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सफाई में अव्वल इंदौर अब देश का पहला बेगर फ्री सिटी बनेगा, एक साल में पूरा होगा लक्ष्य
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Updated: February 21, 2020, 8:54 AM IST
सफाई में अव्वल इंदौर अब देश का पहला बेगर फ्री सिटी बनेगा, एक साल में पूरा होगा लक्ष्य
2021 तक देश का पहला बेगर फ्री सिटी बनेगा इंदौर (फाइल फोटो)

इंदौर (Indore) के कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव ने बताया कि मार्च तक पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली जाएगी और अगले साल मार्च 2021 तक इंदौर को भिखारी मुक्त शहर (Begger Free City) बना दिया जाएगा.

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  • Last Updated: February 21, 2020, 8:54 AM IST
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इंदौर. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की आर्थिक राजधानी इंदौर (Indoor) को वैसे तो खाने-पीने के लिए जाना जाता है, लेकिन पिछले 3 सालों में इंदौर ने सफाई में अपनी अलग पहचान बनाई है. अब जल्द ही ये शहर सड़कों पर घूमने वाले भिखारियों (Beggers) से भी मुक्त होगा. दरअसल, एक साल में इंदौर को देश का पहला बेगर फ्री सिटी बनाने का लक्ष्य रखा गया है.

इंदौर को भिखारी मुक्त शहर बनाने के लिए जिला प्रशासन ने इस अभियान पर काम करना भी शुरू कर दिया है. इसके लिए इंदौर निगम कमिश्रनर को नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है. इंदौर के कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव का कहना है कि भिक्षावृत्ति एक अभिशाप है. इसमें जनजागरूकता भी जरूरी है जिसमें लोग इसको बढ़ावा ना दें. उन्होंने बताया कि मार्च तक पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली जाएगी और अगले साल यानी मार्च 2021 तक इंदौर को भिखारी मुक्त शहर बना दिया जाएगा.

भिखारियों को उपलब्ध कराए जाएंगे अजीविका के साधन
भिखारी मुक्त इंदौर अभियान में भिक्षा मांगने वालों को आजीविका के संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिसके लिए सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाली व्यक्तिगत संस्थाओं की मदद ली जाएगी, ताकि हर भिखारी को उसकी दक्षता के अनुसार काम मिल सके और वे भीख मांगने की बजाय काम करके अपनी आजीवका चलाएं. इंदौर की मेयर मालिनी गौड़ का कहना है कि भीख मांगना अपराध है. इंदौर में काम की कोई कमी नहीं है, इसलिए भीख मांगने का कोई औचित्य नहीं है. भिखारियों को भी काम करने के लिए प्रेरित किया जाएगा और उनको उनके मुताबिक काम दिया जाएगा.



इंदौर शहर में 4 हजार से ज्यादा भिखारी
इंदौर शहर की बात की जाए तो यहां 4 हजार से ज्यादा भिखारी हैं जो अलग-अलग तरीके से भीख मांगते हैं. यहां तक कि शनिवार के दिन भीख मांगने के लिए बाहर से भी लोग आते हैं. उनको बाल्टी, शनि की प्रतिमा और सरसों का तेल किराए पर मिलता है. वे दिन भर भीख मांगकर वापस चले जाते हैं. ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है जो इस तरह से संगठित गिरोह चलाते हैं उन पर कार्रवाई की जाएगी.

मस्ती की पाठशाला
भिखारियों के काम करने वाले आस संगठन के डायरेक्टर वसीम इकबाल का कहना है कि भिक्षावृत्ति का मुख्य कारण सरकार की वेलफेयर स्कीमों का जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाना है. इसलिए बच्चों को इस पेशे से दूर करने लिए वे शहर के अलग-अलग हिस्सों में पांच मस्ती की पाठशालाएं चला रहे हैं, जिसमें भीख मांगने वाले बच्चे पढ़ते हैं और इनमें से कई बच्चे चेंज एजेंट तक बन गए हैं जो दूसरे बच्चों को भी यहां ला रहे हैं.

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First published: February 21, 2020, 8:37 AM IST
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