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भोपाल के बाद इंदौर-जबलपुर को बांटने की तैयारी में कमलनाथ सरकार, BJP ने दी ये 'चेतावनी'

Arun Kumar Trivedi | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 20, 2019, 4:06 PM IST
भोपाल के बाद इंदौर-जबलपुर को बांटने की तैयारी में कमलनाथ सरकार, BJP ने दी ये 'चेतावनी'
इंदौर को बांटने की जरूरत नहीं-मेयर मालिनी गौड़

कमलनाथ सरकार (Kamal Nath Government) ने भोपाल नगर निगम (Bhopal) को दो भागों में बांटने का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है. इसके बाद बारी इंदौर और जबलपुर की है. राज्य के नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह (Urban Development Minister Jaivardhan Singh) ने कहा कि शहरी विकास के लिए छोटे जनसंख्या वाले वार्डों का होना जरूरी है. उन्‍होंने ये बात सांसद विवेक तन्‍खा के ट्वीट के बाद कही है. हालांकि इंदौर की मेयर मालिनी गौड़ (Mayor Malini Gaur) ने इसका विरोध कर दिया.

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इंदौर. पिछले दिनों राजस्थान के जयपुर, जोधपुर और कोटा को वहां की सरकार ने दो-दो नगर निगमों में बांट दिया. इसी तर्ज पर अब मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार (Kamal Nath Government) भी सूबे के तीन शहरों भोपाल (Bhopal), इंदौर (Indore) और जबलपुर को दो नगर निगमों में बांटने जा रही है. राज्य के नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह (Urban Development Minister Jaivardhan Singh) ने कहा कि शहरी विकास के लिए छोटे जनसंख्या वाले वार्डों का होना जरूरी है. जबलपुर और इंदौर शहर में दो नगर निगम बनाने का कोई सुझाव या आवेदन आता है तो उस पर विचार किया जाएगा यानी राज्य सरकार ने इन दोनों शहरों में भी दो-दो नगर निगम बनाने का मन बना लिया है. हालांकि जैसे ही मंत्री जयवर्धन सिंह का ट्वीट आया इंदौर की मेयर मालिनी गौड़ (Mayor Malini Gaur) ने इसका विरोध कर दिया.

मेयर ने किया पलटवार
इंदौर की मेयर मालिनी गौड़ का कहना है कि इंदौर शहर को दो हिस्सों में बांटने की जरूरत नहीं है, जिस तरह से इंदौर स्वच्छता में तीन बार से लगातार नंबर वन बना हुआ है इससे नगर निगम की प्रभावी कार्यप्रणाली दिखाई देती है. नगर निगम सफाई से लेकर नागरिकों को सुविधाएं देने में कहीं से पीछे नहीं है. ऐसे में शहर का विभाजन ठीक नहीं है. उन्होने कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा को जबलपुर में ध्यान देने का ही सुझाव दिया है.

बीजेपी को हटाने की कांग्रेस योजना

मध्य प्रदेश में फिलहाल 16 नगर निगम हैं, जिन पर 16 मेयर बीजेपी के काबिज हैं. ऐसे में राज्य की कांग्रेस सरकार अब इन नगर निगमों पर अपने महापौर बनाना चाहती है. इसलिए पहले मेयर के चुनाव सीधे न कराकर पार्षदों में से मेयर चुनने का अध्यादेश जारी कर दिया. अब बड़े नगर निगमों को बांटने की कवायद शुरू हो गई है. भोपाल को दो भागों में बांटने के बाद अब प्रदेश की व्यापारिक राजधानी इंदौर और संस्कारधानी जबलपुर में भारतीय जनता पार्टी को समेटने के लिए कांग्रेस ने योजना बना ली है. इसलिए भोपाल की तर्ज पर इंदौर और जबलपुर नगर निगम को भी दो हिस्सों में बांटने पर मंत्री ने एक तरह से अपनी सहमति दे दी है वो इसके पीछे शहरों के विकास और जनता के काम तेजी से होने का हवाला दे रहे हैं. हालांकि इसके पीछे कांग्रेस की मंशा यही है कि सालों से नगरीय निकायों से काबिज बीजेपी को नेताओं को हटा दिया जाए.

ट्वीट ने गर्मा दी प्रदेश की राजनीति
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद विवेक तन्खा (MP Vivek Tankha) ने एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने मांग की कि जबलपुर म्यूनिसिपल कार्पोरेशन 1956 के कानून के तहत स्थापित हुआ तब जबलपुर की जनसंख्या दो लाख दी अब 15 लाख होगी. आज नगर निगम के 70 वार्ड हैं यदि दो कार्पोरेशन होंगे तो वार्ड संख्या दोगुनी हो जाएगी और शहर को दो मेयर भी मिलेंगे. कल में विधि सम्मत आवेदन नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह को करूंगा. जबकि आवेदन होता उससे पहले ही विवेक तन्खा के ट्वीट का मंत्री जयवर्धन सिंह ने जवाब दे दिया कि माननीय विवेक तन्खा के विचार उचित हैं. शहरी विकास के लिए छोटे जनसंख्या वाले वार्डों का होना जरूरी है.
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ट्वीट के बाद मचा हंगामा.


जबलपुर और इंदौर शहर में दो नगर निगम बनाने का कोई सुझाव या आवेदन आता है तो उस पर विचार किया जाएगा. इसी ट्वीट ने प्रदेश में सियासी हलचल मचा दी. बीजेपी नगर निगमों के बंटवारे का विरोध करती आ रही है. इंदौर से बीजेपी के मेयर मालिनी गौड़ ने साफ कह दिया कि विवेख तन्खा जबलपुर पर ध्यान दें. इंदौर को संभालने के लिए वो काफी हैं. इंदौर सफाई में लगातार तीन बार से देश में नंबर वन है यानी यहां की एक नगर निगम बेहतर काम कर रही है ऐसे में विभाजन का सुझाव गलत है.

कांग्रेस नेता राकेश सिंह यादव ने उठाई थी ये मांग
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश सचिव राकेश सिंह यादव ने इंदौर शहर की बढ़ती जनसंख्या और क्षेत्रफल को देखते हुए मांग की थी कि इंदौर शहर में नगर पालिका निगम को दो भागों में विभाजित कर दिया जाए, जिससे शहर को दो महापौर, दो सभापति, दो निगम कमिश्नर मिलेंगे. नगर निगम का कार्य क्षेत्र विभाजित होने से आम जनता को भी राहत मिलेगी और शहर के विकास को नई गति मिलेगी. उन्होंने इस आशय का पत्र आवश्यक जानकारी और भौगोलिक डाटा समेत मुख्यमंत्री कमलनाथ को भेजा था, जिसके बाद से ही प्रदेश की आर्थिक राजधानी और सबसे बडे़ शहर इंदौर के विभाजन की अटकलें तेज हो गईं थीं. अब सरकार की ओर से प्रतिक्रिया आना ये साबित करता है कि ये महज अटकलें नहीं हैं बल्कि वह दावे और आपत्तियां बुलाकर इंदौर और जबलपुर को दो नगर निगमों की सौग़ात दे सकती हैं. जबकि भोपाल के साथ ही भाजपा इंदौर और जबलपुर को बांटने का सड़क पर उतरकर विरोध करेगी यह लाजिमी है.

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First published: October 20, 2019, 3:57 PM IST
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