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इंदौर: घातक रसायन से बनाई जा रही थी नकली दवाएं, सरकारी अस्पताल में भी सप्लाई

Arun Kumar Trivedi | News18 Madhya Pradesh
Updated: January 23, 2020, 10:01 AM IST
इंदौर: घातक रसायन से बनाई जा रही थी नकली दवाएं, सरकारी अस्पताल में भी सप्लाई
इंदौर में नकली दवाईयों की फैक्ट्री पर छापे में गिरफ्तार आरोपी.

फैक्ट्री चाचा-भतीजा मिलकर चला रहे थे. क्राइम ब्रांच (Indore Police Crime Branch), आयुष विभाग और ड्रग्स विभाग की संयुक्त टीम ने फैक्ट्री संचालक और कर्मचारी को गिरफ्तार कर फैक्‍ट्री सील कर दी.

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इंदौर. शहर में नकली दवा (Fake medicine) बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया है. इस कारखाने में सोनामिंट और सोडामिंट टेबलेट्स सोडियम बायकार्बोनेट जैसे घातक रसायन से बनाई जा रही थीं. ये दवाइयां प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और इंदौर के दवा बाज़ार में खपाई जा रही थीं. जानकारी के मुताबिक, यह गोरखधंधा 20 साल से चल रहा था. फैक्ट्री चाचा-भतीजा मिलकर चला रहे थे. क्राइम ब्रांच, आयुष विभाग और ड्रग्स विभाग की संयुक्त टीम ने आरोपी फैक्ट्री संचालक और कर्मचारी को गिरफ्तार कर कारखाना सील कर दिया है.

प्रदेश भर में चलाए जा रहे 'शुद्ध के लिए युद्ध' अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई की गई है. इंदौर पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी कि मकान नंबर 35 (शिक्षक नगर) में एक व्यक्ति मिलावटी दवाई बनाने का काम करता है. उसी जगह फैक्ट्री भी है. इसके बाद इंदौर पुलिस क्राइम ब्रांच, आयुष विभाग, ड्रग्स विभाग, थाना हातोद और थाना एरोड्रम की एक संयुक्त टीम बनायी गई. टीम ने मौके पर पहुंचकर दबिश दी. मौके पर दो लोग मिले जिन्‍होंने अपना नाम संतोष पिता साहिबराव पाटिल उम्र 38 साल निवास 102 धर्मराज कॉलोनी इन्दौर और फैक्ट्री का संचालक नरेन्द्र जैन पिता एस.एल. जैन उम्र 54 साल निवासी कालानी नगर इंदौर बताया.

नकली दवा का भंडार
टीम ने जब फैक्ट्री का जायज़ा लिया तो कारखाने में सोनामिन्ट नाम से दवाई बनाकर थोक में बेची जा रही थी. कारखाने पर सोनामिन्ट नाम की दवाई की लाखों टेबलेट खुले में कंटेनर्स में रखी मिलीं. ये दवाइयां नरेन्द्र जैन की इसी फैक्ट्री में बनाई जा रही थीं. सोनामिन्ट टेबलेट में सोडियम बायकार्बोनेट 250 एमजी, मेनथाल .03 एमजी, जिंजर 10 एमजी, पिपरमेंट ऑईल .0024 एमएल, शक्कर और कलर मिलाकर बनाया जा रहा था.

एक डिब्बे में 1000 टैबलेट 17 रुपए में
एक डिब्बे में 1000 टेबलेट पैक की जाती थीं. एक डिब्बा नरेन्द्र जैन 17 रुपए में बेचता था जो मार्केट में 60 रुपए में बिकता था. संचालक नरेन्द्र जैन की फैक्ट्री में बनाई जा रही दवाई में इस्‍तेमाल सोडियम बायकार्बोनेट मेडिकल में उपयोग के लायक नहीं पाया गया. कारखाने में कुल 27 बोरियां मिलीं जो हानिकारक सोडियम बायकारबोनेट की थीं. इससे आरोपी नरेन्द्र जैन दवाई बनाकर मार्केट मे बेच रहा था. पुलिस ने सारा माल ज़ब्त कर लिया है.

