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मरीजों के पहले इस बीमार अस्पताल को है 'इलाज' की जरूरत

मरीजों के पहले इस बीमार अस्पताल को है 'इलाज' की जरूरत

राज्य शासन स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए करोडों रूपए की राशि तो खर्च करती है लेकिन मरीजों को उन सुविधाओं का पूरी तरह से लाभ नहीं मिल पाता है. इंदौर का आयुर्वेदिक अस्पताल भी इन दिनों कुछ इसी तरह बदहाली की मार झेल रहा है. अस्पताल में पर्याप्त संसाधन तो दूर की बात मरीजों के लिए पीने के पानी का भी बंदोबस्त नहीं है.

राज्य शासन स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए करोडों रूपए की राशि तो खर्च करती है लेकिन मरीजों को उन सुविधाओं का पूरी तरह से लाभ नहीं मिल पाता है. इंदौर का आयुर्वेदिक अस्पताल भी इन दिनों कुछ इसी तरह बदहाली की मार झेल रहा है. अस्पताल में पर्याप्त संसाधन तो दूर की बात मरीजों के लिए पीने के पानी का भी बंदोबस्त नहीं है.

राज्य शासन स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए करोडों रूपए की राशि तो खर्च करती है लेकिन मरीजों को उन सुविधाओं का पूरी तरह से लाभ नहीं मिल पाता है. इंदौर का आयुर्वेदिक अस्पताल भी इन दिनों कुछ इसी तरह बदहाली की मार झेल रहा है. अस्पताल में पर्याप्त संसाधन तो दूर की बात मरीजों के लिए पीने के पानी का भी बंदोबस्त नहीं है.

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राज्य शासन स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए करोडों रूपए की राशि तो खर्च करती है लेकिन मरीजों को उन सुविधाओं का पूरी तरह से लाभ नहीं मिल पाता है. इंदौर का आयुर्वेदिक अस्पताल भी इन दिनों कुछ इसी तरह बदहाली की मार झेल रहा है. अस्पताल में पर्याप्त संसाधन तो दूर की बात मरीजों के लिए पीने के पानी का भी बंदोबस्त नहीं है.

इंदौर के नंदलालपुरा क्षेत्र में पिछले 25 सालों से किराए के मकान में चल रहे इस अस्पताल के हालात इन दिनों खस्ताहाल है. अस्पताल में ना तो बिजली के पर्याप्त बंदोबस्त हैं और ना ही मरीजों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था. मूलभूत सुविधाओं के अभाव में अस्पताल में आने वाले मरीजों की भी फजीहत हो जाती है.  मरीजों को यहां अपनी बीमारी से पहले इन समस्याओं से जुझना पड़ता है.

यह आयुर्वेदिक अस्पताल स्टॉफ के मामले में भी सरकारी अनदेखी का शिकार है. अस्पताल के लिए चार मेडिकल ऑॅफिसर्स के पद स्वीकृत है लेकिन फिलहाल एक भी अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है. यही आलम स्टॉफ नर्स और कर्मचारियों के भी हैं.

मरीजों के उपचार के लिए राज्य शासन ने लाखों रूपए की मशीनें भी उपलब्ध कराई है लेकिन अस्पताल में मशीनों को रखने के लिए भी जगह नहीं है और मशीनें स्टोर रूम में ही धूल खा रही हैं. वहीं जो मशीनें अस्पताल में है वह भी कई सालों से खराब पडी हुई हैं.

इस अस्पताल में प्रदेश के कोने कोने से मरीज उपचार करवाने के लिए आते हैं लेकिन संसाधनों के अभाव में मरीजों को खासी मशक्कत का सामना करना पडता है. मरीजों की माने तो सरकार को इस अस्पताल की हालत को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए. वहीं अधिकारी भी खुद इस बात से परेशान है कि अस्पताल में व्यवस्थाओं के नाम पर कुछ नहीं है.

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