नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने वाले 'नर पिशाचों' ने कोरोना पेशेंट्स की ज़िंदगी से ऐसे किया खिलवाड़

नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन रैकेट में शामिल 6 आरोपी पकड़े जा चुके हैं.

नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन रैकेट में शामिल 6 आरोपी पकड़े जा चुके हैं.

Indore : फिलहाल सभी आरोपी 5 दिन की पुलिस रिमांड पर हैं. पुलिस (Police) को इनसे और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है. पुलिस इनके लोकल कांटेक्ट खंगाल रही है. साथ ही गिरोह ने कहां-कहां इंजेक्शन सप्लाई किए हैं और इसमें किस की क्या भूमिका है इस पर भी बारीकी से जांच की जा रही है.

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इंदौर. गुजरात में नमक और ग्लूकोज मिलाकर नकली  रेमडेसिविर इंजेक्शन (Remdesivir injection) बनाकर मध्य प्रदेश सहित पूरे भारत में खपाने वाले 4 मुख्य आरोपी 26 मई तक इंदौर पुलिस की रिमांड पर हैं. आरोपियों ने पूछताछ में जो खुलासा किया उसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएं. नकली इंजेक्शन बनाने के लिए फेक कोरोना रिपोर्ट तैयार की और मुंबई से एक कंपनी से रेमडेसिविर इंजेक्शन की हूबहू दिखने वाली 5000 शीशी और स्टिकर तैयार करवाए. फिर इन नर पिशाचों ने आपदा में अवसर ना केवल तलाशा बल्कि सैकड़ों जिंदगियों को दांव पर लगा दिया.

पुलिस इनसे इंदौर के लोकल नेटवर्क की पूछताछ कर रही है. इसके माध्यम से अब तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. सभी से पूछताछ की जा रही है.

नर पिशाचों का खेल

पूरे भारत में जब कोरोना संक्रमण मौत का तांडव मचा रहा था ऐसे हालात में ये नर पिशाच लोगों की जान से खेल रहे थे. पैसा कमाने के लिए इन आरोपियों ने ग्लूकोज और नमक मिलाकर पांच हजार नकली इंजेक्शन बनाए और इंदौर सहित पूरे भारत  में खपा दिये. पुलिस ने मुख्य चार आरोपी सुनील मिश्रा, कौशल वोहरा, पुनीत शाह और कुलदीप को गिरफ्तार किया. फिर इनसे मिली जानकारी के आधार पर दो और आरोपी पकड़े गए.

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गुजरात से शुरू हुई कहानी

नकली इंजेक्शन की कहानी गुजरात के मोरबी गांव से शुरू हुई. वहां एक फैक्ट्री में ग्लूकोज और नमक मिलाकर तकरीबन 5000 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाए गए. उसमें से 700 इंदौर और 500 जबलपुर और भारत के अन्य शहरों में खपा दिए. नकली इंजेक्शन बनाने के मास्टर माइंड पुनीत शाह और कौशल बोहरा है. इनमें पुनीत शाह डिस्पोजेबल ग्लब्स का बिजनेस करता था. कौशल बोहरा ने उससे कहा उन्हें मेडिकल लाइन में कुछ करना चाहिए और इससे बड़ा पैसा कमाया जा सकता है. दोनों के दिमाग में आया कि क्यों ना नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाकर बेचा जाए. लेकिन इसके लिए उन्हें ओरिजिनल इंजेक्शन चाहिए था.




ऐसे रची साजिश

सबसे पहले आरोपियों ने फेक कोरोना की रिपोर्ट तैयार की और इस आधार पर इन्होंने असली इंजेक्शन का जुगाड़ किया. फिर मुंबई में एक कंपनी को सबसे पहले 3000 इंजेक्शन की हूबहू शीशी बनाने का ऑर्डर दिया. लेकिन कंपनी ने 5000 से कम बनाने का ऑर्डर लेने से मना कर दिया. उसके बाद इन्होंने 5000 इंजेक्शन के लिए कांच की बोतल का आर्डर किया. रेपर तैयार किए और इसे खपाने के लिए सुनील मिश्रा और कुलदीप इस कड़ी में जुड़ गए. दरअसल सुनील मिश्रा भी डिस्पोजेबल मेडिकल आयटम का काम करता है. और इसी कारण वह पुनीत शाह के संपर्क में था. इन सभी आरोपियों के मेडिकल लाइन में कांटेक्ट हैं इसलिए उन्हें पता था कि नमक और ग्लूकोस से किसी की जान नहीं जाती. शुरुआती दौर में मरीज को ग्लूकोस और नमक ही दिया जाता है. इसलिए हुबहू देखने वाला इन्होंने नमक और ग्लूकोस से इंजेक्शन तैयार किया और फिर उन्हें दो अलग-अलग खेप में अलग-अलग तारीखों पर पूरे भारत में सप्लाई किया.

ऐसे जुड़े तार

पुलिस ने जब इंदौर के विजय नगर क्षेत्र में आरोपी को पकड़ा तब इस नकली इंजेक्शन रैकेट का खुलासा हुआ. इनके तार गुजरात से जुड़े. गुजरात पुलिस ने भी फैक्ट्री पर कार्रवाई की जिससे आरोपी 5000 से ज्यादा इंजेक्शन नहीं बना पाए. उसके बाद पुलिस ने एक के बाद एक इनकी कड़ी खंगाली और इंदौर सहित अन्य जगहों से 6 लोगों को गिरफ्तार किया. जिन्होंने सुनील मिश्रा से इंजेक्शन खरीदे थे पुलिस ने उन्हें भी आरोपी बनाया है. एसपी के मुताबिक जिन लोगों ने नकली इंजेक्शन तैयार करने में मदद की है चाहें वह नकली रैपर हो, शीशी या अन्य सामग्री. उन सभी को इसमें आरोपी बनाया जाएगा. कॉपीराइट एक्ट के तहत भी इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. साथ ही पुलिस जल्दी रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी के प्रतिनिधियों से इस पूरे मामले में चर्चा करेगी ताकि उनकी ओर से भी लीगल कार्रवाई की जा सके.

5 दिन की रिमांड

फिलहाल सभी आरोपी 5 दिन की पुलिस रिमांड पर हैं. पुलिस को इनसे और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है. पुलिस इनके लोकल कांटेक्ट खंगाल रही है. साथ ही गिरोह ने कहां-कहां इंजेक्शन सप्लाई किए हैं और इसमें किस की क्या भूमिका है इस पर भी बारीकी से जांच की जा रही है.

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