Indore News: पुलिसकर्मी ले रहा था 10 हजार की रिश्वत, लोकायुक्त के हत्थे चढ़ने पहले ही हुआ गायब

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में पुलिसकर्मी लोकायुक्त की कार्रवाई से पहले ही गायब हो गया. (सांकेतिक तस्वीर)

Lokayukta News: लोकायुक्त पुलिस ने एक हेड कॉ्न्सटेबल के खिलाफ मामला दर्ज किया. पुलिसकर्मी को पता नहीं इसकी कैसे भनक लग गई. लोकायुक्त की कार्रवाई से पहले ही वह छुट्टी लेकर गायब हो गया.

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इंदौर. मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने एक प्रधान आरक्षक के खिलाफ रिश्वत लेने का मामला दर्ज किया. लोकायुक्त पुलिस आरोपी को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार नहीं पाई. उसके पास आरोपी के वॉइस रिकॉर्ड हैं. इन रिकॉर्ड्स की लैब टेस्टिंग होने के बाद ही आरोपी पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी हो सकेगी. फिलहाल आरोपी छुट्टी लेकर कहीं चला गया है.

दरअसल, बाणगंगा थाना पुलिस को विष्णु नामक शख्स ने शिकायत की थी. उसने आवेदन में बताया था कि वह ऑटो मालिक है. उसने अपने ऑटो को किराए पर चलाने के लिए एक शख्स को दिया था. उसने कुछ समय तक ऑटो चलाया और नियमित किराया भी दिया. लेकिन, कुछ समय बाद वह पैसे देने में आनाकानी करने लगा. जब जांच की तो पता चला कि उस शख्स ने ऑटो को एक सूदखोर के यहां गिरवी रखकर पचास हजार रुपए उधार ले लिए.



लोकायुक्त पुलिस ने बनाई SIT

विष्णु ने बाणगंगा थाना पुलिस को शिकायत कर अपना ऑटो वापिस लेने की गुहार लगाई थी.पुलिस अधिकारियों ने आवेदन की जांच प्रधान आरक्षक संतोष सेंगर को सौंपी. जांच हाथ में आते ही संतोष फरियादी विष्णु से रुपए मांगने लगा. विष्णु ने 5 हजार रुपए दे भी दिए, लेकिन वो दस हजार मांग रहा था. इससे तंग आकर विष्णु ने लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक को शिकायत की. पुलिस अधीक्षक ने आरोपी पुलिसकर्मी को गिरफ्तार करने के लिए SIT का गठन किया.

पुलिसकर्मी को लगी रेड की भनक

लोकायुक्त पुलिस कुछ कर पाती उससे पहले ही आरोपी संतोष सेंगर को इस बात की भनक लग गई. वह विष्णु के बार-बार बुलाने पर भी नहीं गया. हालांकि लोकायुक्त पुलिस पैसो की मांग करते उसके ऑडियो जरूर रिकॉर्ड कर लिए. लोकायुक्त पुलिस जब संतोष को रिश्वत लेते रंगेहाथ नहीं पकड़ सकी, तब ऑडियो को ही आधार बनाया और मामला दर्ज किया. उधर, संतोष थाने से छुट्टी लेकर गायब हो गया. हालांकि ऑडियो के आधार पर लोकायुक्त ने पहली बार केस दर्ज नहीं किया है. इससे पहले भी भंवरकुआ थाने में पदस्थ दो पुलिसकर्मियों के विरुद्ध इस आधार पर केस दर्ज किया जा चुका है.

जांच में फंसा ये पेंच

बता दें, लोकायुक्त पुलिस ने भले ही केस दर्ज कर लिया हो, लेकिन उसके लिए अब एक बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है. आरोपी गिरफ्तारी के लिए लोकायुक्त के पास केवल आरोपी की वॉइस रिकॉर्डिंग है. इस रिकॉर्डिंग की आवाज से लैब में आरोपी की आवाज से मिलना जरूरी है. आवाज मिलने के बाद ही केस सिद्ध होगा और पुलिसकर्मी पर कार्यवाही हो सकेगी. मामले को लेकर लोकायुक्त DSP प्रवीण सिंह बघेल ने कहा कि बाणगंगा थाने में पदस्थ पुलिसकर्मी के विरुद्ध केस दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है. विष्णु नामक फरियादी ने लिखित शिकायत में रिश्वतखोरी का उल्लेख किया था. उसकी जांच में मामला सिद्ध हुआ. उसके बाद जांच की गई, केस दर्ज किया गया. प्राथमिकी दर्ज होने के बाद विस्तृत जांच की जाएगी.

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