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सुनहरी यादें : इंदौर के जिस घर में गूंजी थी लता दीदी की पहली किलकारी, जानिए अब कैसा है वहां का हाल...

Historical Memories of Lata Mangeshkar life. लता दीदी का इंदौर के जिस घर में जन्म हुआ था वहां म्युरल बनाया गया है.

Historical Memories of Lata Mangeshkar life. लता दीदी का इंदौर के जिस घर में जन्म हुआ था वहां म्युरल बनाया गया है.

Golden memories -लताजी के इस घर की सूरत बदल चुकी है. मेहता परिवार ने घर के बाहरी हिस्से में कपड़े का शोरूम खोल लिया है. ...अधिक पढ़ें

इंदौर. आज सारा देश और दुनिया भर में फैले लाखों फैन स्वर कोकिला लता मंगेशकर को विनम्र श्रद्धांजलि दे रहे हैं. लता दीदी का आज 94 वां जन्मदिन है. उनका जन्म इंदौर में हुआ था. इस शहर से स्वर साम्राज्ञी की तमाम यादें जुड़ी हुई हैं. अब यहां इस महान गायिका लता मंगेशकर की प्रतिमा लगायी जाएगी.

अपनी सुरीली आवाज से पिछले 9 दशक से ज्यादा समय तक संगीत के खजाने में नए-नए मोती पिरोने वाली महान गायिका लता मंगेशकर का 94वां जन्मदिन इस बार उनके बिना मनाया जाएगा. देश के दिल इंदौर में उनका जन्म हुआ था. यहीं उनका बचपन बीता. अब उनकी यादों को चिर स्थायी बनाने के लिए उनकी प्रतिमा शहर में लगाई जाएगी. इंदौर में लता अलंकरण समारोह भी होगा.

इस घर में हुआ था लता दीदी का जन्म

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दिल्ली-एनसीआर
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अपनी मधुर आवाज से दुनिया को मोह लेने वाली स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर में मशहूर संगीतकार दीनानाथ मंगेशकर के यहां हुआ था. यहीं के सिख मोहल्ले में उनका बचपन बीता. हालांकि बाद में लता जी ने परिवार सहित इंदौर छोड़ दिया और वे महाराष्ट्र चलीं गयीं. उनके घर को एक मुस्लिम परिवार ने खरीद लिया. कुछ समय तक मुस्लिम परिवार यहां रहा. जाते-जाते उसने इसे बलवंत सिंह को बेच दिया. सिंह परिवार भी यहां काफी समय तक रहा और बाद में उसने भी इस घर को मेहता परिवार को सौंप दिया.

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लताजी के घर में शो-रूम

अब लताजी के इस घर की सूरत बदल चुकी है. मेहता परिवार ने घर के बाहरी हिस्से में कपड़े का शोरूम खोल लिया है. घर के मालिक नितिन मेहता बताते हैं कि उन्होंने लता जी याद को बरकरार रखने के लिए दुकान के एक हिस्से में लताजी का म्यूरल बनवाया है. वे रोज दुकान खोलने के साथ लताजी का आशीर्वाद लेते हैं और उनके गाये गाने ही शो रूम में बजाए जाते हैं. हालांकि लता जी अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी सादगी के किस्से बेहद मशहूर हैं. उनकी दो चोटियां और सफेद साड़ी उनके व्यक्तित्व का आकर्षण थीं. लोग उन्हें सरस्वती के रूप में देखते हैं,वाकई उनके वस्त्रों की तरह ही धवलता उनके विचारों में थी.

इस घर में गूंजी थी पहली किलकारी

इंदौर में लताजी की पहली किलकारी गूंजी थीं और गायन की विधा भी उन्होंने इंदौर से ही सीखी थी. इसलिए शहर के लोग चाहते हैं कि उनकी जन्मस्थली पर एक भव्य स्मारक के रूप में लता जी को समर्पित संगीत अकादमी या संग्रहालय बने.

ऐसा था लताजी का बचपन

स्थानीय लोग बताते हैं लताजी इंदौर में अपने पिता दीनानाथ मंगेशकर के साथ रहा करतीं थीं. पिता रंगमंच के कलाकार और गायक थे. इस वजह से परिवार में शुरुआत से ही संगीतनुमा माहौल था. यही वजह थी कि लता ने पांच साल की उम्र से पिता के साथ एक रंगमंच कलाकार के रूप में अभिनय करना शुरू कर दिया था. उन्होंने अपनी आवाज और अपनी सुर साधना से बहुत छोटी उम्र में ही गायन में महारत हासिल कर ली थी. बाद में उन्होंने 30 से ज्यादा भाषाओं में गीत गाए.

लताजी की प्रिय सिंध बेकरी

इंदौर की सिंध बेकरी से भी लता का खास रिश्ता रहा है. उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर इस बेकरी पर अक्सर आते थे. बेकरी मालिक हरीश लखवानी बताते हैं लता के पिताजी कुर्ता पजामा पहनते थे और बडे़ सादे अंदाज में रहते थे. उनको बेकरी का स्वाद बहुत पसंद था. लता जी भी कभी कभार उनके साथ बेकरी पर आया करतीं थीं. यही वजह कि आज भी हम लोग उन्हें देवी की तरह पूजते हैं. सुबह उठने के बाद उनकी फोटो पर अगरबत्ती लगाते हैं. हम लोग करीब 40 साल से लता जी का जन्मदिन मना रहे हैं.

स्वर साम्राज्ञी की प्रतिमा और समारोह

इंदौर की शान रहीं स्वर सामाग्री की यादों को चिरस्थायी बनाने के लिए नगर निगम लता मंगेशकर की गांधी हॉल परिसर में प्रतिमा लगवा रहा है. उनके जन्मदिन 28 सितंबर को मध्यप्रदेश सरकार का संस्कृति विभाग राष्ट्रीय लता अलंकरण समारोह और संगीत संध्या का आयोजन भी कर रहा है. इसमें पार्श्व गायक कुमार शानू, शैलेन्द्र सिंह के अलावा संगीत निर्देशक आनंद-मिलिंद को राष्ट्रीय लता अलंकरण सम्मान से नवाजा जाएगा. इस कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध गायिका अलका याग्निक अपनी प्रस्तुति देंगी.

Tags: Historical memories of lata mangeshkar life, Indore news

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