इंदौर : लोकतंत्र से गद्दारी करने वाले पच्चीसानन रावण का दहन, कद घटा- कुंभकर्ण-मेघनाद गायब

पच्चीसानन रावण कांग्रेस से दलबदल करने वाले विधायकों का प्रतीक था.
पच्चीसानन रावण कांग्रेस से दलबदल करने वाले विधायकों का प्रतीक था.

इंदौर () में कोरोना ने विजयादशमी त्योहार की रौनक फीकी कर दी. प्रसिद्ध दशहरा मैदान पर इस साल दशकों पुरानी परंपरा टूट गई.हर साल हजारों लोगों की मौजूदगी में शाम 7 बजे 111 फीट के रावण,मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले समेत लंका का दहन किया जाता था. लेकिन इस बार सिर्फ 21 फीट का रावण (Rawan) जलाया गया.

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इंदौर.असत्य पर सत्य की जीत का त्यौहार दशहरा इस बार इंदौर (Indore) में अलग अंदाज में मना. यहां कांग्रेस ने दशानन रावण की जगह ऑनलाइन वर्चुअल पच्चीस सिरों वाले सत्ता का हरण करने वाले विधायकों के प्रतीक स्वरूप पच्चीसानन रावण (Rawan) का दहन किया.

कांग्रेस के प्रदेश सचिव राकेश सिंह यादव का कहना है कलयुग में सत्ता का हरण करने के बाद रावण भी दस सिरों से पच्चीस सिरों तक पहुंच गया है. देश के इतिहास में हमेशा दस सिरों वाले रावण दशानन का दहन करके असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है. लेकिन मध्यप्रदेश में मतदाताओं से विश्वासघात और लोकतंत्र से ग़द्दारी करने वाले विधायकों के प्रतीक स्वरूप पच्चीस सिरों वाले पच्चीसानन रावण का वर्चुअल दहन सोशल किया गया.कांग्रेस का दावा है कि सत्ता हरण करने वालों का तीन नवम्बर को दहन निश्चित है.बुराई पर हमेशा अच्छाई की जीत होती है. तीन नवम्बर को लोकतंत्र से विश्वासघात करके सत्ता का हरण करने वाले ग़द्दारों का जनता ईवीएम का बटन दबाकर वास्तविक दहन करेगी.





दो दीपावली
कांग्रेस का दावा है इस साल प्रदेश में दो बार दीपावली मनाई जाएगी. पहली दीपावली दस नवंबर को कमलनाथ सरकार के सत्ता में वापस लौटने की ख़ुशी में मनायी जाएगी और दूसरी दीपावली 14 नवम्बर को प्रदेश में कमलनाथ सरकार के नेतृत्व में राम राज्य स्थापित होने की ख़ुशी में मनाई जाएगी.

111 के बजाय 21 फीट का रावण,गायब रहे मेघनाद और कुंभकर्ण
इंदौर में कोरोना ने विजयादशमी त्योहार की रौनक फीकी कर दी. प्रसिद्ध दशहरा मैदान पर इस साल दशकों पुरानी परंपरा टूट गई.हर साल हजारों लोगों की मौजूदगी में शाम 7 बजे 111 फीट के रावण,मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले समेत लंका का दहन किया जाता था. लेकिन,इस साल कोविड-19 के संकट ने रावण के कद को कम कर दिया. लंका समेत कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले गायब रहे. केवल 21 फीट का रावण जलाया गया.यहां न कोई मंच था और ना हाथी घोड़े दिखाई दिए.बस भगवान राम के प्रतीक के रूप में एक भक्त के जरिए रावण का दहन कराया गया.दशहरे पर रावण दहन के शहर में अलग-अलग आयोजन होते थे जिनमें हजारों लोग मौजूद रहते थे. लेकिन कोरोना के कारण इस बार कम जगह आयोजन हुए और प्रशासन ने सिर्फ 100 लोगों के मौजूद रहने की अनुमति आयोजकों को दी थी.
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