इंदौर: एक्सपोर्ट कंपनी के फर्जीवाड़े का CBI ने किया खुलासा, 9 जगहों पर छापेमारी में मिले अहम सबूत
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इंदौर: एक्सपोर्ट कंपनी के फर्जीवाड़े का CBI ने किया खुलासा, 9 जगहों पर छापेमारी में मिले अहम सबूत
CBI ने 180 करोड़ रुपये से ज्यादा के क्रेडिट फर्जीवाड़ा मामले में कंपनी के निदेशकों के खिलाफ FIR दर्ज की है

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी ने इंदौर के मेसर्स इंडिसन एग्रो फूड्स लिमिटेड कंपनी के निदेशकों, कंपनी से जुड़े अन्य लोगों और बैंक अधिकारी के आवास, उनसे जुड़े अन्य लोकेशन पर बुधवार देर शाम तक छापेमारी की. इस दौरान सीबीआई को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और सबूत मिले हैं

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  • Last Updated: June 17, 2020, 11:34 PM IST
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नई दिल्ली. केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने मध्य प्रदेश के इंदौर (Indore) स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक शाखा से करीब 180.15 करोड़ के फर्जीवाड़े (Fraud) में केस दर्ज किया है. एफआईआर (FIR) दर्ज करने के बाद इंदौर में आठ जगहों पर छापेमारी की गई. इसके अलावा जबलपुर में भी एक लोकेशन पर सीबीआई ने रेड (Raid) डाला. सीबीआई सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी ने मेसर्स इंडिसन एग्रो फूड्स लिमिटेड कंपनी के निदेशकों के आवास, उनसे जुड़े अन्य लोकेशन पर बुधवार देर शाम तक छापेमारी की. आरोपी निदेशकों और कंपनी से जुड़े अन्य लोगों, बैंक अधिकारी के आवास सहित अलग-अलग लोकेशन पर छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और सबूत मिले हैं. इन सबूतों के आधार पर आने वाले समय में आरोपियों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं.

क्या है करोड़ों के फर्जीवाड़े का खेल 

मिली जानकारी के मुताबिक यह मामला वर्ष 2013 का है. आरोप है कि इंडिसन एग्रो फूड्स को 180.15 करोड़ रुपए की क्रेडिट सुविधा दी गई थी. लेकिन कंपनी ने अगले ही वर्ष यानी 2014 से बैंक को भुगतान में देरी करना शुरू कर दिया. इसके बाद बैंक ने वर्ष 2015 में इसे एनपीए करार कर दिया. इस संबंध में मेसर्स इंडिसन एग्रो फूड्स लिमिटेड कंपनी के खिलाफ केस दर्ज हुआ. साथ ही कंपनी के कई निदेशकों सहित बैंक के कई अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया. सीबीआई की टीम ने कंपनी के निदेशक विजय कुमार जैन, महेंद्र कुमार जैन, धीरज जैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है.



सीबीआई ने अपने एफआईआर में इस बात का भी जिक्र किया है कि कई तरह के दालों (खाद्य पदार्थों) के नाम से यह कंपनी कारोबार कर रही थी, लेकिन इसके नाम पर काफी फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया. यहां तक कि करोड़ों रुपए यूरोप के देशों और मिडिल इस्ट के देशों में ट्रांसफर किया गया. सूत्रों के मुताबिक वहां काफी पैसा निवेश किया गया है. वर्ष 2015 में इस कंपनी का अकाउंट एनपीए हो गया. इसी के आधार पर बाद में एसबीआई के द्वारा सीबीआई से शिकायत की गई, जिसको आधार बनाते हुए सीबीआई ने एफआईआर दर्ज किया है.
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