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MPPSC परीक्षा में आपत्तिजनक सवाल : आयोग ने पेपर सैटर, मॉडरेटर को ब्लैक लिस्ट किया

Arun Kumar Trivedi | News18 Madhya Pradesh
Updated: January 13, 2020, 11:58 PM IST
MPPSC परीक्षा में आपत्तिजनक सवाल : आयोग ने पेपर सैटर, मॉडरेटर को ब्लैक लिस्ट किया
MPPSC में आपत्तिजनक सवाल : आयोग ने पेपर सैटर, मॉडरेटर को ब्लैक लिस्ट किया

मध्यप्रदेश विधानसभा (madhya pradesh assembly) की 230 सीटों में से 47 विधायक आदिवासी (tribal) समाज के हैं. इसमें से 11 आदिवासी विधायक बीजेपी के हैं. ये सभी इसे अपना अपमान बता रहे हैं. इसलिए लामबंदी भी कर रहे हैं

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इंदौर. एमपीपीएससी (MP PSC) की प्रारंभिक परीक्षा में भील समाज को आपराधिक प्रवृत्ति का बताने पर मचे बवाल के बाद मध्य प्रदेश राज्य लोकसेवा आयोग ने अपनी ग़लती मानी है. आयोग ने पेपर सेटर (Paper setter) और मॉडरेटर (Moderator) को नोटिस (NOTICE) देकर 7 दिन में जबाव मांगा है. साथ ही दोनों को सभी परीक्षाओं के लिए ब्लैक लिस्ट (Black listed) में डाल दिया है.

एमपीपीएससी (MP PSC) की प्रारंभिक परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बाद आयोग के चेयरमैन प्रोफेसर भास्कर चौबे ने कहा इस मामले में आयोग की अपनी सीमाएं हैं, लेकिन दोषियों पर नियमों के तहत जो भी कार्रवाई होगी वो की जाएगी. आयोग ने पेपर सेट करने वाले और मॉडरेटर दोनों को नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा है. साथ ही दोनों को सभी परीक्षाओं के लिए ब्लैक लिस्ट भी कर दिया है.

आयोग के दफ़्तर पर प्रदर्शन
मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग की 12 जनवरी को आयोजित परीक्षा में आदिवासी समाज की भील जनजाति को लेकर आपत्तिजनक सवाल पूछे गए थे. जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया.सोमवार को आयोग के मुख्यालय पर जय आदिवासी युवा संगठन और बीजेपी की छात्र ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया.इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. कार्यकर्ताओं ने जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस की मौजूदगी में ही जमकर नारेबाजी की. जयस के इंदौर इकाई के अध्यक्ष रविराज बघेल के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल के नाम कमिश्रर आकाश त्रिपाठी को ज्ञापन सौंपा. इसमें पीएससी के चेयरमैन प्रोफेसर भास्कर चौबे और सचिव रेणु पंत को हटाने की मांग की. कार्रवाई न होने पर प्रदेशभर में आंदोलन की चेतावनी दी.

चौतरफा घिरा लोक सेवा आयोग
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग चौतरफा घिर गया है. भले ही आयोग के चेयरमैन भास्कर चौबे ने पेपर सेटर और मॉडरेटर को नोटिस दे दिया हो, लेकिन मामला थमता नज़र नहीं आ रहा है.मध्यप्रदेश विधानसभा की 230 सीटों में से 47 विधायक आदिवासी समाज के हैं. इसमें से 11 आदिवासी विधायक बीजेपी के हैं. ये सभी इसे अपना अपमान बता रहे हैं. इसलिए लामबंदी भी कर रहे हैं. धार जिले की मनावर से कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने तो राज्यपाल को पत्र लिखकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है.वहीं खंडवा जिले के पंधाना से बीजेपी विधायक राम डांगोरे ने भी अपनी आपत्ति जताई है.

गृह मंत्री बाला बच्चन ने भी जताई आपत्तिएमपीपीएससी के सवाल पर मध्यप्रदेश के गृह मंत्री बाला बच्चन ने कहा कि ये गम्भीर मामला हैं. मैं भी भील जाति से आता हूं. पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और उसके बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय की जाएगी.उन्होंने कहा किसी जाति विशेष को इस तरह बताना गलत है इसको हम चैक करा रहे हैं.

MP PSC के चेयरमैन ने कही ये बात
सोमवार को एमपीपीएससी ने अपनी सफाई देने के लिए आनन फानन में प्रेस कांफ्रेंस बुलायी.आयोग के चेयरमैन भास्कर चौबे ने बताया कि मामले में पेपर सेटर और मॉडरेटर से जवाब मिलने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी.गोपनीयता बनाए रखने के लिए आयोग के सदस्य परीक्षा होने तक पेपर नहीं देखते हैं. दोषियों पर कार्रवाई की आयोग की अपनी सीमा है. इसलिए PSC किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं करा सकता. वहीं उन्होंने प्रश्नपत्र में आए दूसरे गलत सवालों के संबंध में कहा आयोग की समिति इसकी भी जांच कर रही है.

ये पूछा गया था सवाल
एमपी पीएससी की रविवार को हुई परीक्षा में भील जनजाति को लेकर आए गद्यांश में लिखा था कि भील निर्धन जनजाति है. भीलों की आर्थिक विपन्नता का प्रमुख कारण आय से अधिक व्यय करना है. भीलों की आपराधिक प्रवृत्ति का एक प्रमुख कारण यह है कि ये सामान्य आय से अपनी देनदारियां पूरी नहीं कर पाते. इसलिए धनोपार्जन की आशा में गैर वैधानिक और अनैतिक कामों में भी संलिप्त हो जाते हैं.

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MPPSC की परीक्षा में भील जनजाति पर किए सवाल पर उठा विवाद

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First published: January 13, 2020, 10:20 PM IST
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