजे पर भी लगेगा प्रतिबंध
जिले के कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव का कहना है कि नो हॉर्न जोन के बाद डीजे और तेज आवाज में बजने वाले लाउडस्पीकर पर पाबंदी लगाई जाएगी. इसके लिए डीजे संचालकों और धार्मिक आयोजन करने वाली संस्थाओं की लिस्ट तैयार की जा रही है.

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डीजे और लाउडस्‍पीकरों पर लगेगा बैन.
 

ट्रैफिक पुलिस करेगी कार्रवाई
ध्वनि प्रदूषण के हिसाब से देखा जाए तो शहर को चार हिस्सों रहवासी, व्यावसायिक, औद्योगिक और शांत क्षेत्र में बांटा गया है. किसी भी क्षेत्र के ध्वनि प्रदूषण की मात्रा 40 से 45 डेसीबल तक हो तो उसे सामान्य माना जाता है, लेकिन शहर में कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां ये मात्रा 75 से 80 डेसीबल तक है. सबसे पहले इन्हीं क्षेत्रों को चिन्हित कर कार्ययोजना बनाई गई है. इसमें गाड़ियों के तेज हॉर्न की गति पर अंकुश लगाने के लिए ट्रैफिक पुलिस को निर्देश दिए गए हैं. ट्रैफिक पुलिस के एडीशनल एसपी महेन्द्र जैन का कहना है कि किसी भी सूरत में प्रेशर हॉर्न नहीं बजाने दिए जाएंगे. तय सीमा से ज्यादा वाले हॉर्न पर निगाह रखी जाएगी नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी.

साइलेंट सिटी ऑफ इंडिया की प्‍लानिंग (साइलेंट जोन)
1. पीसी सेठी अस्पताल,छावनी
2. लाल अस्पताल,सियागंज
3.सेंट फ्रांसिस अस्पताल,नायता मुंडला
4.गुजराती गर्ल्स कॉलेज,आरएनटी मार्ग
5.देवी अहिल्या विश्वविद्यालय,आरएनटी मार्ग
6. राजश्री अस्पताल,विजयनगर
7. मेदांता अस्पताल,विजयनगर
8.शैल्बी अस्पताल,जंजीरवाला चौराहा
9.अरिहंत अस्पताल,गुमाश्ता नगर
10.यूनिक अस्पताल,दशहरा मैदान
11.सुयश अस्पताल,गीता भवन
12. जीएसीसी,विजयनगर
13. सिका स्कूल,स्कीम 78,विजयनगर
14.प्रेस्टीज इंस्टिट्यूट
16. चिड़ियाघर,नवलखा
17.हाईकोर्ट,एमजी रोड


 

ध्वनि प्रदूषण से घातक बीमारियां
डॉक्टरों का कहना है कि आम आदमी की श्रवण क्षमता 80 डेसीबल होती है. इससे ज्यादा की आवाज वो बर्दाश्त नहीं कर सकता. 0 से 25 डेसीबल तक की ध्वनि को शांति का वातावरण माना जाता है. यदि आवाज की तीव्रता 80 डेसीबल से अधिक होने पर लोग बीमार होने लगते हैं, उसे बैचेनी होने लगती है. जबकि लगातार तेज आवाज में रहने से व्यक्ति बहरा हो सकता है. इंदौर की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर पूर्णिमा गडरिया का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण का संबध कानों से है और कान सीधे मस्तिष्क से जुड़े होते हैं. इसलिए ध्वनि प्रदूषण से घातक बीमारियां होने का खतरा रहता है. इससे न केवल आप बहरे हो सकते हैं बल्कि याददाश्त और एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन, अवसाद जैसी बीमारियों के अलावा नपुंसकता और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की चपेट में भी आ सकते हैं.

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First published: February 7, 2020, 7:15 PM IST
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