पुण्यतिथि विशेष: 'कॉलेज में इमली पेड़ के नीचे बैठकर गुनगुनाते थे किशोर कुमार'

इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में इमली का एक बड़ा पेड़ है. इसी के नीचे बैठकर किशोर रियाज किया करते थे. वे सुबह-सुबह इस पेड़ के नीचे आते थे और घंटों तक रियाज करते थे

News18 Madhya Pradesh
Updated: October 13, 2018, 11:44 AM IST
पुण्यतिथि विशेष: 'कॉलेज में इमली पेड़ के नीचे बैठकर गुनगुनाते थे किशोर कुमार'
Kishore Kumar
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Updated: October 13, 2018, 11:44 AM IST
अहलदा, मस्तमौला. दूसरों से बेहद अलग रोशिके रमाकु, यानि किशोर कुमार खंडवा वाले. किशोर कुमार कुछ ऐसा ही परिचय देते थे अपने नाम का. आज किशोर कुमार की पुण्यतिथि है. जिंदगी को अलमस्त अंदाज से देखते हुए हर वक्त मस्ती से भरा ये फनकार ताउम्र अपने नाम के उल्टे उच्चारण की तरह उल्टा ही रहा. समझ के हर दायरे से बाहर बिलकुल निराला. खंडवा वाले किशोर कुमार का इंदौर से दिली नाता रहा. इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज के स्टेज पर उनके अंदर के गीतकार ने मुक्कम्मल रूप लिया.

खंडवा में स्कूली पढ़ाई के बाद किशोर कुमार और उनके छोटे भाई अनूप कुमार दोनों ही इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ने आ गए. कॉलेज में उनके साथ पढ़ने वाले साथी बताते हैं कि वे बेहद शर्मीले थे. स्टेज शो के समय पर्दे के आगे नहीं पर्दे के पीछे से गाना पसंद करते थे. स्टेज पर कोई शो चल रहा होता तो किशोर पर्दे के पीछे छिप जाते, कभी किसी लड़की तो कभी किसी लड़के की आवाज निकालते. मसखरापन शुरू से उनके खून में था यहां तक कि उन्हें गाना भी होता तो वे पर्दे के पीछे छिपते फिर गाना सुनाते. (इसे देखें- Youtube : इन सात नगमों के बिना अधूरा है किशोर कुमार का कलेक्शन)

किशोर दा के जानने वाले बताते हैं कि मुफलसी के दौर में किशोर यहां उधार की चाय पिया करते थे ये. उधार 5 रुपए बारह आने हो गया. कैंटिन वाला जब भी उधार मांगता किशोर मस्तमौला अंदाज में गाते, पांच रुपईया बारह आना, मारेगा भईया नानाना. बस ऐसे ही ये छेड़खानी कब गाना बन गई पता ही नहीं चला.

लोग बताते हैं अमीर गायक होने के बाद भी किशोर ने कभी उस कैंटीन वाले को पांच रुपए बाहर आने नहीं चुकाए. क्रिश्चियन कॉलेज के स्टेज से शुरू हुआ ये सफर गायक, संगीतकार, अभिनेता, निर्माता, लेखक जैसे अलग-अलग बॉलीवुड किरदारों में ढलता गया.

इसी क्रिश्चियन कॉलेज में इमली का एक बड़ा पेड़ है. इसी के नीचे बैठकर किशोर रियाज किया करते थे. वे सुबह-सुबह इस पेड़ के नीचे आते थे और घंटों तक रियाज करते थे. जब रियाज से उठते तो उनके आस-पास दोस्तों का जमघट लग जाता था उनके साथी आज भी उनको इसी अंदाज में याद करते हैं.

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