चुनाव ख़त्म प्रत्याशियों का हिसाब किताब जारी,सोशल मीडिया का मोह पड़ेगा भारी

एमसीएमसी कमेटी की प्रमुख और ज़िला पंचायत की सीईओ नेहा मीणा ने कहा कि चुनाव आयोग के निर्देश मिलते ही इन सभी फेसबुक,टवीटर समेत सोशल मीडिया पर चले प्रसार प्रचार का खर्चा प्रत्याशियों के खाते में जोड़ा जाएगा,जो प्रति मिनट डेढ़ लाख रुपए होगा.

Arun Kumar Trivedi | News18 Madhya Pradesh
Updated: December 7, 2018, 7:15 AM IST
चुनाव ख़त्म प्रत्याशियों का हिसाब किताब जारी,सोशल मीडिया का मोह पड़ेगा भारी
बीजेपी कांग्रेस
Arun Kumar Trivedi | News18 Madhya Pradesh
Updated: December 7, 2018, 7:15 AM IST
विधानसभा चुनाव तो निपट गए लेकिन अब तक एमसीएमसी  प्रत्याशियों के खर्च किए गए पैसों के हिसाब किताब में लगी हुई है.11 दिसम्बर को चुनाव परिणाम आने के बाद इंदौर जिले के प्रत्याशियों के खाते में  करीब दो करोड़ रुपए जुड़ जाएंगे. ये पैसे 219 विज्ञापनों के 34 लाख रुपए सहित सोशल मीडिया पर प्रचार के हैं. इसलिए उनकी मुश्किलें बढ़ना तय है.

विधानसभा चुनाव में इंदौर ज़िले में कुल 96 प्रत्याशी मैदान में थे. इनकी मॉनिटरिंग के लिए एमसीएमसी यानि मीडिया सर्टिफिकेशन और मॉनिटरिंग कमेटी राज्य और जिला स्तर पर बनाई गई थीं.ये प्रिंट,इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया पर चल रहे विज्ञापनों की मॉनिटरिंग कर रही थी. इसी कमेटी ने इंदौर जिले की 9 विधानसभा सीटों के प्रत्याशियों के प्रचार प्रसार के लिए इस्तेमाल किए गए वॉट्सएप नंबर और फेसबुक वीडियों की जांच की है. उनमें 50 वीडियो ऐसे निकले हैं जिसका प्रयोग सोशल मीडिया पर राजनैतिक विज्ञापनों के लिए किया गया है.

एमसीएमसी कमेटी की प्रमुख और ज़िला पंचायत की सीईओ नेहा मीणा ने कहा कि चुनाव आयोग के निर्देश मिलते ही इन सभी फेसबुक,टवीटर समेत सोशल मीडिया पर चले प्रसार प्रचार का खर्चा प्रत्याशियों के खाते में जोड़ा जाएगा,जो प्रति मिनट डेढ़ लाख रुपए होगा.

इनके खाते में जुड़ेंगे रुपए

- रमेश मेंदोला - बीजेपी
- अश्विन जोशी - कांग्रेस
- अंतर सिंह दरबार - कांग्रेस
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- सुदर्शन गुप्ता - बीजेपी
- संजय शुक्ला - कांग्रेस
- मोहन सेंगर - कांग्रेस
- आकाश विजयवर्गीय - बीजेपी
- मनोज पटेल - बीजेपी
- विशाल पटेल - कांग्रेस
- सत्यनारायण पटेल - कांग्रेस
- जीतू पटवारी - कांग्रेस
- मधु वर्मा - बीजेपी

चुनाव आयोग के निर्देशानुसार वोटिंग के 48 घंटे पहले किसी भी राजनैतिक विज्ञापन के लिए कमेटी से अनुमति लेना जरूरी होता है.लेकिन इन नियमों का उल्लंघन कर विज्ञापन छापने के छह मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई है.वहीं चुनाव के दौरान वाट्सएप ग्रुप पर आपत्तिजनक वीडियो डालकर धार्मिक भावनाओं को भड़काने के दो मामले सामने आए हैं. उन पर फआईआर दर्ज करा दी गई है.
एमसीएमसी कमेटी ने सोशल मीडिया पर चले 50 वीडियो के अलावा 170 क्लिपिंग ऐसी निकाली हैं, जिनका प्रयोग चुनाव प्रचार में किया गया था,लेकिन उन पर अभी फैसला नहीं हो पाया है. यदि ये राशि प्रत्याशियों के चुनाव खर्च में जुड़ जाएगी तो कई प्रत्याशियों का खर्चा निर्धारित खर्च से ज्यादा हो जाएगा और ऐसे में उनकी मुश्किलें बढ़ जाएंगी.
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