COVID-19: सांस के मरीजों के लिए जीवनदायिनी बन रही है नॉन रिब्रीथर मास्क
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COVID-19: सांस के मरीजों के लिए जीवनदायिनी बन रही है नॉन रिब्रीथर मास्क
गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. वीपी पांडे

नॉन रिब्रीथर मास्क (Non Rebreather Mask) उन मरीजों के लिए मददगार बन रहे हैं जिनको वेंटिलेटर की आवश्यकता तत्काल पड़ती है.

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इंदौर. देश के सबसे ज्यादा संक्रमित शहरों में शुमार इंदौर में हर स्तर पर कोरोना से लड़ाई लड़ी जा रही है. कोरोना पॉजिटिव ऐसे मरीज जिन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है, उनको अनूठे ऑक्सीजन मास्क का उपयोग कर उनकी जिंदगी को बचाने का काम किया जा रहा है. गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. वीपी पांडे ने बताया कि इंदौर में एनआरबी (नॉन रिब्रीथर मास्क) का उपयोग मरीजों को ऑक्सीजन देने में किया जा रहा है. यह प्रयोग से उन मरीजों को जिन्हें नाक में नली डालकर ऑक्सीजन देने पर भी सुधार नहीं हो रहा था. उन्हें सांस लेने में आसानी हो रही है. वे बेहतर तरीके से सांस ले पा रहें हैं. ये मास्क ऑक्सीजन थैरेपी में उपयोग में लाया जाता है. इस तरह के मास्क के उपयोग से इंदौर में जल्द से जल्द मरीज ठीक हो रहे है. कई मरीजों का इस तरह के मास्क लगाए गए हैं. वे इसे सहजता से उपयोग भी कर रहे है

मास्क से बढ़ जाता है ऑक्सीजन का लेबल
नॉन रिब्रीथर मास्क उन मरीजों के लिए मददगार बन रहे हैं जिनको वेंटिलेटर की आवश्यकता तत्काल पड़ती है लेकिन शुरूआत में इन मास्क से ऑक्सीजन का लेबल बढ़ जाता है जिससे उनको वेंटिलेटर नहीं लगाना पड़ता है. अभी तक जितने मरीजों पर इस मास्क का उपयोग किया गया है, उन सभी मरीजों की ऑक्सीजन में इम्प्रूवमेंट देखा गया है. ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे मरीज भी इस मास्क का उपयोग कर अपने आपको बेहद सुरक्षित और स्वस्थ महसूस करते हैं क्योंकि इसमें उनको वेंटिलेटर पर नहीं जाना पड़ता है. साथ ही वायपैक मशीन की आवश्यक्ता भी नहीं पड़ती है. यह मॉस्क जो अत्यंत सस्ता है और प्रभावकारी सिद्ध भी हो रहा हैय

ये होता है नॉन रिब्रीथर मास्क



नॉन रिब्रीथर मास्क ऑक्सीजन थैरेपी की डिलीवरी में सहायता करने के लिए दवा में इस्तेमाल किया जाने वाला उपकरण है और ये ऑक्सीजन की उच्च सांद्रता के वितरण के लिए अनुमति देता है. इसमें एक सामान्य ऑक्सीजन मास्क, 1000 सीसी ऑक्सीजन वाला बैग और ऑक्सीजन ट्यूब लगी रहती है. रिब्रिथिंग को रोकने के लिए इस नॉन रिब्रीथर मास्क में कम-प्रतिरोध वाला फ्री चेक वाल्व होता है जो गैस को बाहर निकलने की अनुमति देता है, जिससे रोगी बेहतर गुणवत्ता वाले हवा को प्राप्त कर सकते हैं. मरीजों की ऑक्सीजन थैरेपी में ये काम आते हैं.



इंदौर में कम हो रही कोरोना वायरस की तीव्रता
इंदौर में अब कोविड पॉजिटिव मरीजों में कोरोना वायरस की तीव्रता कम हो रही है. इसे अच्छी खबर कहा जाएगा कि शहर में कोविड से मृत्यु की दर अब राष्ट्रीय औसत के नजदीक आ गई है. इंदौर में जहां पहले करीब 11 फीसदी मृत्यु दर थी,अब वो घटकर 3.86 प्रतिशत पर आ गई है. हालांकि गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. ज्योति बिंदल का कहना है कि इंदौर संभाग के सभी जिलों में अभी भी विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक सेमिनार आयोजित कर उन्हें ट्रीटमेंट प्लान के बारे में और बेहतर ढंग से ट्रेनिंग देने की आवश्यकता है जिससे वे मरीजों का इलाज औऱ बेहतर ढंग से कर पाएंगे और इससे मृत्युदर और कम हो जाएगी.

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First published: May 22, 2020, 11:07 PM IST
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