'बोहरा समाज में वोट के लिए न तो फतवा जारी होता है न फरमान'

दाउदी बोहरा समाज के एक जिम्मेदार पदाधिकारी मजहर हुसैन सेठजीवाला का कहना है, 'यह बिलकुल भी कोई नई बात नहीं है. सैयदना साहब जहां भी तशरीफ रखते हैं, उन्हें हर वर्ग के लोग मिलने आते हैं'

Jayshree Pingle | News18Hindi
Updated: September 16, 2018, 5:41 PM IST
'बोहरा समाज में वोट के लिए न तो फतवा जारी होता है न फरमान'
इंदौर में कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो-PTI
Jayshree Pingle | News18Hindi
Updated: September 16, 2018, 5:41 PM IST
बारिश थमने के बाद हल्की ठंडी हवाओं से घिरे इंदौर में सियासी पारा अनायास गरमा गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह दाउदी बोहरा समाज की अशरा मुबारक वाअज में शामिल होकर धर्मगुरु सैयदना साहब के साथ गर्मजोशी से मुलाकात की है, उसने चुनावी माहौल को नया रंग दे दिया है. मीडिया का एक वर्ग इस मुलाकात के सियासी मायने निकालने में जुट गया है. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बोहरा समाज की इस वाअज में आने की अटकलें तेज हो गई हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ इंदौर में अपनी चुनावी रैली के बाद शाम को सैयदना साहब से मुलाकात कर रहे हैं.

'सियासत से लेना-देना नहीं'
आखिर इतने राजनेताओं के आने के पीछे कोई सियासी मकसद है? इस बारे में दाउदी बोहरा समाज के एक जिम्मेदार पदाधिकारी मजहर हुसैन सेठजीवाला का कहना है कि यह बिलकुल भी कोई नई बात नहीं है. सैयदना साहब जहां भी तशरीफ रखते हैं, उन्हें हर वर्ग के लोग मिलने आते हैं. प्रोफेशनल्स, डॉक्टर्स, बड़े उद्योगपति, बुध्दिजीवी... उसी तरह राजनेता भी आते हैं. रहा सवाल सत्तासीन लोगों का तो यहां ही नहीं विदेश में भी कई राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री उनसे मिलते रहते हैं. सेठजीवाला का साफ कहना है कि इस मेल-मुलाकात का सियासत से कोई लेना देना नहीं है.

'वोट की बात नहीं होती'

यह पूछने पर की क्या समाज के धर्मगुरु कोई राजनीतिक फतवा या फरमान जारी करते हैं? इस पर सेठजीवाला का कहना है कि कभी भी कोई फरमान जारी नहीं होता. किस पार्टी को वोट देना है इसकी कोई बात कभी नहीं होती. फरमान जारी होते हैं समाज और इंसान की बेहतरी से जुड़े मुद्दों के लिए.

सेठजीवाला का कहना है कि प्रधानमंत्री ने चूंकि सुबह आने की बात कही थी, इसलिए वे वाअज में शरीक हुए. कमलनाथ शाम को आएंगे. तब उनकी मुलाकात सैयदना साहब के निवास पर होगी. राहुल अगर सुबह के समय आते हैं तो उन्हें मस्जिद में ही आना होगा


कांग्रेस मौका नहीं खोना चाहती!
चर्चा है कि अब चुनावी दौर में कांग्रेस भी बोहरा समाज के साथ अपनी नजदीकियां बताने का मौका नहीं खोना चाहती. 17 सितंबर को भोपाल में चुनाव अभियान की शुरुआत कर रहे राहुल गांधी वाअज में किसी भी दिन इंदौर आ सकते हैं. कमलनाथ सैयदना साहब की मुलाकात के बाद यह तय होगा.

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चुनाव को प्रभावित किया
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने एक तरह से मध्यप्रदेश के पांच लाख और देश भर में फैले 50 लाख बोहरा समाज के लोगों को अपनी मौजूदगी से प्रभावित किया है. इसका असर 2018 में पांच राज्यों के चुनाव में और 2019 के लोकसभा चुनाव में हो सकता है. खास तौर पर जिस तरह से प्रधानमंत्री ने बोहरा समाज के लोगों के सामने दिल छू लेने वाले बातें कहीं.

प्रधानमंत्री ने जिस तरह से खुद को बोहरा समाज के करीब बताया. उन्हें अपना परिवारजन कहा. और इस बात के लिए धन्यवाद दिया कि उन्हें वाअज के इस मौके पर शामिल होने का अवसर दिया. प्रधानमंत्री ने यहां तक कह दिया कि मेरे दरवाजे आपके लिए हमेशा के लिए खुले हैं. बोहरा समाज के लोग मानते हैं कि इससे देश में ही नहीं विदेश में भी समाज की प्रतिष्ठा बढ़ी है.


आना अच्छा लगा पर अब जिक्र नहीं
हालांकि बोहरा समाज के लोग इससे अलग राय रखते हैं. उनका कहना है कि मोदी ने जिस गर्मजोशी से अपनी बाते रखी वह काबिले तारीफ थी. उन्होंने गुजरात के विकास में बोहरा समाज के योगदान को सराहा. अपनी हर योजना को बताते हुए कहा कि जिस तरह बोहरा समाज में कोई भूखा नहीं सोता वैसे ही मेरी सरकार ने गरीबों के लिए काम किया है. बोहरा समाज की स्वच्छता को अपने सफाई अभियान से जोड़ा. यह खुश करने वाली बातें थी.

उनका आना बहुत अच्छा लगा लेकिन इसका अब कोई जिक्र नहीं है. क्योंकि पूरा माहौल सैयदना साहबी की मौजूदगी में दिव्य अनुभूति का है. यह मोहर्रम के दौरान होने वाली वाअज है. सैयदना साहब मोहम्मद हुसैन की शहादत पढ़ रहे हैं. हुसैन की सदा के साथ पुरजोश मातम है.

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गांधी के बारे में पता चला
बोहरा समाज के युवाओं का कहना है कि उन्हें नहीं पता था कि महात्मा गांधी और 51वें सैयदना साहब की नजदीकियां रहीं हैं. ट्रेन में सफर के दौरान यह मुलाकात हुई और बाद में गांधीजी सैयदना साहब के निवास सैफी विला में भी रुके थे. जिसे बाद में सैयदना साहब ने देश को समर्पित कर दिया था. यह किस्सा वे प्रधानमंत्री की वजह से जान पाए.

समाज पर कोई प्रभाव नहीं
बोहरा समाज के जिम्मेदार पदाधिकारी का मानते हैं कि चुनाव का समय है इसलिए राजनेताओं के आने को अलग नजरिए से देखा जा रहा है. लेकिन वाअज के इस वातावरण में राजनीति की कोई जगह नहीं है. किसी भी दल के नेता के आने से बोहरा समाज का वोट प्रभावित नहीं होता है.
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