चचा-भतीजे का काला धंधानरेन्द्र जैन ने अपने भतीजे राजू बंबोरिया के नाम से फार्माकेम नाम से लायसेंस ले रखा था. यह आयुर्वेदिक दवाई बनाने का लाइसेंस था, लेकिन आरोपियों के कारखाने में साल 2009 के पहले की कई एलोपेथिक दवाइयों की 30 बोरी रखी मिलीं, जिनकी एक्सपायरी डेट निकल चुकी थी. नरेन्द्र जैन टेबलेट बनाने के लिए दो मशीनों का उपयोग करता था.

संचालक-कर्मचारी गिरफ़्तार
आयुष विभाग के अधिकारियों ने अनुपयुक्त रॉ मटेरियल का सैंपल लेने के बाद एक रिपोर्ट एरोड्रम थाने को दी. इसमें स्पष्ट किया गया की संचालक नरेन्द्र जैन, मालिक राजू बंबोरिया और कर्मचारी संतोष पाटिल द्वारा दवाई बनाने के लिए हानिकारक सोडियम बायकार्बोनेट का उपयोग की जा रही थी. इस प्रकार से धोखाधड़ी कर करोड़ों रुपए मुनाफा कमाया जा रहा है. इस रिपोर्ट के आधार पर थाना एरोड्रम पुलिस ने आईपीसी की धारा 420, 274 और 275 के तहत फैक्ट्री संचालक नरेन्द्र जैन, मालिक राजू बंबोरिया, कर्मचारी संतोष पाटिल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. आरोपी नरेन्द्र जैन और संतोष पाटिल को गिरफ्तार कर लिया गया है.

बड़ी फार्मा एजेंसियों को सप्‍लाई की जाती थी दवाइयां
आरोपी नरेन्द्र जैन ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह करीब 20 साल से दवाई बनाने का काम कर रहा है. पहले वह साल 2000 से वर्ष 2009 तक एलोपैथी दवाई बनाना था. उसके बाद 2009 से वो आयुर्वेदिक दवाइयां भी बनाने लगा. उसके भतीजे राजू बंबोरिया के नाम से उसने फार्माकेम नाम से लाइसेंस ले रखा था. इस फैक्‍ट्री में बनी दवाइयां सुगन फार्मा, जैनम फार्मा, शाह फार्मा, माताश्री फार्मा, ममता मेडिकोज जैसे कई फार्मा एजेंसियों को होलसेल में सप्लाई की जाती थी.

दो फैक्ट्री
आरोपी नरेंद्र ने खुलासा किया कि हातोद मे पालिया रोड पर उसके भतीजे राजू बंबोरिया का एक और कारखाना है. उसमें एलोपेथिक दवाइयां बनाई जाती हैं. कारखाने पर भी क्राइम ब्रांच की दूसरी टीम ने ड्रग्स विभाग की टीम के साथ दबिश दी तो वहां पर भी लाइसेंस की शर्तो का उल्लंघन और अनियमितता पाई गई.

अयोग्य कर्मचारी
फैक्ट्री में अकुशल औऱ बुजुर्ग महिला श्रमिक काम कर रही थीं. अधिकारियों ने बताया कि जहां बेहद गंदे स्‍थान पर दवाइयां बनाई जा रही थीं. दवाइयों में न तो सही अनुपात में मिश्रण का इस्तेमाल किया जाता था और न ही लेबोरेटरी में उनका टेस्ट किया जा रहा था. एक ही कैंपस के भीतर कैप्सूल, टेबलेट्स और सीरप बनाया जा रहा था. इस प्रकार की बड़ी अनियमितता पाए जाने पर ड्रग्स विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों ने एरो फार्मा की पालिया स्थित फैक्ट्री को सील कर दिया. लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया है.

गैस और एसिडिटी की दवा
फैक्ट्री संचालक नरेन्द्र जैन ने बताया कि ये दवाइयां एसिडिटी और गैस की समस्या से पीड़ित लोगों के उपचार में उपयोग की जाती हैं. ये सोडियम बायकार्बोनेट से बनाई जाती थीं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.

सरकारी अस्पतालों में सप्लाई
इन मिलावटी और हानिकारक दवाओं की सप्लाई ठेकेदारों के ज़रिए सरकारी अस्पतालों में सस्ते दाम पर की जाती थी. साथ ही इंदौर के दवा बाजार में भी इन्हें खपाया जाता था. इस काम में बड़े और संगठित गिरोह के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है. पुलिस इसमें शामिल लोगों पता लगा रही है. सैंपल्स की बाकी रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ और धाराएं भी बढ़ाई जाएंगी.

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First published: January 23, 2020, 9:30 AM IST
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