अयोध्या में राम मंदिर भूमिपूजन : 'राम लला हम आएंगे मंदिर यहीं बनाएंगे' नारे का क्या है MP से कनेक्शन
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अयोध्या में राम मंदिर भूमिपूजन : 'राम लला हम आएंगे मंदिर यहीं बनाएंगे' नारे का क्या है MP से कनेक्शन
बाबा मानते हैं कि अगर पुलिस का भय न होता तो यह सफलता नहीं मिलती

विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के नेता अशोक सिंघल को जब ये पता चला कि बाबा सत्यनारायण मौर्य कविता लिखते हैं और गाने गाते हैं तो उन्होंने दिल्ली (DELHI) भेज कर बाबा के गाने और नारों का एक कैसेट रिकार्ड करवाया.

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इंदौर.यूं तो राम मंदिर (ram mandir) आंदोलन से लेकर निर्माण तक पूरी प्रक्रिया में लाखों कार सेवकों, श्रद्धालुओं का योगदान रहेगा.लेकिन इनके बीच एक अलग शख्सियत हैं बाबा सत्यनारायण मौर्य. जिन्हें पूरे आंदोलन का एक अहम किरदार भी कहा जा सकता है. कहते हैं राम लला हम आएंगे, मंदिर (temple) यहीं बनाएंगे का नारा बाबा मौर्य ने ही दिया था.

बात उस वक्त की है जब राम मंदिर आंदोलन अपने पूरे उफान पर था. बाबा मौर्य उस आंदोलन से इतने प्रभावित हुए कि पढ़ाई खत्म करने के बाद बाबा राजगढ़ से अयोध्या चले गए. वहां जाकर गली मोहल्लों की दीवारों पर जोश से ओत प्रोत नारे लिख दिए. पैसे की तंगी हुई तो बाबा ने गेरू से दीवारों को आकृति, प्रतिमा और नारे से रंग दिया.





अशोक सिंघल का आदेश
बाबा मौर्य बताते हैं कि दीवारों पर लिखे नारे के बारे में जब विश्व हिन्दू परिषद के नेता अशोक सिंघल को जानकारी मिली तो उन्होंने आदेश दिया कि यह काम जारी रखो. विश्व हिन्दू परिषद के नेता अशोक सिंघल को जब ये पता चला कि बाबा सत्यनारायण मौर्य कविता लिखते हैं और गाने गाते हैं तो उन्होंने दिल्ली भेज कर बाबा के गाने और नारों का एक कैसेट रिकार्ड करवाया. इन नारों को अक्सर मंच से इस्तेमाल किया गया. दिल्ली से लौटकर अयोध्या आने के बाद बाबा ने फिर मंच की व्यवस्था संभाली. इस वक़्त बाबा को ही मंच संचालन की व्यवस्था सौंपी गयी और धीरे धीरे बाबा मंच प्रमुख घोषित कर दिए गए.

राम लला हम आएंगे...
उज्जैन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बाबा मौर्य ने मंच से ही रामलला हम आएंगे मंदिर वही बनाएंगे का नारा दिया था. इसके साथ कई ऐसे नारे प्रचलित हुए. अयोध्या में जब बाबरी मस्जिद के ढांचे को ढहाया गया था उस वक़्त बाबा सत्यनारायण मौर्य मंच पर मौजूद थे. वो मंच का संचालन कर रहे थे. वो मंच से जोर से नारे लगा रहे थे, उस समय कार सेवक भी उनका साथ दे रहे थे.

कपड़े से बनाया अस्थायी मंदिर
आंदोलन के वक़्त विवादित ढांचे को गिराने के बाद प्रभु श्रीराम को उसी स्थान पर बैठा दिया गया. बाबा ने अपने पास मौजूद कपड़े के बैनर की सहायता से रामलला के आसपास अस्थाई मंदिर जैसा बना दिया था. उस बैनर पर आकृति उकेर दी.यह लगभग आखिरी याद थी. बाबा सत्यनारायाण के मुताबिक़ जब तक वो अयोध्या में रहे तब तक लगातार दीवारों पर झांकी,आकृति और नारे से दीवारों को रंगते रहे.

प्रदर्शनी लगाने का न्यौता
दीवार पर आकृति बनाते और नारे लिखते समय यह ध्यान रखना होता था कि कहीं पुलिस न आ जाए. बाबा मानते हैं कि अगर पुलिस का भय न होता तो यह सफलता नहीं मिलती. इतनी जल्दी आकृति नहीं बना पाते.बहरहाल बाबा मौर्य खुद को बेहद सौभाग्यशाली मानते हुए कहते हैं कि उस वक़्त से ही वो सीधे मंदिर निर्माण आंदोलन से जुड़े रहे. बाबा को उत्तर प्रदेश सरकार से राम मंदिर स्थल पर पुरानी तस्वीरों के साथ प्रदर्शनी लगाने का न्योता मिला है.

ये मेरा सौभाग्य
बाबा सत्यनारायण मौर्य के मुताबिक़ पढ़ाई खत्म करने के बाद वो सीधे अयोध्या पहुंच गए. धीरे धीरे पेंटिंग और फिर गीत संगीत से जुड़ गए. राम मंदिर आंदोलन ने मुझे गीतकार और कवि बनाया. मुझे संचालन का मौक़ा मिला..मैंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कपड़े से प्रभु का मंदिर बनाया, अब उसी जगह भव्य मंदिर बनने जा रहा है, यह बेहद सौभाग्य का विषय है.
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